आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) पर अपने भ्रष्टाचार और नाकामियों को छुपाने के लिए दिल्ली की जनता पर टैक्स थोपने का आरोप लगाया है। आप के वरिष्ठ नेता दुर्गेश पाठक ने बुधवार को कहा कि एसडीएमसी ने विकास शुल्क खाली प्लॉट में कार्यक्रम करने पर शुल्क लगाने का फैसला लिया है, जिससे व्यापारियों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोग प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने पिछले 14 वर्षों में जमकर भ्रष्टाचार करके दिल्ली एमसीडी को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। भाजपा ने भ्रष्टाचार और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए टैक्स में वृद्धि की है। पाठक ने कहा कि आप टैक्स में वृद्धि के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगी। उन्होंने दिल्ली के भाजपा प्रमुख आदेश गुप्ता और महापौरों से इस मामले में हस्तक्षेप करने और इस अमानवीय टैक्स वृद्धि के निर्णय को वापस लेने की मांग की है।
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बुधवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के दिल्ली वैलनेस समिट को संबोधित किया। जैन ने समग्र कल्याण अस्तित्व की दिशा में अपने आप को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मोहल्ला क्लीनिक स्वास्थ्य पर काउंसलिंग का एक बेहतर स्तर है और एक मजबूत अस्पताल प्रणाली और अन्य पहलूओं को मजबूत करने का आधार है।
साथ ही बेघरों को आश्रय प्रदान करना, मुफ्त बिजली और महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त यात्रा जैसे विशेषाधिकार प्रदान करना महामारी में बड़ी राहत देने वाला है। जैन ने कहा कि बीमारी को आराम करके ठीक किया जा सकता है और बाहरी आराम की बजाय इसकी शुरूआत अंदरूनी आराम से होती है। जैन ने कहा कि केवल शारीरिक ही नहीं, मानसिक व सामाजिक देखभाल भी समान रूप से आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए उनका मंत्र केवल अपने मन को विश्राम देना है। एक सवाल पर जैन ने कहा कि मोहल्ला क्लिनिक, शेल्टर होम व बेहतर इलाज के साथ-साथ मुफ्त बिजली और महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा जैसी सुविधाओं ने इस महामारी के दौरान दिल्ली वासियों को राहत प्रदान की है। जैन ने वैलनेस सीधे तौर से अर्थव्यवस्था से संबंधित है।
नगर निगम द्वारा नौकरी से निकाले गए तृतीय व चतुर्थी श्रेणी के 500 से ज्यादा कर्मचारियों ने बुधवार को सेक्टर-34 स्थित नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। नगर पालिका संघ हरियाणा ने प्रशासन से मांग की कि निकाले गए सभी कर्मचारियों को वापिस नौकरी पर लिया जाए और सभी की नौकरी रेगुलर बेसिस और निगम रोल पर लेने के लिए सरकार को फाइल के माध्यम से आवेदन भेजा जाए।
निकाले गए आउटसोर्स कर्मचारियों ने नारे लगाते हुए अपनी मांगों को पूरा करने की गुहार निगम कमिश्नर से लगाई। सभी जिले के डीसी अमित खत्री से भी मिले। डीसी ने आश्वासन दिया कि वह निगम कमिश्नर से बात करेंगे। इस मौके पर नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान राजेश सारवान ने कहा कि बीते समय में भी कई बार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है।
जिसके लिए हम समय-समय पर अपने हक की लड़ाई लड़ते आए हैं बहुत से कर्मचारी ऐसे भी हैं, जोकि आंदोलन व हड़ताल करके ठेकेदारी प्रथा से डायरेक्ट निगम रोल पर आए हैं।
आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एवं सह-प्रभारी हरियाणा डॉ सुशील गुप्ता ने कहा कि किसानों के मसीहा ताऊ देवीलाल तथा किसानों के हितैषी होने का दम भरने के नाम पर चुनाव जीत कर सत्ता में भागीदार बने बैठे हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को तुरंत प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
बुधवार को प्रैसवार्ता में डॉ गुप्ता ने कहा कि हरियाणा एवं पंजाब दोनों ही राज्यों में पिछले सात दशक से मंडी बोर्ड सिस्टम के जरिये खरीद प्रणाली जारी है। अकेले हरियाणा प्रदेश में करीब 113 अनाज मंडियां,168 सब यार्ड एवं 196 खरीद केंद्र हैं। हरियाणा में लगभग 35 हजार आढ़ती है, 70 हजार मुनीम और करीब 20 लाख किसान परिवार हैं।
मंडी सिस्टम से करीब 4 लाख मजदूर परिवार भी इससे जुड़े है तो हरियाणा सरकार काले बिलों को लाकर इन लाखों लोगों का मुहं का निवाला क्यों छीन रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार को ऐसी क्या एमरजेंसी थी जिसके लिए उसे ये अध्यादेश लाने पड़े ?
बाबरी मस्जिद मामले में अदालत ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि घटना पूर्व नियोजित नहीं लगती। वहीं, बरी होने के बाद एक आरोपी जय भगवान गोयल बोले कि ढांचा एजेंडे के तहत ही गिराया था। एकाएक कुछ नहीं हुआ। बहरहाल, चलिए शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ...
आज इन 7 इवेंट्स पर रहेगी नजर 1. IPL में आज मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब आमने-सामने होंगे। टॉस शाम 7 बजे होगा। मैच शाम साढ़े 7 बजे शुरू होगा। 2. आज अनुराग कश्यप को पूछताछ के लिए मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन बुलाया गया है। फिल्ममेकर सुबह 11 बजे जाएंगे। 3. झारखंड में आज से स्कूल, सिनेमाघर और धार्मिक स्थल खोलने पर निर्णय लिया जा सकता है। 4. आज से राजस्थान का रणथंभौर टाइगर पार्क खोल दिया जाएगा। 5. मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग की ऑनलाइन कक्षाएं आज से, करीब 7 लाख छात्र जुड़ेंगे। 6. पंजाब में खेती बिलों को लेकर सबसे बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। अकाली वर्कर और किसान-मजदूर मोहाली से राज्यपाल को मेमोरेंडम देने के लिए चंडीगढ़ जाएंगे। 7. आज से दुर्ग और धमतरी में लॉकडाउन होगा खत्म। दुर्ग में रात 8 बजे तक खुल सकेंगी दुकानें। साप्ताहिक बंदी का निर्णय व्यापारी खुद कर सकेंगे।
अब कल की महत्वपूर्ण 7 खबरें
1. बाबरी मामले में 28 साल बाद आडवाणी-मुरली समेत 32 आरोपी बरी
बाबरी मस्जिद ढांचा ढहाए जाने के 265 दिन बाद मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई टीम करीब 3 साल जांच करती रही। फिर सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में ही सुनवाई शुरू हुई। आखिरकार 30 सितंबर को फैसला आ गया। घटना के 28 साल बाद बाबरी से सब बरी कर दिए गए। सब यानी सभी 32 आरोपी, जो जिंदा हैं। वैसे कुल 48 आरोपी थे। इनमें से 16 अब नहीं हैं। -पढ़ें पूरी खबर
2. राम मंदिर पर 57 दिन बाद बोले आडवाणी: ‘जय श्रीराम, ये खुशी का पल है’
बाबरी विध्वंस केस में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बुधवार को लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया। फैसले के बाद लालकृष्ण आडवाणी (92) ने कहा कि यह हम सभी के लिए खुशी का पल है। कोर्ट के निर्णय ने मेरी और पार्टी की रामजन्मभूमि आंदोलन को लेकर प्रतिबद्धता और समर्पण को सही साबित किया है। -पढ़ें पूरी खबर
3. हाथरस गैंगरेप: पुलिस ने रात में खुद ही पीड़िता का शव जला दिया
हाथरस में कथित गैंगरेप पीड़ित का बीती रात पुलिस ने अंतिम संस्कार कर दिया। पीड़ित के भाई ने भास्कर से बात करते हुए कहा, 'पुलिस ने हमें उसका चेहरा तक नहीं देखने दिया। हमें नहीं पता पुलिस ने किसे जलाया।' मोदी ने योगी से कहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। राज्य सरकार ने 3 सदस्यों की एसआईटी बनाकर 7 दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। -पढ़ें पूरी खबर
4. UPSC एग्जाम पर सुप्रीम कोर्ट: लास्ट अटेम्प्ट वाले कैंडीडेट्स को एक और मौका दें
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा (प्रिलिम्स) परीक्षा 2020 पर बुधवार को कहा कि 4 अक्टूबर को होने वाले ये परीक्षाएं कोविड महामारी के कारण नहीं टाली जा सकतीं। केंद्र सरकार इस पर विचार करे कि ऐसे कैंडीडेट़्स को एक और मौका दिया जा सकता है जिनके पास अपना आखिरी अटेम्प्ट बचा है और जो कोरोना के कारण परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे। -पढ़ें पूरी खबर
5. अंगदान करेंगे अमिताभ बच्चन, ट्विटर पर लिखा- मैं अंगदान का संकल्प ले चुका हूं
अमिताभ बच्चन ने 77 साल की उम्र में अंगदान करने का संकल्प लिया है। इस बात की जानकारी उन्होंने मंगलवार देर रात ट्वीट कर दी। उन्होंने एक फोटो भी शेयर किया है, उनके कोट पर हरे रंग का रिबन लगा है, जो कि अंगदान के संकल्प का प्रतीक है। बच्चन ने अपने ट्वीट में लिखा, "मैं अंगदान का संकल्प ले चुका हूं...इसकी पवित्रता दिखाने के लिए हरे रंग का रिबन लगाया है।" -पढ़ें पूरी खबर
6. रिया को हो सकती है 10 से 20 साल की जेल
ड्रग्स मामले में मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के एडीजी अनिल सिंह ने कहा था कि रिया चक्रवर्ती का सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में छोटा सा कनेक्शन है। अब एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दैनिक भास्कर से कहा- रिया और शोविक के केस में डेढ़ किलो चरस जब्त की गई है। उन्हें 10-20 साल तक की सजा हो सकती है। -पढ़ें पूरी खबर
7. आज से होंगे 9 अहम बदलाव: बीमा पॉलिसी में अब ज्यादा बीमारियां कवर होंगी
1 अक्टूबर से देशभर में कई नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। वाहन चलाने वालों और विदेश में पैसा भेजने वालों से लेकर गूगल पर मीटिंग करने वालों तक के लिए इन बदलावों को जानना जरूरी है। इनमें गाड़ी चलाते हुए मोबाइल के इस्तेमाल का भी जिक्र है और मिठाई खरीदते समय ध्यान रखने वाली बात का भी। -पढ़ें पूरी खबर
अब 1 अक्टूबर का इतिहास
1854: भारत में डाक टिकट का प्रचलन प्रारंभ हुआ।
1949: चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का शासन आरंभ हुआ।
1967: भारतीय पर्यटन विकास निगम की स्थापना हुई।
आखिर में जिक्र मशहूर उर्दू शायर मजरूह सुल्तानपुरी का। आज ही के दिन 1919 में उनका जन्म हुआ था। पढ़िए उन्हीं का एक मशहूर शेर....
बिहार आबादी के लिहाज से देश का तीसरा बड़ा राज्य है। मुस्लिम आबादी भी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद यहां सबसे ज्यादा है। प्रदेश की 243 सीटों में से 38 ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोटर 20% से ज्यादा हैं। ये वोट महा गठबंधन का परंपरागत वोट बैंक कहे जाते हैं। लेकिन, जदयू, लोजपा जैसे एनडीए के दलों को भी मुस्लिम वोट मिलता है। इस चुनाव में मुस्लिम वोटर किस तरफ जाएगा ये तो 10 नवंबर को पता चलेगा। लेकिन,पिछले चुनावों में मुस्लिम वोटर किसके साथ रहा है और कितने मुस्लिम विधायक बन रहे हैं, आइए जानते हैं...
पिछली बार 23 मुस्लिम विधायक चुने गए थे
2015 के चुनाव में 23 मुस्लिम विधायक चुनकर आए थे। 2000 के चुनावों के बाद ये पहली बार था, जब इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम विधायक जीते थे। 2000 के चुनाव में 29 मुस्लिम विधायक चुने गए थे।
2015 में सबसे ज्यादा 11 मुस्लिम विधायक राजद से थे। कांग्रेस के 27 विधायकों में से 6, जदयू के 71 में 5 मुस्लिम विधायक बने। भाजपा के 53 में से एक भी विधायक मुस्लिम नहीं है।
1985 में सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक जीतकर आए थे
1951 में बिहार में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। उस वक्त यहां 276 सीटें होती थीं। उस वक्त कुछ सीटों पर एक से ज्यादा विधायक भी चुने जाते थे। 1951 में कुल 330 विधायक चुने गए थे, जिनमें से 24 मुस्लिम थे।
उसके बाद 1957 में चुनाव हुए, जिसमें 319 विधायकों में से 25 मुस्लिम थे। 1962 में 21 मुस्लिम विधायक जीते। सबसे ज्यादा 34 मुस्लिम विधायक 1985 के चुनाव में चुनकर आए थे। जबकि, सबसे कम 16 मुस्लिम विधायक अक्टूबर 2005 के चुनाव में आए।
6 साल में तीन चुनाव, किस तरफ गए मुस्लिम वोट?
पिछले 6 साल में बिहार में तीन चुनाव हो चुके हैं। जिनमें 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव और 2015 का विधानसभा चुनाव है। तीनों ही बार ज्यादातर मुस्लिम वोट राजद के साथ गए।
2014 का लोकसभा चुनावः सीएसडीएस-लोकनीति के सर्वे में आया था कि इस चुनाव में 60% से ज्यादा मुस्लिम वोट (ओबीसी मुस्लिम भी शामिल) राजद-कांग्रेस गठबंधन को मिले थे। नीतीश की जदयू को 21% मुसलमानों ने वोट किया। जबकि, भाजपा को मुसलमानों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया।
2015 का विधानसभा चुनावः इस चुनाव में राजद-कांग्रेस और जदयू के महा गठबंधन को मुसलमानों के 77.6% वोट मिले थे। जबकि, भाजपा और उसके सहयोगियों को महज 7.8% वोट मिले।
2019 का लोकसभा चुनावः पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में एनडीए (भाजपा+जदयू+लोजपा) बिहार की 40 में से 39 सीटें जीतने में कामयाब रहा था। सीएसडीएस-लोकनीति के सर्वे के मुताबिक, इस चुनाव में महा गठबंधन (राजद+कांग्रेस+हम+वीआईपी+रालोसपा) को 77% से ज्यादा मुस्लिम वोट मिले थे, जबकि एनडीए को सिर्फ 6% मुसलमानों ने वोट किया।
बिहार के सहरसा जिले में एक गांव पड़ता है। नाम है पनगछिया। इस गांव में 26 जनवरी 1956 को एक लड़के का जन्म होता है। उसके दादा राम बहादुर सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे। ये लड़का जब 17 साल का था, तब बिहार में जेपी आंदोलन शुरू होता है और यहीं से उसके राजनीतिक करियर की शुरुआत भी।
आपातकाल के बाद जब जनता पार्टी की सरकार बनी, तो 1978 में उस समय के प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई सहरसा आए थे। उस समय इस 22 साल के लड़के ने उन्हें काले झंडे दिखाए।
कहते हैं कि बिहार की राजनीति दो चीजों पर चलती है। पहली है जाति और दूसरी है दबंगई। इस लड़के ने इन दोनों का ही सहारा लेकर राजनीति में कदम रखा। इस लड़के की इतनी बात हो चुकी है, तो अब नाम भी जान ही लीजिए। उसका नाम है आनंद मोहन सिंह।
बिहार की राजनीति के बाहुबली नेता आनंद मोहन। जो इस वक्त एक डीएम की हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं। इनकी पत्नी और पूर्व सांसद लवली आनंद हाल ही में राजद में शामिल हुई हैं।
आनंद मोहन और लवली की शादी 13 मार्च 1991 को हुई थी। आनंद मोहन एक बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं। लवली आनंद एक बार की सांसद हैं।
1983 में तीन महीने जेल में गुजारे, 1990 में चुनावी राजनीति में उतरे
80 के दशक में बिहार में आनंद मोहन सिंह बाहुबली नेता बन चुके थे। यही वजह थी कि उन पर कई मुकदमे भी दर्ज हुए। 1983 में पहली बार तीन महीने के लिए जेल जाना पड़ा। जेल से आने के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा।
1990 में बिहार में विधानसभा चुनाव हुए। आनंद मोहन ने जनता दल के टिकट पर महिषी से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के लहतान चौधरी को 62 हजार से ज्यादा वोट से हरा दिया।
ये वो समय था जब देश में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की गई थीं। इन सिफारिशों में सबसे अहम बात थी सरकारी नौकरियों में ओबीसी को 27% का आरक्षण देना। जनता दल ने भी इसका समर्थन किया।
लेकिन, आनंद मोहन ठहरे आरक्षण विरोधी। उन्होंने 1993 में जनता दल से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई, जिसका नाम ‘बिहार पीपुल्स पार्टी’ यानी बीपीपी रखा। बाद में समता पार्टी से हाथ मिला लिया।
आनंद मोहन के घर बड़े नेताओं का आना-जाना लगा रहता था। इस तस्वीर में जो दिख रहे हैं, वो हैं पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर। एक समय बिहार में आनंद मोहन को लालू का विकल्प देखा जाने लगा था।
डीएम की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए, पहले नेता जिन्हें मौत की सजा मिली थी
जिस समय आनंद मोहन ने अपनी चुनावी राजनीति शुरू की थी, उसी समय बिहार के मुजफ्फरपुर में एक नेता हुआ करते थे छोटन शुक्ला। आनंद मोहन और छोटन शुक्ला की दोस्ती काफी गहरी थी।
1994 में छोटन शुक्ला की हत्या हो गई। आनंद उनके अंतिम संस्कार में भी पहुंचे। छोटन शुक्ला की अंतिम यात्रा के बीच से एक लालबत्ती की गाड़ी गुजर रही थी, जिसमें सवार थे उस समय के गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया।
लालबत्ती की गाड़ी देख भीड़ भड़क उठी और जी कृष्णैया को पीट-पीटकर मार डाला। जी कृष्णैया की हत्या का आरोप आनंद मोहन पर लगा। आरोप था कि उन्हीं के कहने पर भीड़ ने उनकी हत्या की। आनंद की पत्नी लवली आनंद का नाम भी आया।
आनंद मोहन को जेल हुई। 2007 में निचली अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुना दी। आनंद मोहन देश के पहले पूर्व सांसद और पूर्व विधायक हैं, जिन्हें मौत की सजा मिली।
मौत की सजा को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी। पटना हाईकोर्ट ने दिसंबर 2008 में मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। बाद में वो सुप्रीम कोर्ट गए। सुप्रीम कोर्ट ने भी जुलाई 2012 में पटना हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। आनंद मोहन अभी भी जेल में ही हैं।
जेल में थे, लेकिन चुनाव जीतते रहे
1996 में लोकसभा चुनाव हुए। उस वक्त आनंद मोहन जेल में थे। जेल से ही उन्होंने समता पार्टी के टिकट पर शिवहर से चुनाव लड़ा। उस चुनाव में उन्होंने जनता दल के रामचंद्र पूर्वे को 40 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।
1998 में फिर उन्होंने शिवहर से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार राष्ट्रीय जनता पार्टी के टिकट पर। ये चुनाव भी उन्होंने जीत लिया। 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में भी आनंद मोहन खड़े हुए, लेकिन हार गए।
खुद तो राजनीति में थे, पत्नी को भी लाए
आनंद मोहन का नाम उन राजनेताओं में आता है, जो अपनी पत्नी को भी राजनीति में लेकर आए। आनंद मोहन ने 13 मार्च 1991 को लवली सिंह से शादी की। लवली स्वतंत्रता सेनानी माणिक प्रसाद सिंह की बेटी हैं।
शादी के तीन साल बाद 1994 में लवली आनंद की राजनीति में एंट्री उपचुनाव से हुई। 1994 में वैशाली लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए, जिसमें लवली आनंद यहां से जीतकर पहली बार संसद पहुंचीं।
बिहार में लवली आनंद को लोग भाभीजी कहकर बुलाते हैं। लोग बताते हैं कि जब भाभीजी रैली करने आती थीं, तो लाखों की भीड़ इकट्ठा होती थी। इतनी भीड़ तो आनंद मोहन की रैलियों में भी नहीं आती थी। बिहार की राजनीति को करीब से देखने वालों का कहना है कि लवली आनंद की रैलियों में भीड़ देखकर उस समय लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे सरीखे नेता भी दंग रह जाते थे।
हालांकि, लवली आनंद की रैलियों में आने वाली भीड़ वोटों में तब्दील नहीं हो पाती थी। जब वोटिंग होती थी, तो लवली आनंद की हार ही होती थी।
लवली पार्टियां बदलती रहीं, लेकिन जीत न सकीं
आनंद मोहन और लवली आनंद के बारे में कहा जाता है कि जितनी तेजी से लोग कपड़े नहीं बदलते थे, उतनी तेजी से तो ये पार्टियां बदल लेते थे।
लवली आनंद पहली बार 1994 में उपचुनाव जीतकर सांसद बनी। उस समय उन्होंने बिहार पीपुल्स पार्टी से चुनाव लड़ा था। उसके बाद 1999 के लोकसभा चुनाव में भी वैशाली से ही खड़ी हुईं, लेकिन हार गईं।
2009 का लोकसभा चुनाव लवली ने कांग्रेस के टिकट पर शिवहर से लड़ा, लेकिन हार गईं। इस बीच 2004 में बिहार पीपुल्स पार्टी का मर्जर कांग्रेस में भी हो गया। 2010 में बिहार विधानसभा चुनाव में लवली कांग्रेस के टिकट पर ही आलम नगर से खड़ी हुईं, लेकिन ये चुनाव भी हार गईं।
बाद में कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए लवली आनंद सपा में शामिल हो गईं। 2014 के लोकसभा चुनाव में लवली सपा के टिकट पर शिवहर से फिर लड़ीं, लेकिन हार गईं। 2015 के विधानसभा चुनाव में वो जीतन राम मांझी की पार्टी हम (सेक्युलर) से शिवहर से खड़ी हुईं, लेकिन फिर हार गईं।
अब चुनाव की तारीखें आने के बाद लवली आनंद राजद में शामिल हो गई हैं। क्योंकि, वो हमेशा शिवहर से ही लड़ती रही हैं और उनके पति आनंद मोहन भी शिवहर से सांसद रह चुके हैं, इसलिए माना तो यही जा रहा है कि इस बार भी वो शिवहर से ही लड़ सकती हैं। देखते हैं पार्टी बदलने का इस बार क्या नतीजा निकलता है?