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Monday, November 9, 2020

दिल पहुंचा रहा हेलिकाॅप्टर क्रैश, स्वास्थ्यकर्मी भी गिरा, लेकिन दिल काे मरीज तक पहुंचा दिया

दिल पहुंचा रहा हेलिकाॅप्टर क्रैश, स्वास्थ्यकर्मी भी गिरा, लेकिन दिल काे मरीज तक पहुंचा दिया

ऐसा फिल्माें में तो अक्सर हाेता है, लेकिन असल जिंदगी में संभवत: पहली बार हुआ है। लाॅस एंजिलिस में हेलिकाॅप्टर एंबुलेंस से लाया जा रहा दिल प्रत्याराेपण से पहले ही हादसे का शिकार हाे गया। लेकिन स्वास्थ्यकर्मियाें और दमकलकर्मियाें की सजगता और तत्परता की बदाैलत उसे तुरत-फुरत प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे मरीज तक पहुंचा दिया गया।

दरअसल, हेलिकाॅप्टर ने प्रत्याराेपण के लिए दिल लेकर सैन डिएगाे से पूर्वी लाॅस एंजिलिस के लिए उड़ान भरी थी। दाेपहर करीब 3:15 बजे हाॅस्पिटल की छत पर बने हेलिपैड पर लैंडिंग से पहले वह अचानक घूमने लगा और क्रैश हाे गया। आठ सीटर अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकाॅप्टर के परखच्चे पूरी छत पर फैल गए। खुशकिस्मती से पायलट काे मामूली चाेटें आईं और दाे स्वास्थ्यकर्मी बाल-बाल बच गए।

तत्काल पहुंचे बचावकर्मियाें ने हाइड्राेलिक उपकरण से हेलिकाॅप्टर काे काटा और दिल वाले बाॅक्स काे निकाला, जाे भीतर सुरक्षित पड़ा हुआ था। उन्हाेंने बाॅक्स एक अन्य स्वास्थ्यकर्मी काे दिया। वह ऑपरेशन थिएटर की ओर भागने के लिए तेजी से मुड़ा, लेकिन हेलिकाॅप्टर के मलबे से टकराकर गिर गया।



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दुर्घटनाग्रस्त चॉपर की फोटो।


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62 दिन से कोमा में था 18 साल का चियू, भाई ने लिया पसंदीदा खाने का नाम तो आ गया होश

62 दिन से कोमा में था 18 साल का चियू, भाई ने लिया पसंदीदा खाने का नाम तो आ गया होश

पसंदीदा खाने का नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन, क्या आपने कभी सुना है कि इससे कोमा में मौजूद इंसान जाग भी सकता है? ऐसा एक वाकया सामने आया है ताइवान में। वहां, पसंदीदा खाने के जिक्र ने युवक को कोमा से बाहर निकाल दिया। 62 दिनों तक कोमा में रहने वाला 18 वर्षीय चियू आश्चर्यजनक तरीके से कोमा से बाहर आ गया।

उत्तरी-पश्चिमी ताइवान निवासी चियू जुलाई में स्कूटर दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे जानलेवा चोटें आई और कई अंदरूनी अंगों को चोट पहुंची। गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे बच्चे की सर्जरी की गई। इससे हालत में सुधार तो हुआ लेकिन वह गहरे कोमा में चला गया। वह दो महीने से अधिक समय तक कोमा में रहा।

अस्पताल में रहने के दौरान 6 बार सर्जरी हुई

चियू का इलाज करने वाले अस्पताल के डायरेक्टर ने बताया कि जब उसे यहां लाया गया तो उसके बचने की उम्मीद काफी कम थी। उसकी दाहिनी किडनी, लिवर और तिल्ली में चोट आई थी। मल्टीपल फ्रैक्चर होने के कारण उसके शरीर से खून बह रहा था। अस्पताल में रहने के दौरान उसकी छह सर्जरी करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि चियू अपनी मजबूत इच्छा शक्ति की बदौलत बचने में कामयाब तो हो गया, लेकिन साथ ही कोमा में भी चला गया।

चिकन फिलेट का नाम सुनते ही शुरू हुई हरकत

62 दिन तक वह कोमा में ही रहा। एक दिन चियू का बड़ा भाई उससे मिलने अस्पताल आया और मजाक में उससे कहा, ‘भाई मैं तुम्हारा फेवरेट चिकन फिलेट खाने जा रहा हूं।’ चियू के पसंदीदा खाने के जिक्र ने उसके बेहोशी की हालत से बाहर आने में मदद की और उसके पल्स रेट तेज हो गई। कुछ देर में वह जाग भी गया। बाद में पूरी तरह ठीक होने के बाद चियू को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।



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62 दिन तक वह कोमा में ही रहा। एक दिन चियू का बड़ा भाई उससे मिलने अस्पताल आया और मजाक में उससे कहा, ‘भाई मैं तुम्हारा फेवरेट चिकन फिलेट खाने जा रहा हूं।’ इसके बाद वह होश में आ गया।


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चुनाव ट्रम्प हारे, पर नींद आम अमेरिकी की उड़ी; देरी से आए नतीजाें के कारण तनाव-चिंता भी बढ़ी

चुनाव ट्रम्प हारे, पर नींद आम अमेरिकी की उड़ी; देरी से आए नतीजाें के कारण तनाव-चिंता भी बढ़ी

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे लगभग आ चुके हैं। डेमाेक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जाे बाइडेन का राष्ट्रपति बनना तय है। परिणामाें की औपचारिक घाेषणा बाकी है। 3 नवंबर काे साफ हाेने वाली तस्वीर 8 नवंबर काे स्पष्ट हुई। परिणामाें में हुई यह देरी अमेरिकियाें की सेहत पर भारी पड़ी है।

चुनाव परिणामाें की घाेषणा के दाैरान हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि देरी से आए नतीजाें के कारण अमेरिकी 13 कराेड़ 88 लाख 33 हजार 45 घंटे नहीं सो पाए। एक अमेरिकी की इलेक्शन डे के दिन औसतन 25.50 मिनट नींद खराब हुई। ये आंकड़े अमेरिकी लाेगाें का सेहत संबंधी रिकाॅर्ड रखने वाले एप के अध्ययन में सामने आए हैं।

परिणामों में उतार-चढ़ाव के कारण डिप्रेशन की शिकायत बढ़ी

वहीं काेमाे न्यूज द्वारा साेशल मीडिया पर किए गए एक अध्ययन में सामने आया कि अमेरिकियाें ने परिणामाें का इंतजार करते-करते तनाव भी महसूस किया। लाेगाें के तनाव में 15% बढ़ाेतरी हुई ताे उनकी चिंता में 9% तक इजाफा हुआ। परिणामों में उतार-चढ़ाव के कारण कई अमेरिकियों ने डिप्रेशन की भी शिकायत की ताे उनकी धड़कनें भी उच्चतम स्तर पर रहीं।

कई लाेगाें ने बढ़े तनाव और चिंता की शिकायत की थी

इसमें करीब डेढ़ गुना की बढ़ोतरी हुई। अस्पताल पहुंचे मरीजाें में चुनाव संबंधी कार्डियक मामले भी दर्ज किए गए। कंपास हेल्थ के सीईओ और प्रेसीडेंट टाॅम सेबेस्टियन के मुताबिक, कई लाेगाें ने बढ़े तनाव और चिंता की शिकायत की थी। वहीं बहुत से लाेगाें ने बताया कि उन्हें आशंका है कि चुनाव के परिणामाें के बाद कई शहराें में अशांति फैल सकती है और हिंसक प्रदर्शन हाे सकते हैं।

तनाव के कारण बढ़े हृदय संबंधी मामलाें काे लेकर भी कई लाेग अस्पताल पहुंचे। लास वेगास में साउथर्न हिल्स हाॅस्पिटल एंड मेडिकल सेंटर के कार्डियाेलाॅजिस्ट डाॅ. जिया खान के मुताबिक, उन्हें आशंका है कि हृदय संबंधी मामले इससे भी अधिक होंगे। 24 वर्षीय एक चुनाव कर्मी काे रातभर घबराहट हाेती रही। वह जब अस्पताल आया ताे उसे कार्डियक एरिथमिया निकला।



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प्रतिकात्मक फोटो


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Thursday, November 5, 2020

मैक्सिकाे में राेने की स्पर्धा हुई, 2 मिनट के वीडियाे मांगे, दहाड़ मारकर राेई अभिनेत्री जीती

मैक्सिकाे में राेने की स्पर्धा हुई, 2 मिनट के वीडियाे मांगे, दहाड़ मारकर राेई अभिनेत्री जीती

उत्तर अमेरिकी देश मैक्सिकाे में हर साल 1 नवंबर काे मृत दिवस (द डे ऑफ द डेड) मनाया जाता है। इस दिन लाेग अपने पूर्वजाें की कब्र पर जाते हैं। उनकी पसंदीदा वस्तुएं सजाते हैं। राेते हैं। सामूहिक रूप से उत्सव भी मनाते हैं। हालांकि इस साल काेराेना के चलते सारे कब्रिस्तान बंद हैं। सार्वजनिक उत्सवों पर पाबंदी रही। लाेग राे नहीं पाए। अपना मन हल्का नहीं कर पाए। अपनाें की माैत का उत्सव मनाने का माैका नहीं मिला। लेकिन सैन जुआन डेल रियाे शहर ने हर साल हाेने वाली राेने की स्पर्धा काे जारी रखा।

हर साल इसमें लाइव परफाॅर्मेंस देना हाेता था। इस बार वर्चुअल अायाेजन हुआ। ई-मेल से 2-2 मिनट की वीडियाे एंट्री बुलवाई गई। आश्चर्यजनक रूप से पिछले साल से दाेगुनी एंट्रीज पहुंचीं। सर्वश्रेष्ठ राेने वाला चुनने की परंपरा दरअसल प्राचीन परंपरा का सम्मान है, जिसमें किसी की माैत पर राेने के लिए किराए की महिलाएं बुलाई जाती थीं।

रोने की इस स्पर्धा का पहला अवॉर्ड कैलिफाेर्निया की प्रिंसेसा कैटलीना चावेज ने जीता। पेशे से अभिनेत्री चावेज कभी नहीं राेईं, लेकिन इस साल उन्हें खूब राेना पड़ा। वे कहती हैं, ‘कोरोना ने मुझे राेने पर मजबूर किया।’ उन्होंने एक अनजान कब्र के पास बैठकर वीडियो बनाया। इसके लिए अनुमति भी ली। दूसरे स्थान पर रहने वाली 58 वर्षीय सिल्वेरिया बाल्डेरास रुबियाे ने कहा कि मैंने पहले राेती हुई महिलाअाें काे देखा था। बस उसी तरह राेई और जीत गई।

सबसे सामयिक वीडियाे ब्रेंडा अनाकेरेन का रहा। जिन्हाेंने साल 2020 के बारे में राेने पर वीडियो बनाया। 31 वर्षीय ब्रेंडा कहती हैं, इस साल की त्रासदियां मेरे वीडियाे के लिए प्रेरणा बनी। टूरिज्म ब्यूराे के प्रमुख एजुअर्डाे गुइलेन के मुताबिक, माैत पर रोना ही नहीं, हंसना भी मैक्सिकाे की संस्कृति का हिस्सा है। यह समस्याओं का सामना करने का एक तरीका है।

रोने की सालाना स्पर्धा में हास्य घुला, रोने के वीडियो देख जज हंस पड़े

कई स्पर्धियाें ने बड़े नाटकीय वीडियाे बनाए। कई ने कब्र के पास बैठकर दहाड़ मार-मारकर राेने के वीडियाे भेजे। कुछ ने हास्यास्पद तरीके भी चुने। एक महिला ने घर में ही फूलों का गुलदस्ता रख रोेने का अभिनय किया। वीडियो देखकर पैनल में शामिल जज खुद को हंसने से नहीं रोक पाए। अगली बार से पुरुषों को भी स्पर्धा में शामिल किया जाएगा।



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Raney competes in Mexico, asks for 2 minutes of video, Rye wins by roaring


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Tuesday, November 3, 2020

अमेरिकी चुनाव के नतीजे तय करेंगे दुनिया में क्लीन और ग्रीन एनर्जी का भविष्य, जानिए कैसे?

अमेरिकी चुनाव के नतीजे तय करेंगे दुनिया में क्लीन और ग्रीन एनर्जी का भविष्य, जानिए कैसे?

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों के नतीजों पर पूरी दुनिया की नजर है। यह नतीजे सिर्फ अमेरिका का नया राष्ट्रपति तय नहीं करेंगे, बल्कि पूरी दुनिया में क्लीन और ग्रीन एनर्जी के लिए किए जा रही कोशिशों पर भी असर डालेंगे। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने तीन साल पहले क्लाइमेट चेंज पर बने पेरिस एग्रीमेंट से बाहर निकलने की घोषणा की थी। ऐसा हुआ तो ईरान और तुर्की के बाद अमेरिका तीसरा बड़ा देश होगा, जो क्लाइमेट चेंज से जुड़े कमिटमेंट पूरे नहीं करेगा।

दरअसल, बुधवार को अमेरिका औपचारिक रूप से पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट से बाहर हो रहा है। ट्विस्ट यह है कि डेमोक्रेटिक कैंडीडेट जो बाइडेन ने वादा किया है कि वे चुनाव जीते तो पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट में अमेरिका फिर जुड़ जाएगा। इसमें एक महीना तक लग सकता है। आखिर, डेमोक्रेट प्रेसिडेंट बराक ओबामा के टेन्योर में ही तो इस एग्रीमेंट को साकार करने में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावः जानिए कैसे अमेरिकन देसी तय करेंगे अबकी बार किसकी सरकार?

क्या है पेरिस एग्रीमेंट और यह ग्लोबल क्लाइमेट चेंज रोकने में अहम क्यों है?

  • दशकों तक बातचीत के बाद दुनिया के 197 देश इस बात को लेकर सहमत हुए थे कि वे धरती का तापमान बढ़ाने वाली गैसों का उत्सर्जन (एमिशन) कम करेंगे। चुनिंदा देशों ने ही डील से दूरी बनाई थी। एक्सपर्ट्स को लगता है कि पेरिस एग्रीमेंट में टारगेट्स बहुत कम रखे हैं, लेकिन दुनिया के ज्यादातर देशों को एक बात के लिए राजी करना इतना आसान नहीं था।
  • 2015 में पेरिस में सब देश साथ आए। यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज बनाया। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एग्रीमेंट को ऐतिहासिक बताया था। यह भी कहा था कि यह महज शुरुआत है। धरती के बढ़ते तापमान को रोकने के लिए आगे भी बहुत कुछ करने की जरूरत होगी।
  • इस एग्रीमेंट का लक्ष्य है दुनिया के तापमान को औद्योगिकीकरण से पहले की स्थिति के मुकाबले अधिकतम 2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखा जाए। हालांकि, वैज्ञानिक तो चाहते हैं कि धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखा जाए, लेकिन अब यह संभव नहीं लग रहा, क्योंकि 1 डिग्री सेल्सियस तापमान तो पहले ही बढ़ चुका है। पेरिस एग्रीमेंट में हर देश ने अपने स्तर पर टारगेट्स सेट किए और वह उस पर अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट दे रहा है।

क्या अब तक एग्रीमेंट की वजह से कुछ सुधार आया है?

  • फिलहाल किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। एमिशन कम करने के प्रयासों के अच्छे शुरुआती नतीजे सामने आए हैं। सच यह भी है कि जितने प्रयास अब तक हुए हैं, वह आने वाले समय में धरती के तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने से रोकने में नाकाफी होंगे।
  • पेरिस एग्रीमेंट के बाद भी दुनिया मौजूदा स्पीड से 3 डिग्री सेल्सियस तक गर्म होने की राह पर है। क्लाइमेट चेंज की वजह से परेशानियां सामने आने लगी हैं। यदि अब भी गंभीर प्रयास नहीं किए तो और तेज लू चलेगी, समुद्र का स्तर बढ़ेगा और बड़े शहरों में बाढ़ का सामना करना होगा। सरकारों को हर मौसम की तीव्रता का सामना करने के लिए तैयार होना होगा।

दुनियाभर में इस साल सितंबर सबसे गर्म महीना रहा, पिछले साल के मुकाबले 0.05° सेल्सियस तापमान ज्यादा था

यदि पृथ्वी का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से बढ़ गया तो क्या होगा?

कार्बन ब्रीफ के एक एनालिसिस के मुताबिक, अगर दुनिया 2 डिग्री सेल्सियस गर्म हुई तो…

  • समुद्र का जलस्तर 56 सेमी या 2 फीट बढ़ जाएगा।
  • 2055 तक समुद्र तटीय इलाकों में रहने वाले 30 मिलियन लोग हर साल बाढ़ में डूबेंगे।
  • 37% आबादी को हर पांच साल में तेज लू का सामना करना पड़ेगा।
  • 38.8 करोड़ लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा और 19.5 करोड़ लोग सूखे का सामना करेंगे।
  • 2100 तक मुख्य फसलों की पैदावार 9% तक कम हो चुकी होगी।
  • 2100 तक ग्लोबल पर-कैपिटा जीडीपी 13% तक कम हो चुकी होगी।

क्या ट्रम्प प्रशासन ने क्लाइमेट संकट को टालने के लिए कोई उपाय किए हैं?

  • नहीं, बल्कि संकट बढ़ाने वाले काम ही किए हैं। पिछले चार साल में ट्रम्प प्रशासन ने सिर्फ क्लाइमेट चेंज रोकने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों का मखौल ही उड़ाया। उन्होंने ओबामा के समय बने क्लाइमेट-फ्रेंडली कानूनों को रद्द किया। ड्रिलिंग और माइनिंग एक्टिविटी को बढ़ाया। इतना ही नहीं ऑयल, गैस और कोयले जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से हटकर क्लीन एनर्जी को अपनाने के प्रयासों पर भी ब्रेक लगाए।

यदि डोनाल्ड ट्रम्प फिर राष्ट्रपति बने तो क्या होगा?

  • ट्रम्प ने जून 2017 में व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पेरिस एग्रीमेंट से बाहर होने की घोषणा की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि पेरिस एग्रीमेंट अमेरिका के हित में नहीं है। इस वजह से वे नए सिरे से बातचीत शुरू करेंगे और ऐसा एग्रीमेंट करेंगे जो अमेरिका के हित में होगा।
  • 4 नवंबर 2019 को अमेरिका ने डील से बाहर निकलने की एक साल लंबी प्रक्रिया शुरू की। यूनाइटेड नेशंस (UN) को सूचना भी भेज चुका है कि 4 नवंबर 2020 को वह औपचारिक तौर पर पेरिस एग्रीमेंट से बाहर हो जाएगा।
  • जीतने पर ट्रम्प को बतौर प्रेसिडेंट फिर से चार साल मिल जाएंगे और वह क्लाइमेट चेंज के लिए ग्लोबल लेवल पर चल रही कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वैज्ञानिक कह रहे हैं कि जल्द से जल्द उपाय करने की जरूरत है और अगर अभी नहीं संभले तो देर हो चुकी होगी।
पेरिस एग्रीमेंट पर ट्रम्प के फैसले का विरोध करते प्रदर्शनकारी।

अमेरिका ने अब तक पेरिस एग्रीमेंट पर क्या किया है?

  • अमेरिका ने 2025 तक एमिशन को 2005 के स्तर से 26% से 28% तक घटाने का वादा किया था। यह अमेरिका की ओर से इस दिशा में सिर्फ शुरुआत ही होती। उसके बाद और भी प्रयास करने होते।
  • इकोनॉमिक फर्म रोडियम ग्रुप के एनालिसिस के मुताबिक, कोविड-19 महामारी ने इकोनॉमी को तबाह किया है, इसे देखते हुए अमेरिका से उम्मीद थी कि वह 2025 तक एमिशन को 2005 के स्तर से 20%-27% तक ले जाएगा।
  • क्लाइमेट एक्शन ट्रैकर के एनालिसिस के मुताबिक, अमेरिका ने जो वादा किया है, वह भी काफी नहीं है। यदि सभी देश उतना ही करें, जितना अमेरिका कर रहा है तो भी आने वाले वर्षों में पृथ्वी का तापमान 3-4 डिग्री सेल्सियस बढ़ने से कोई नहीं रोक सकेगा।

जो बाइडेन जीते तो क्या होगा?

  • बाइडेन ने पहले ही साफ किया है कि वे जल्द से जल्द पेरिस एग्रीमेंट जॉइन करेंगे। इसमें भी 30 दिन का वक्त लग ही जाएगा। पूर्व वाइस-प्रेसिडेंट ने महत्वाकांक्षी क्लाइमेट प्लान बनाया है, लेकिन उस पर कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत होगी।
  • उनका प्रस्ताव लागू कर पाना नामुमकिन होगा अगर डेमोक्रेट्स सीनेट पर कंट्रोल नहीं कर सके। अगर डेमोक्रेट्स के पास हाउस और सीनेट में बहुमत होगा और व्हाइट हाउस में बाइडेन होंगे तो ही क्लाइमेट को लेकर अमेरिकी चिंता जाहिर हो सकेगी।
  • बाइडेन ने कहा है कि वे 2050 तक एमिशन नेट-जीरो ले जाने की दिशा में प्रयास शुरू करेंगे। वैज्ञानिक भी यही कह रहे हैं कि अगर हर देश ने इस तरह का टारगेट सेट किया तो ही क्लाइमेट चेंज का संकट टल सकेगा, वरना मुश्किल तो आनी ही है।
  • बाइडेन चाहते हैं कि 2035 तक इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम कार्बन-फ्री हो जाए। उनका कहना है कि वे क्लीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य क्लाइमेट उपायों पर 2 लाख करोड़ डॉलर खर्च करेंगे। पहले चार साल में जितना ज्यादा हो सकेगा, वे खर्च करने को तैयार हैं।

अगर अमेरिका बाहर निकला तो दुनिया पर क्या असर होगा?

  • अगर अमेरिका पेरिस एग्रीमेंट से बाहर निकला तो बाकी देशों को गंभीरता से क्लाइमेट एक्शन लेने के लिए मनाने में दिक्कत होगी। अमेरिका ऐतिहासिक रूप से क्लाइमेट चेंज में बड़ा कॉन्ट्रिब्यूटर रहा है।
  • इस समय चीन सबसे ज्यादा एमिशन कर रहा है। उसने भी घरेलू एमिशन ग्रोथ कम की है। यह बात अलग है कि वह विकासशील देशों में नए कोल-प्लांट्स को फंडिंग कर रहा है। अमेरिका यदि बाहर हुआ तो चीन का जियो पॉलिटिकल प्रभाव बढ़ जाएगा। क्लाइमेट को लेकर बातचीत में भी। वह क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग का फायदा उठा सकता है।
  • अगर अमेरिका की राष्ट्रीय सरकार ने क्लाइमेट चेंज को रोकने के लिए प्रयास नहीं किए तो हो सकता है कि ग्रीन और क्लीन एनर्जी के बारे में सोचने वाले अमेरिकी स्टेट्स अपने स्तर पर दुनिया के सामने एमिशन कम करने का उदाहरण पेश करें।


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Donald Trump Vs Joe Biden; Know Why US Exit From Paris Agreement Will Impact On Climat Change Efforts | US Presidential Elections 2020


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इतिहास में 116 साल बाद पहली बार वोटिंग के दिन राष्ट्रपति तय नहीं होगा

इतिहास में 116 साल बाद पहली बार वोटिंग के दिन राष्ट्रपति तय नहीं होगा

अमेरिका में हर चार साल बाद हाेने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए मंगलवार काे मतदान हुआ। यह राष्ट्रपति के लिए 59वां चुनाव है। मतदान अमेरिकी समयानुसार मंगलवार सुबह 6 बजे (भारतीय समय मंगलवार शाम 4:30 बजे) शुरू हुआ। मतदान केंद्राें पर मतदाताओं की कतार देखी गई। भारतीय समयानुसार बुधवार दोपहर तक अलग-अलग राज्यों में लोग वोट डाले जा सकेंगे। इस बार मतदान के पहले डाक से 10 करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट डाला है।

टेक्सास जैसे कुछ राज्यों को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में बुधवार सुबह साढ़े 5 बजे से साढ़े सात बजे तक वोटिंग खत्म हो जाएगी। टेक्सॉस में 24 घंटे वोट पड़ेंगे। इसके तुरंत बाद गिनती शुरू हो जाएगी। यहां 29 इलेक्टोरल मत हैं। यानी बुधवार सुबह तक करीब 12 राज्य हैं, जिनके नतीजे आ जाएंगे। इनमें कुछ बैटलग्राउंड राज्य भी हैं, जैसे फ्लोरिडा, नार्थ कैरोलीना, ओहायो। बुधवार दोपहर तक आते-आते एरिजोना और आइयोवा का भी रिजल्ट आ सकता है।

इलेक्शन डे की रात में नए राष्ट्रपति का पता लग जाता रहा है

अमेरिका में 1904 से इलेक्शन डे की रात में नए राष्ट्रपति का पता लग जाता रहा है, लेकिन इस बार नए राष्ट्रपति की तस्वीर साफ होने में वक्त लग सकता है। इनके नतीजों से पता चल जाएगा कि राष्ट्रपति बुधवार को घोषित होगा या कुछ दिन, हफ्ते पूरी काउंटिंग होने तक इंतजार करना पड़ सकता है।
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाईडेन के बीच है। उपराष्ट्रपति पद के लिए बाइडेन की साथी उम्मीदवार भारतीय मूल की कमला हैरिस हैं, जबकि ट्रम्प के साथी उपराष्ट्रपति माइक पेंस हैं।

फ्लोरिडा के नतीजे से पूरे देश का मूड पता चलता है। यह राज्य कभी किसी एक पार्टी का नहीं रहा। 1964 से लेकर 2016 तक वहीं राष्ट्रपति बना है, जिसने फ्लोरिडा जीता है। सिर्फ 1992 का चुनाव अपवाद है। 2016 में ट्रम्प ने यह राज्य 1% मार्जिन से जीता था।

पहला वाेट बाइडेन काे मिला

परंपरा के अनुसार पहला वोट न्यू हैंपशायर के डिक्सविले नॉच इलाके में डाला गया, जहां पांच मतदाता हैं। इनमें से एक काे इस परंपरा को निभाते हुए इस बार 60 साल हो गए। डिक्सविले नॉच के पहले वाेटर लेस ओटन ने खुद को रिपब्लिकन बताया, लेकिन अपना वोट डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाईडन को दिया। एक वीडियो में ओटन कह रहे हैं, “मैं कई मुद्दों पर ट्रम्प से सहमत नहीं हूं।’ यहां सभी वाेट बाईडन के खाते में गए, जबकि मिल्सफील्ड के 16 में से 5 वोट ट्रम्प को मिले।

...तो ट्रम्प खुद काे विजेता घोषित कर सकते हैं

मीडिया रिपोर्ट में कयास लगाए जा रहे हैं कि बुधवार दोपहर तक तीन तारीख को पड़े वोटों के आधार पर अगर रुझान में ट्रम्प आगे नजर आते हैं और इलेक्टोरल वोट 270 पार दिखाई पड़ते हैं तो ट्रम्प आगे बढ़कर विजेता घोषित कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि ट्रम्प मेल इन वोटिंग को चुनावी फर्जीवाड़ा बता रहे हैं। ऐसी सूरत में मामला कोर्ट में भी जा सकता है। अगर मतगणना प्रक्रिया कानूनी दाव पेंच में फंस गई तो संभव है कि 14 दिसंबर तक 570 इलेक्टोरल कॉलेज का रिजल्ट न आ पाए। अमेरिका में सदन में इलेक्टोरल कॉलेज राष्ट्रपति चुनने के लिए वोट डालते (14 दिसंबर) हैं।



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भारतीय समयानुसार मंगलवार की शाम 4:30 बजे से ही अमेरिका में वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई।


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पहली बार ऑस्कर के लिए थिएटर में रिलीज की शर्त से छूट, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज फिल्में भी नामित हाे सकेंगी

पहली बार ऑस्कर के लिए थिएटर में रिलीज की शर्त से छूट, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज फिल्में भी नामित हाे सकेंगी

काेराेना काल के दाैरान जब देश-दुनिया में सबकुछ थमा रहा ताे तमाम मल्टीप्लेक्स और थिएटर भी बंद रहे। सिनेमाघराें में कई फिल्माें की रिलीज टाल दी गई, क्याेंकि दर्शक घराें के भीतर थे। ऐसे में ओटीटी (ओवर-द-टाॅप) प्लेटफाॅर्म गुलजार रहा। अब फिल्मी दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ऑस्कर अवाॅर्ड ने भी ओटीटी प्लेटफाॅर्म के लिए शर्तों में ढील दी है।

पहली बार ऑस्कर की आयाेजक संस्था एकेडमी ऑफ माेशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज ने नामांकन के लिए ऐसे स्ट्रीमिंग टाइटल्स काे भी सर्वश्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में शामिल करने की अनुमति दी है, जाे सिर्फ ओटीटी प्लेटफाॅर्म पर रिलीज हुए हाें। अब तक सर्वश्रेष्ठ श्रेणी में नामित फिल्म को नामांकन के लिए थिएटर में रिलीज हाेना जरूरी था।

अवॉर्ड सेरेमनी दो महीने के लिए टला

काेराेना काल के चलते अवाॅर्ड सेरेमनी काे पहले ही दाे महीने के लिए टाला जा चुका है। ऐसे में यह समाराेह अब अगले वर्ष 25 अप्रैल को हाेगा। इसमें जनवरी 2020 से फरवरी 2021 के बीच रिलीज फिल्माें काे शामिल किया जाएगा। इस फैसले से सबसे अधिक फायदा नेटफ्लिक्स काे मिलने की उम्मीद है। उसके करीब 22 टाइटल ऑस्कर की दाैड़ में हैं। हालांकि तीन फिल्माें काे इस बार ऑस्कर के लिए नामित हाेना निश्चित माना जा रहा है।

ये हैं : गैरी ओल्डमैन अभिनीत फिल्म ‘मैंक’, जाॅर्ज क्लूनी अभिनीत व निर्देशित ‘द मिडनाइट स्काई’ और एमी एडम्स और ग्लेन क्लाेज की फिल्म ‘हिलबिली एल्गी।’ मालूम हाे, ऑस्कर 2020 में नेटफ्लिक्स ने 24 नामांकन हासिल किए थे और 2 ऑस्कर अवाॅर्ड जीते थे।

कान्स 5 महीने देरी से हुआ, गोल्डन ग्लोब भी टला : काेराेना के चलते 12 से 23 मई तक चलने वाला 73वां कान्स फिल्म फेस्टिवल पांच महीने टालना पड़ा। यह हाल ही में 27 अक्टूबर काे छोटे रूप में तीन दिन के लिए आयाेजित हुआ। इसी तरह गाेल्डन ग्लाेब अवाॅर्ड भी टाल दिए गए हैं। हर साल के पहले रविवार काे हाेने वाला यह अवाॅर्ड समाराेह अगले वर्ष 28 फरवरी काे कैलिफाेर्निया के बेवरली हिल्स में हाेगा।

भारत से मराठी फिल्म ‘द डिसाइपल’ की संभावना
अमेरिकी मैग्जीन वैरायटी के मुताबिक, भारत से अंतरराष्ट्रीय फिल्म श्रेणी में मराठी फिल्म ‘द डिसाइपल’ ऑस्कर में नामित हाेने की संभावना है। मीरा नायर की फिल्म ‘मानसून वेडिंग’ के बाद यह वेनिस फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित दूसरी फिल्म है। मालूम हो, भारत में लाॅकडाउन के पहले तक 29 फिल्में रिलीज हुई थीं। वहीं करीब 41 फिल्में कतार में हैं। इनमें से कई की रिलीज 2021 के लिए टाल दी गई हैं।



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काेराेना काल के चलते अवाॅर्ड सेरेमनी काे पहले ही दाे महीने के लिए टाला जा चुका है।


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Monday, November 2, 2020

अमेरिकन्स को हिंसा का डर, रिकॉर्ड तोड़ 1 करोड़ 70 लाख बंदूकें खरीदीं, खरीददारों में अश्वेत और महिलाएं सबसे ज्यादा

अमेरिकन्स को हिंसा का डर, रिकॉर्ड तोड़ 1 करोड़ 70 लाख बंदूकें खरीदीं, खरीददारों में अश्वेत और महिलाएं सबसे ज्यादा

पूरी तरह दो विरोधी खेमों में बंट चुके अमेरिकी लोग राष्ट्रपति चुनाव से पहले बंदूकों की खरीदारी पर उतर आए हैं। मंगलवार को मतदान और उसके बाद हिंसा की आशंका से घिरे अमेरिकन इस साल अब तक 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा बंदूकें खरीद चुके हैं। करीब 60 लाख लोग ऐसे है जिन्होंने पहली बार किसी तरह का हथियार खरीदा है। इनमें भी अश्वेत सबसे ज्यादा हैं। करीब 40% महिलाएं हैं। अकेले सिंतबर में 18 लाख बंदूकें खरीदी गईं। यह पिछले साल से 66% ज्यादा है।
अमेरिका में छोटे हथियारों की खरीदारी का विश्लेषण करने वाली रिसर्च कन्सल्टेंसी स्मॉल आम्र्स एनालिटिक्स एंड फोरकास्टिंग (एसएएएफ) के चीफ इकोनोमिस्ट जर्गन ब्रेउर बताते हैं कि अगस्त तक पिछले साल के बराबर बंदूके बिक चुकी थीं। वहीं सितंबर में अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री का रिकॉर्ड को छू लिया था। इससे पहले 2016 में सबसे ज्यादा 1.66 करोड़ बंदूकें बिकी थीं।


सबसे ज्यादा हैंडगन की बिक्री में बढ़ोतरी
पूरे अमेरिका में सितंबर 2019 के मुकाबले इस वर्ष सितंबर में हैंडगन की बिक्री में 81% और सिंगल लॉन्ग गन की बिक्री में 51% बढ़ोतरी हुई। बाकी तरह की बंदूकों की 50% ज्यादा खरीदारी हुई। जानकारों का कहना है कि आत्मरक्षा के नाम पर बंदूकें खरीदीं हैं, इसलिए ही कपड़ों में रखी जा सकने वाली हैंडगन की सबसे ज्यादा बिक्री हो रही है।

बंदूकों की ज्यादा बिक्री की दो प्रमुख कारण


1- चुनाव के बाद हिंसा का डर
चुनावी माहौल में दो खेमों में बंट चुके अमेरिकी चुनाव के बाद नतीजों को लेकर हिंसा हो सकती है। ऐसे में आत्मरक्षा के लिए छोटे हथियारों की जरूरत पड़ सकती है।

2-गन कल्चर पर रोक की संभावना
डेमोक्रेट कैंडिडेट जो बाइडेन अमेरिका में गन कल्चर को सख्त कानून के जरिए रोकने के पक्षधर हैं। सर्वे में बाइडेन ट्रंप से आगे हैं। माना जा रहा है बाइडेन जीते तो बंदूकों पर नियंत्रण लागू हो सकता है। ऐसे में लोग पहले ही हथियार खरीदकर रख लेना चाहते हैं।

वालमार्ट ने स्टोर्स से बंदूक और कारतूस हटाए
वालमार्ट ने इसी सप्ताह अपने सभी स्टोर्स में डिस्प्ले से बंदूकों और कारतूसों को हटा दिया। स्टोर मैनेजरों ने लूटपाट के हालात में स्टोर्स से बंदूकों को लूटे जाने संभावना को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया है। वालमार्ट ने पिछले साल सेना जैसी राइफलों के कारतूस न बेचने का फैसला किया था।


ट्रंप फिर बोले- कई सप्ताह नहीं आएगा रिजल्ट, अव्यवस्था फैलेगी
पेनसिल्वानिया के न्यूटाउन और रीडिंग में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को कहा कि 3 नवंबर को मतदान के बाद भी चुनाव का फैसला नहीं हो पाएगा। मतपत्रों की गिनती नहीं हो सकेगी। लोगों को कई सप्ताह तक परिणाम का इंतजार करना पड़ेगा। समय पर नतीजा नहीं आएगा क्योंकि पेनसिल्वानिया बहुत बड़ा राज्य है। 3 नवंबर चला जाएगा और हमें जानकारी नहीं मिलेगी। हम अपने देश में अव्यवस्था फैलते हुए देखेंगे। ट्रंप एक बार पहले भी ऐसा बयान दे चुके हैं।

जकरबर्ग को भी अराजकता का अंदेशा
फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग भी राष्ट्रपति चुनाव के बाद अराजकता की आशंका जाहिर कर चुके हैं। उन्होंंने कहा, मुझे चिंता है हमारा देश इतना ज्यादा बंट गया है। चुनाव के नतीजों को आने में कई दिन या सप्ताह लग सकते हैं, ऐसे में पूरे देश में अराजकता फैलने का खतरा है।



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Americans fear violence, broke record, bought 1.7 million guns, blacks and women highest among buyers


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Thursday, October 29, 2020

पाकिस्तान की संसद में लगे मोदी-मोदी के नारे? न्यूज चैनल का दावा पड़ताल में झूठ निकला

पाकिस्तान की संसद में लगे मोदी-मोदी के नारे? न्यूज चैनल का दावा पड़ताल में झूठ निकला

क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर न्यूज चैनल ‘इंडिया टीवी’ का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान की संसद में मोदी-मोदी के नारे लगे।

न्यूज एंकर दीपक चौरसिया ने भी वीडियो इसी दावे के साथ शेयर किया।

टाइम्स नाऊ वेबसाइट की खबर में भी पाकिस्तान की संसद में मोदी के समर्थन में नारे लगने का दावा किया गया है।

और सच क्या है?

  • इंडिया टीवी न्यूज चैनल के वायरल वीडियो का बैकग्राउंड साउंड क्लियर न होने के चलते हमने अन्य सोर्सेस पर यही वीडियो तलाशना शुरू किया।
  • Duniya News यूट्यूब चैनल पर भी हमें यही वीडियो मिला। ध्यान से सुनने पर पता चलता है कि बैकग्राउंड से आ रहे जिस शोर को ‘मोदी-मोदी’ बताया जा रहा है। असल में वहां से ‘वोटिंग-वोटिंग’ चिल्लाने की आवाज आ रही है।

  • वीडियो के 6 सेकंड बीतने पर वोटिंग-वोटिंग की आवाज आती है। इसके जवाब में संसद के सभापति ये भी कहते दिख रहे हैं कि - ‘वोटिंग और सब कुछ होगा, सब्र रखें आप’
  • साफ है कि वायरल वीडियो में पाकिस्तान की संसद से मोदी-मोदी नहीं, वोटिंग-वोटिंग की आवाज आ रही है। सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा फेक है।


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Fact Check: Modi-Modi slogans in Pakistan's Parliament? The claim found fake in the fact check investigation


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ट्रम्प हर हाल में जीतना चाहते हैं, उनकी बातों से उनके इरादों की झलक साफ मिल जाती है

ट्रम्प हर हाल में जीतना चाहते हैं, उनकी बातों से उनके इरादों की झलक साफ मिल जाती है

अब चुनाव में काफी कम वक्त बचा है। आने वाले दिन और रातें उम्मीदों के साथ तनाव भरी भी होंगी। गुस्सा के साथ कई बार फ्रस्टेशन भी होगी। ओहियो के प्रोफेसर एडवर्ड फोले कहते हैं- जरा सोचिए। अगर ट्रम्प पॉपुलर वोट हासिल कर लें और शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण से इनकार कर दें तो क्या होगा? और ये कल्पना नहीं है। वे कई बार सार्वजनिक तौर पर इसकी धमकी भी दे चुके हैं। इस चुनाव में कुछ गंभीर विवादित चीजें हो रही हैं या होने की आशंका है। एक आशंका यह भी है कि चुनाव का फैसला कोर्ट में तय हो।

पेन्सिलवेनिया पर नजर
इस बार ज्यादातर नजरें पेन्सिलवेनिया पर हैं। कहा जा रहा है कि जो यहां जीत दर्ज करेगा वो इलेक्टोरल कॉलेज में भी बहुमत हासिल कर लेगा। इस राज्य में ट्रम्प 20 हजार वोट्स से आगे हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने एक ट्वीट में कहा था- दौड़ खत्म हो चुकी है। चार साल और अमेरिका को महान बनाने के लिए। हालांकि, जो नए आंकड़े सामने आ रहे हैं, उनमें ये साफ हो जाता है कि ट्रम्प की बढ़त कम हो रही है। ट्रम्प ने कहा था- मैं फिर जीत रहा हूं। मैं मशीनी पॉलिटिशियन नहीं हूं।

हम फिर जीतेंगे
फोले आगे कहते हैं- ट्रम्प यह दावा करते रहे हैं कि वे फिर जीत हासिल करेंगे। अगर इसी हिसाब से घटनाएं होती रहीं। पेन्सिलवेनिया में स्टेट सीनेट और हाउस में रिपब्लिकन्स का बहुमत है, तो फिर वही हो सकता है जो फोले या दूसरे लीगल एक्सपर्ट्स सोच रहे हैं। द अटलांटिक में एक लंबा आर्टिकल लिखने वाले बार्टन गेलमैन ने कहा- मेल बैलट के बारे में ट्रम्प जो कह रहे हैं उससे उनके इरादों की झलक मिल जाती है। गेलमैन को पेन्सिलवेनिया रिपब्लिकन पार्टी के चेयरमैन लॉरेन्स टेब्स कहते हैं- इस बारे में विचार हुआ है कि सभी या कुछ मेल इन बैलट रद्द किए जाएं और राज्य के इलेक्टर्स से 20 इलेक्टोरल वोट डालने को कहा जाए।

हालात बहुत अच्छे नहीं
एक और इलेक्शन एक्सपर्ट लैरी डायमंड चुनावी गणित और ट्रम्प की तरफ से जीत के दावों को सही नहीं मानते। वे इसे खतरनाक चुनावी जोड़तोड़ के तौर पर देखते हैं। वे कहते हैं- ट्रम्प बढ़त ले सकते हैं अगर सीधे वोट गिने जाएं और आधी रात को अचानक काउंटिंग बंद कर दी जाए। वे जीत भी सकते हैं। हो सकता है ब्लू स्टेट यानी डेमोक्रेट प्रभाव वाले राज्यों से आने वाले मेल इन बैलट गिने ही न जाएं। ट्रम्प इस पर भी पेन्सिलवेनिया और फ्लोरिडा में इलेक्टोरल वोटर्स का सवाल खड़ा कर सकते हैं।

तकनीकि पेंच
20 जनवरी को वाइस प्रेसिडेंट सीनेट प्रेसिडेंट के तौर पर यह कह सकते हैं कि ट्रम्प फिर चुनाव जीत गए हैं। और नैंसी पेलोसी भी कह सकती हैं कि डेडलॉक की वजह से कोई प्रेसिडेंट इलेक्ट नहीं है। वे कार्यवाहक राष्ट्रपति की बात कर सकती हैं और वो ट्रम्प ही होंगे। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के रिचर्ड हैसन सबसे खराब आशंका पर कहते हैं- अगर मुकाबला बेहद कांटे यानी लगभग बराबरी का हुआ और पेन्सिलवेनिया पर अटका तो फिर अमेरिका का भगवान ही मालिक होगा। क्योंकि, वोट काउंट के मामले में पेन्सिलवेनिया आखिरी राज्य होगा और यहां 20 इलेक्टोरल कॉलेज वोट हैं। यह हार और जीत तय करेंगे। मैं इसी संभावना के आधार पर अनुमान लगा रहा हूं।

2016 का उदाहरण
ट्रम्प पिछला चुनाव जीते और राष्ट्रपति बने। इसके बावजूद वे हजारों बार यह कह चुके हैं कि पिछले चुनाव में धांधली हुई थी। उनके मुताबिक, लाखों गैर अमेरिकियों ने भी वोट दिए थे। इसकी वजह से उन्हें पॉपुलर वोट कम मिले थे। वो विदेशी सरकारों की तरफ भी उंगली उठाते हैं। वे ये बातें उस वक्त कर रहे हैं जबकि ये साफ नजर आ रहा है कि पॉपुलर वोट्स के मामले में बाइडेन की बढ़त है। पोस्टल बैलट को वे फालतू या भार वाले वोट बताते हैं।



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Donald Trump Joe Biden Scenarios; Here's New York Times (NYT) Latest US Election Opinion


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Saturday, October 24, 2020

प्रेसिडेंशियल डिबेट में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गंदा कहा? पड़ताल में दावा आधा झूठ निकला

प्रेसिडेंशियल डिबेट में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गंदा कहा? पड़ताल में दावा आधा झूठ निकला

क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेसिडेंशियल डिबेट में भारत को ‘गंदा’ कहा।

23 अक्टूबर को रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट जो बाइडेन के बीच अंतिम प्रेसिडेंशियल डिबेट हुई थी। इसी डिबेट का 3 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें ट्रंप कहते दिख रहे हैं - India is Filthy।

कांग्रेस के नेशनल कॉर्डिनेटर गौरव पांधी ने ट्विटर पर वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि ट्रंप ने भारत को गंदा कहा।

और सच क्या है ?

  • वीडियो देखने से स्पष्ट हो रहा है कि ट्रंप की स्पीच में से एक वाक्य से बीच का हिस्सा एडिट कर वायरल किया गया है। अलग-अलग की वर्ड के जरिए हमने इंटरनेट पर इसी प्रेसिडेंशियल डिबेट से जुड़े वीडियो सर्च करने शुरू किए। न्यूज एजेंसी ANI के यूट्यूब चैनल पर हमें 1 मिनट 42 सेकंड का वीडियो मिला। जिसमें ट्रंप द्वारा भारत के बारे में कही गई पूरी बात सुनी जा सकती है।

  • डोनाल्ड ट्रंप वीडियो में क्लाइमेट चेंज की दिशा में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं। वे कहते हैं - कार्बन एमिशन के मामले में हमारा प्रदर्शन पिछले 35 सालों की तुलना में सबसे ज्यादा बेहतर रहा। हम यही कर सकते हैं। इसके बाद ट्रंप वह वाक्य बोलते हैं, जिसके आधार पर ये दावा किया जा रहा है कि उन्होंने भारत को गंदा कहा।
  • ट्रंप ने कहा - Look at China, how filthy it is. look at Russia, look at, India, it’s so filthy, the air is filthy,”। इसका हिंदी अनुवाद होगा- चीन को देखो, कितनी गंदगी है। रूस को देखो, भारत को देखो, बहुत गंदगी है, वहां की हवा गंदी है, "। स्पष्ट हो रहा है कि ट्रंप ने भारत को गंदा नहीं कहा, बल्कि भारत की एयर क्वालिटी को गंदा कहा है।
  • Look at India, its filthy स्पीच के ये 5 शब्द बोलते हुए ट्रंप का 3 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया और दावा किया गया कि ट्रंप ने भारत को गंदा कहा है। जबकि Look at India, its filthy के बाद ट्रंप ने आगे the air is filthy भी कहा। यानी वे भारत की एयर क्वालिटी को खराब बता रहे थे, न कि देश को।
  • अब सवाल ये है कि अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप भारत की एयर क्वालिटी का जिक्र कर क्यों रहे थे? दरअसल, डिबेट के दौरान उनसे पेरिस समझौते से बाहर होने की वजह पूछी गई। इसके जवाब में उन्होंने पहले कार्बन एमिशन के मामले में अमेरिका कि उपलब्धियां गिनाईं। फिर चीन, रूस और भारत की एयर क्वालिटी की स्थिति को गंदा बताया ( जिससे साबित हो सके कि अमेरिका अन्य देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है)। फिर बोले कि "पेरिस समझौते से हम बाहर हो गए क्योंकि हमें खरबों डॉलर खर्च करने पड़ रहे थे, और हमारे साथ अनुचित व्यवहार किया जाता था। हमारा कारोबार छीना जाता। मैं ये सैक्रिफाइस नहीं कर सकता था।"


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Fact check: Donald Trump called India dirty in presidential debate? Claim found half-truth in investigation


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Wednesday, October 21, 2020

सर्च में Google की दादागिरी के खिलाफ अमेरिका में केस; जानिए भारत में क्या असर पड़ेगा?

सर्च में Google की दादागिरी के खिलाफ अमेरिका में केस; जानिए भारत में क्या असर पड़ेगा?

अमेरिका में जस्टिस डिपार्टमेंट और 11 राज्यों ने सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सर्च इंजिन Google पर मुकदमा दर्ज किया है। उस पर आरोप लगा है कि प्रतिस्पर्धा खत्म करने और अपना एकाधिकार जमाने के लिए उसने अवैध तरीके से ऐपल और स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से एक्सक्लूसिव डील्स की।

दो दशक में यह किसी टेक्नोलॉजी फर्म के खिलाफ सबसे बड़ा मुकदमा है। इससे पहले 1998 में इसी तरह का मुकदमा माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ भी दर्ज हुआ था। वैसे, Google पर यह आरोप पहले भी लगते रहे हैं। अब खबरें यह भी आ रही हैं कि ऑस्ट्रेलिया और जापान भी यूरोप और अमेरिका के साथ बड़ी टेक कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने की तैयारी में है।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन मुकदमों में Google पर क्या आरोप लगे हैं? इसका क्या असर पड़ सकता है? आइए इन प्रश्नों के जवाब तलाशते हैं...

सबसे पहले, मुकदमा क्या है और किसने किया है?

  • अमेरिका में जस्टिस डिपार्टमेंट और 11 अलग-अलग राज्यों ने Google के खिलाफ यह एंटीट्रस्ट मुकदमा किया है। 54 पेज की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि Google ने सर्च इंजिन बिजनेस में 90% से ज्यादा मार्केट हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एक्सक्लूसिव डील्स की। इससे इन डिवाइस पर यूजर्स के लिए Google डिफॉल्ट सर्च इंजिन बन गया।
  • Google ने मोबाइल बनाने वाली कंपनियों, कैरियर्स और ब्राउजर्स को अपनी विज्ञापनों से होने वाली कमाई से अरबों डॉलर का पेमेंट किया ताकि Google उनके डिवाइस पर प्री-सेट सर्च इंजिन बन सके। इससे Google ने लाखों डिवाइस पर टॉप पोजिशन हासिल की और अन्य सर्च इंजिन के लिए खुद को स्थापित करने से रोक दिया।
  • आरोप यह भी है कि ऐपल और Google ने एक-दूसरे का सहारा लिया और अपने प्रतिस्पर्धियों को मुकाबले से बाहर कर दिया। अमेरिका में Google के सर्च ट्रैफिक में करीब आधा ऐपल के आईफोन्स से आया। वहीं, ऐपल के प्रॉफिट का पांचवां हिस्सा Google से आया।
  • Google ने इनोवेशन को रोक दिया। यूजर्स के लिए चॉइस खत्म की और प्राइवेसी डेटा जैसी सर्विस क्वालिटी को प्रभावित किया। Google ने अपनी पोजिशन का लाभ उठाया और अन्य कंपनियों या स्टार्टअप्स को उभरने या इनोवेशन करने का मौका ही नहीं छोड़ा। जस्टिस डिपार्टमेंट ने करीब एक साल की जांच के बाद यह मुकदमा दर्ज किया है।

अमेरिकी सरकार के आरोपों पर Google का क्या जवाब है?

##
  • Google के चीफ लीगल ऑफिसर केंट वॉकर का कहना है कि यह मुकदमा बेबुनियाद है। लोग Google का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उन्होंने ऐसा करने का फैसला किया है। Google ने किसी के साथ अपनी सर्विसेस का इस्तेमाल करने के लिए जबरदस्ती नहीं की है। यदि उन्हें चाहिए तो ऑप्शन मौजूद है।
  • उनका कहना है कि एंटी ट्रस्ट कानून के बहाने ऐसी कंपनियों के पक्ष लिया जा रहा है, जो मार्केट में कॉम्पीटिशन नहीं कर पा रही है। Google ऐपल और अन्य स्मार्टफोन कंपनियों को पेमेंट करता है ताकि उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए शेल्फ स्पेस मिल सके। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
  • वॉकर ने यह भी कहा कि अमेरिकी एंटी ट्रस्ट लॉ का डिजाइन ऐसा नहीं है कि किसी कमजोर प्रतिस्पर्धी को मजबूती प्रदान करें। यहां सबके लिए बराबर मौके हैं। यह मुकदमा कोर्ट में ज्यादा टिकने वाला नहीं है। Google जो भी सर्विस यूजर्स को देता है, वह मुफ्त है। इससे किसी और को नुकसान होने की आशंका जताना गलत है।

इस मुकदमे के पीछे की राजनीति क्या है?

  • इस मुकदमे को दर्ज करने की टाइमिंग से लेकर इसमें शामिल राज्यों तक कई प्रश्न खड़े हैं। चुनावों से ठीक दो हफ्ते पहले यह मुकदमा दाखिल किया गया है। आम तौर पर किसी भी कदम का चुनावों पर असर पड़ने का डर होता है, इस वजह से कोई बड़ा कदम सरकार नहीं उठाती।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन 11 राज्यों ने जस्टिस डिपार्टमेंट का साथ दिया है, वह सभी रिपब्लिकन अटॉर्नी जनरल हैं। हकीकत तो यह है कि अमेरिका के सभी 50 राज्यों ने Google के खिलाफ एक साल पहले जांच शुरू की थी।

केस का नतीजा क्या आ सकता है?

  • इस तरह के केस में सुनवाई लंबी चलती है और फैसला आने में दो-तीन साल लग जाते हैं। माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ भी 1998 में इसी तरह का मुकदमा दर्ज हुआ था, जो सेटलमेंट पर खत्म हुआ था।
  • Google पर इससे पहले यूरोप में भी इसी तरह के आरोप लगे थे। यदि कंपनी की हार होती है तो उसे कंपनी के स्ट्रक्चर में कुछ बदलाव करने होंगे। वहीं, यदि वह जीत गई तो यह बड़ी टेक कंपनियों को मजबूती देगा। इससे उन पर काबू पाने की सरकारों की कोशिशों को झटका लगेगा।
  • यह तो तय है कि मुकदमे का नतीजा आने में समय लगेगा। तीन नवंबर को अमेरिका में चुनाव है और नई सरकार को ही यह केस लड़ना होगा। डेमोक्रेट्स लंबे समय से दलील दे रहे हैं कि नए डिजिटल युग में एंटी ट्रस्ट कानून के प्रावधानों को बदलने की जरूरत है।

क्या भारत में भी Google के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है?

  • भारत में कॉम्पीटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) का काम बाजार में किसी कंपनी के एकाधिकार को खत्म करना है। वह हेल्दी कम्पीटिशन को प्रमोट करता है। अमेरिका में जो मुकदमा दाखिल हुआ है, उसी तरह की शिकायत की जांच सीसीआई पहले ही कर रहा है।
  • पिछले महीने Google बनाम पेटीएम के मुद्दे पर भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब Google ने अपनी पोजिशन का फायदा उठाते हुए पेटीएम के ऐप को प्ले स्टोर से हटा दिया था। तब भी पेटीएम ने यही आरोप लगाए थे कि Google अपने और दूसरे ऐप्स के बीच भेदभाव करता है।
  • न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ दिन पहले खबर दी थी कि कॉम्पीटिशन कमीशन ऑफ इंडिया ने स्मार्ट टीवी मार्केट में Google की दादागिरी की जांच करने वाली है। मामला स्मार्ट टीवी में इंस्टॉल होने वाले एंड्रॉयड ओएस के सप्लाई से जुड़ा है, जो भारत में बिक रहे ज्यादातर स्मार्ट टीवी में पहले से इंस्टॉल मिलता है।

भारत के कानून एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?

  • साइबर कानून विशेषज्ञ और सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि यदि अमेरिका में Google के कॉर्पोरेट वर्चस्व को खत्म करने की कार्रवाई हुई तो इसका असर भारत में भी पड़ेगा। अमेरिका के मुकाबले भारत में Google जैसी कंपनियों ने अपना अराजक वर्चस्व स्थापित किया है।
  • सीनियर एडवोकेट के मुताबिक, भारत में नए कानून बनाने और पुराने कानूनों में बदलाव जरूरी है। भारत ने हाल में चीन और पाकिस्तान से एफडीआई को लेकर कई प्रतिबंधात्मक नियम बनाए हैं। इसी तर्ज पर टेक कंपनियों के लिए भी कंपनी कानून, आईटी कानून और आयकर कानून के नियमों को बदलना जरूरी है।
  • गुप्ता कहते हैं कि इन कंपनियों की ओर से बड़े पैमाने पर डेटा की खरीद-फरोख्त होती है। इस पर अंकुश लगाना जरूरी है, ताकि सरकारी राजस्व बढ़ाया जा सके। भारत में इन कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए कम्पीटिशन कमिशन की व्यवस्था को दुरूस्त करने की जरूरत है।


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Google Search Antitrust Case (Alphabet) Update; Know-How It Will Affect You In Simple Words


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Tuesday, October 13, 2020

इजराइल में लॉकडाउन 18 अक्टूबर तक बढ़ाया गया, ब्राजील में वैक्सीन का ट्रायल टला; दुनिया में 3.83 करोड़ केस

इजराइल में लॉकडाउन 18 अक्टूबर तक बढ़ाया गया, ब्राजील में वैक्सीन का ट्रायल टला; दुनिया में 3.83 करोड़ केस

दुनिया में संक्रमितों का आंकड़ा 3.83 करोड़ से ज्यादा हो गया है। ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 2 करोड़ 88 लाख 40 हजार 778 से ज्यादा हो चुकी है। मरने वालों का आंकड़ा 10.90 लाख के पार हो चुका है। ये आंकड़े https://ift.tt/2VnYLis के मुताबिक हैं। देशभर में हो रहे विरोध प्रर्दशनों के बावजूद इजराइल ने लॉकडाउन 18 अक्टूबर तक बढ़ाने का फैसला कर लिया है। इजराइल सरकार ने एक बयान में कहा- देश में संक्रमण के हालात सुधारने के लिए यह कदम उठाना जरूरी है।

इजराइल : लॉकडाउन नहीं हटेगा
बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने साफ कर दिया है कि इजराइल में लॉकडाउन फिलहाल नहीं हटाया जाएगा। सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि फिलहाल, लॉकडाउन 18 अक्टूबर तक बढ़ाया जा रहा है। अगर जरूरत हुई तो इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कुछ दिन पहले भी कहा था कि हालात ऐसे नहीं हैं कि लॉकडाउन के नियमों में ढील दी जा सके। पिछले शुक्रवार को एक समीक्षा बैठक बनाई गई थी। हालांकि, जरूरी सुविधाओं में कुछ राहत भी दी गई है। इस दौरान ग्रॉसरी स्टोर्स और मेडिकल स्टोर्स खुले रहेंगे। कोई भी व्यक्ति घर से एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय नहीं कर सकेगा। पहचान पत्र साथ में रखने होंगे।

ब्राजील : वैक्सीन ट्रायल टला
अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने ब्राजील में भी अपना वैक्सीन ट्रायल फिलहाल रोक दिया है। ब्राजीलियन हेल्थ एजेंसी ने मंगलवार रात जारी एक बयान में कहा- इस बारे में ज्यादा जानकारी फिलहाल नहीं दी जा सकती। लेकिन, फिलहाल वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल रोके जा रहे हैं। कुछ खबरों में कहा गया है कि अमेरिका में एक वॉलेंटियर के वैक्सीन ट्रायल के बाद गंभीर रूप से बीमार होने के बाद यह ट्रायल रोके गए हैं। ब्राजील में दो कंपनियों के वैक्सीन ट्रायल किए जा रहे हैं। जॉनसन एंड जॉनसन उनमें से एक है।

ब्राजील में जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने अपना वैक्सीन ट्रायल फिलहाल रोक दिया है। दूसरी तरफ, डब्ल्यूएचओ की एक टीम भी ब्राजील पहुंच रही है। ये टीम खास तौर पर स्लम एरिया में संक्रमण रोकने की रणनीति बनाने में ब्राजील की हेल्थ मिनिस्ट्री की मदद करेगी। (फाइल)

ब्रिटेन : कुछ हिस्सों में लॉकडाउन होगा
बोरिस जॉनसन सरकार ने देश में संक्रमण की दूसरी लहर से निपटने के लिए नई योजना तैयार की है। इसके लिए तीन लेयर वाला एक प्लान तैयार किया गया है। इसे मीडियम, हाई और वेरी हाई कैटेगरी में बांटा गया है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि वो सख्त या कम्प्लीट लॉकडाउन से बचना चाहती है। लिहाजा, संक्रमण को काबू में करने के लिए नया प्लान बनाया गया है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पहली बार विपक्षी सांसदों को भी इस प्लान की जानकारी दी है। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि सरकार कोरोना के बहाने जनता के अधिकारों का हनन कर रही है।



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तेल अवीव में एक सड़क से गुजरती महिला। इजराइल सरकार ने देश में 18 अक्टूबर तक लॉकडाउन बढ़ा दिया है। सरकार ने कहा है कि विरोध प्रदर्शनों की वजह से लॉकडाउन खत्म नहीं किया जा सकता। (फाइल)


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जिन हालात से डरते थे अमेरिका में संविधान बनाने वाले, ट्रम्प राज में वही स्थिति दिखाई दे रही

जिन हालात से डरते थे अमेरिका में संविधान बनाने वाले, ट्रम्प राज में वही स्थिति दिखाई दे रही

पहली बार अमेरिकी चुनाव में ‘कमजोर लोकतंत्र’ मुद्दा बन गया है। वजह यह है कि राष्ट्रपति ट्रम्प वोटों में धांधली होने की बात करके लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचल रहे हैं। वे कोरोना के दौर में संसद से पारित ओबामा केयर को एग्जिक्यूटिव ऑर्डर से बदलना चाहते हैं।

निगेटिव रिपोर्ट आए बिना ट्रम्प मीटिंग कर रहे हैं। राष्ट्रपति उम्मीदवार ट्रम्प 150 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी की जांच का सामना कर रहे हैं। इन गैरजिम्मेदाराना रवैये की वजह से ट्रम्प का विरोध उनकी पार्टी में शुरू हो गया। पार्टी के लोगों का कहना है कि संविधान निर्माताओं ने ऐसे कमजोर लोकतंत्र की कल्पना कभी नहीं की थी।

2 लक्ष्यों, दो शंकाओं को ध्यान में रख बना संविधान

पहला लक्ष्यः ऐसा संघीय ढांचा बनाना जो अमेरिकी सीमाओं की रक्षा कर सके। सभी राज्य समान अवसर के साथ प्रगति करें। इसको सुनिश्चित करने के लिए एक करेंसी (मुद्रा) को लागू करने का फैसला लिया।

दूसरा लक्ष्यः राज्यों को ऑटोनॉमी मिले। ताकि लोग अपनी संस्कृति को जी सकें। इसलिए राज्यों को सिविल और क्रिमिनल कानून बनाने की आजादी मिली। इस तरह संघीय ढांचे में राज्य सरकारें काफी शक्तिशाली हैं।

पहला डरः यूरोपीय देशों की तरह राजाओं की तानाशाही अमेरिका में न आ जाए। सरकार व्यक्तिगत हित के लिए न बने। व्यक्तिगत लाभ के लिए जनता का शोषण न किया जाए।

दूसरा डरः लोकतंत्र भीड़ तंत्र में न बदल जाए। उनका मानना था कि अधिकतर लोग घर, परिवार और रोजगार के आगे नहीं सोचते। ऐसे में इन्हें भ्रमित कर कोई भी सरकार बना सकता है। इसलिए वे तानाशाही और संपूर्ण डेमोक्रेसी से डरे हुए थे।

इन स्थितियों से बचाने के लिए ‘सेपरेशन ऑफ पावर्स व चेक्स एंड बैलेंस’ की व्यवस्था की थी

1787 में संविधान निर्माताओं ने भीड़ तंत्र और तानाशाही जैसी स्थिति से बचने के लिए संविधान में सेपरेशन ऑफ पावर (ताकत का अलगाववाद) और चेक्स एंड बैलेंस (नियंत्रण और संतुलन) को जगह दी। सरकारी शक्ति विधायिका, प्रेसीडेंसी और न्याय तंत्र में बांट दी गई। इसलिए राष्ट्रपति सीधे जनता द्वारा चुने जाने की बजाए जनता के नुमाइंदे इलेक्टोरेट कॉलेज से चुने जाने लगे।

राष्ट्रपति सीनेट की मंजूरी के बिना कुछ नहीं कर सकते

राष्ट्रपति अमेरिका का कमांडर इन चीफ होता है। बिना सीनेट की मंजूरी के न तो आक्रमण कर सकता है और न ही किसी देश से संधि। कांग्रेस का बनाया कानून सुप्रीम कोर्ट को न्याय संगत नहीं लगता है तो वो उसे खारिज कर सकती है। यह नियंत्रण और शक्ति संतुलन की व्यवस्था है। 1791 में बिल ऑफ राइट्स के जरिए नागरिकों के अधिकार सुरक्षित किए गए। संविधान में जिन शक्तियों का उल्लेख नहीं है, वो राज्य सरकारों या नागरिकों को दी गई हैं।



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राष्ट्रपति उम्मीदवार ट्रम्प 150 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी की जांच का सामना कर रहे हैं। (फाइल फोटो)


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Monday, October 12, 2020

जॉनसन एंड जॉनसन ने वैक्सीन ट्रायल रोका, हेल्थ वर्कर के बीमार होने के बाद फैसला; दुनिया में 3.80 करोड़ केस

जॉनसन एंड जॉनसन ने वैक्सीन ट्रायल रोका, हेल्थ वर्कर के बीमार होने के बाद फैसला; दुनिया में 3.80 करोड़ केस

दुनिया में संक्रमितों का आंकड़ा 3.80 करोड़ से ज्यादा हो गया है। ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 2 करोड़ 85 लाख 92 हजार 312 से ज्यादा हो चुकी है। मरने वालों का आंकड़ा 10.85 लाख के पार हो चुका है। ये आंकड़े https://ift.tt/2VnYLis के मुताबिक हैं। अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने कोरोना वैक्सीन का ट्रायल फिलहाल रोक दिया है। कंपनी ने यह फैसला अपने एक हेल्थ वर्कर के बीमार होने के बाद किया। इसके पहले ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका ने भी पिछले महीने इन्हीं हालात में ट्रायल रोक दिया था। हालांकि, स्थिति की समीक्षा के बाद इन्हें फिर शुरू कर दिया गया है।

जॉनसन एंड जॉनसन के हवाले से कहा गया है कि ट्रायल में हिस्सा ले रहे एक व्यक्ति में बीमारी के कुछ लक्षण देखे गए हैं। कंपनी ने कहा- फिलहाल हम सभी तरह के ट्रायल रोक रहे हैं। इसमें फेस 3 ट्रायल भी शामिल हैं। ट्रायल में हिस्सा ले रहे एक कैंडिडेट में बीमारी के लक्षण पाए गए हैं। हम इसकी जांच कर रहे हैं।

फ्रांस : लॉकडाउन की तैयारी
फ्रांस ने लॉकडाउन की नए सिरे से तैयारी करना शुरू कर दिया है। तीन हफ्ते में यहां तीन लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि बिना सख्ती किए संक्रमण को रोकना बेहद मुश्किल है। हेल्थ मिनिस्ट्री ने कहा कि सभी तरह के होटल, रेस्टोरेंट्स और बार अब बंद किए जाएंगे। इस मामले में किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी। सरकार डब्ल्यूएचओ के भी संपर्क में है ताकि एक्सपर्ट्स की सलाह ली जा सकती।

फ्रांस सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में जल्द ही नए सिरे से लॉकडाउन लगाया जाएगा। सरकार के मुताबिक, इस दौरान सभी तरह के होटल, रेस्टोरेंट्स और बार बंद रखे जाएंगे। फ्रांस में जून से लेकर अगस्त तक लॉकडाउन रहा था। (फाइल)

इटली : फिर सख्ती होगी
इटली सरकार ने भी साफ कर दिया है कि बहुत जल्द प्राइवेट पार्टीज में आने वाले लोगों को लेकर नए प्रतिबंध लगाए जाएंगे। पार्टी में आने वाले हर शख्स का रिकॉर्ड रखना होगा। शादियों और अंतिम संस्कार के लिए भी नए प्रतिबंधों की तैयारी कर ली गई है। इटली की हेल्थ मिनिस्ट्री ने कहा- हमने बहुत मुश्किल दौर देखा है। इसलिए ये जरूरी है कि सही वक्त पर सही कदम उठाए जाएं। इससे कुछ देर के नुकसान या परेशानी हो सकती है, लेकिन आखिर में हम सबको सुरक्षित रखने में कामयाब होंगे।

इटली के वेटिकन सिटी में मौजूद गार्ड्स को भी मास्क पहनने को कहा गया है। यहां पोप फ्रांसिस रहते हैं। इटली में संक्रमण की दूसरी लहर को देखते हुए नए प्रतिबंध लगाए जाने की तैयारी है।

ब्रिटेन : तीन चरणों की नई योजना
बोरिस जॉनसन सरकार ने देश में संक्रमण की दूसरी लहर से निपटने के लिए नई योजना तैयार की है। इसके लिए तीन लेयर वाला एक प्लान तैयार किया गया है। इसे मीडियम, हाई और वेरी हाई कैटेगरी में बांटा गया है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि वो सख्त या कम्प्लीट लॉकडाउन से बचना चाहती है। लिहाजा, संक्रमण को काबू में करने के लिए नया प्लान बनाया गया है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पहली बार विपक्षी सांसदों को भी इस प्लान की जानकारी दी है। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि सरकार कोरोना के बहाने जनता के अधिकारों का हनन कर रही है।

साउथ कोरिया: यहां राहत
साउथ कोरिया में संक्रमण के मामले कम होने के बाद सोमवार से सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों में राहत दी गई है। यहां नाइटक्लब, बार और रेस्टोरेंट दोबारा खोलने की इजाजत दे दी गई है। स्टेडियम की कैपेसिटी से 30% दर्शकों के साथ खेल आयोजनों की इजाजत होगी। प्रधानमंत्री चुंग से-क्यून ने रविवार को इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि हम देश भर में सोशल डिस्टेंसिंग में राहत देंगे, लेकिन, खतरे को नजरअंदाज नहीं करेंगे। डोर टू डोर बिजनेस, धार्मिक आयोजनों पर पाबंदियां जारी रहेंगी।



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Coronavirus Novel Corona Covid 19 13 oct | Coronavirus Novel Corona Covid 19 News World Cases Novel Corona Covid 19


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ट्रम्प ने कहा- इस साल मुझे नोबेल शांति पुरस्कार के लिए क्यों नहीं चुना गया, कितना भी अच्छा काम कर लूं, मीडिया कवरेज ही नहीं देता

ट्रम्प ने कहा- इस साल मुझे नोबेल शांति पुरस्कार के लिए क्यों नहीं चुना गया, कितना भी अच्छा काम कर लूं, मीडिया कवरेज ही नहीं देता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कंजर्वेटिव मीडिया का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि उनसे मुश्किल सवाल न पूछे जाएं। इसलिए वह अपने पसंद के पत्रकारों का चुनाव कर रहे हैं। जो कठिन सवाल पूछ सकते हैं, उन पत्रकारों को दूर रखा जा रहा है। क्योंकि, मुश्किल सवाल उनकी परेशानियां बढ़ा सकते हैं। वे डिफेंसिव नहीं, बल्कि अटैकिंग अप्रोच रखना चाहते हैं। ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट में किया था। इस कोशिश के जरिए वे उन वोटर्स को कुछ खास मैसेज देना चाहते हैं, जो बहकावे में आ सकते हैं।

राष्ट्रपति के लिहाज से ये इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि चुनाव में सिर्फ तीन हफ्ते रह गए हैं। कोरोना पॉजिटिव होने और फिर कथित तौर पर रिकवर होने के बाद ट्रम्प ने पहला ऑन कैमरा इंटरव्यू दिया। इस दौरान ट्रम्प को इस बात की शिकायत और दुख था कि इस साल उन्हें नोबेल के शांति पुरस्कार के लिए क्यों नहीं चुना गया। इसके लिए उन्होंने उस मीडिया को दोषी ठहराया जो उनसे मुश्किल सवाल करता है। ट्रम्प ने कहा- ‘मैं कितना भी अच्छा काम कर लूं, मीडिया उसे कवरेज ही नहीं देता।’ इस बीच ट्रम्प से एक सवाल पूछा गया कि क्या आपकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है? इस पर राष्ट्रपति ने कहा- ‘मैं जानता हूं कि मेरी सेहत कैसी है और कब बेहतर होती है। यह सवाल हैनिटी के प्रोग्राम में पूछा गया था। करीब 50 लाख लोगों ने इसे देखा था।’

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल में फॉक्स न्यूज को करीब 100 इंटरव्यू दिए। जबकि, दूसरे नेटवर्क्स को बेहद कम। डॉक्टर सीगल को उन्होंने जो इंटरव्यू दिया वो भी लाइव टेलिकास्ट नहीं किया गया। सीगल ने स्टूडियो से सवाल पूछे। जवाब व्हाइट हाउस में लगे रिमोट कंट्रोल्ड कैमरे के जरिए हासिल हुए। डॉक्टर सीगल मैनहटन में इंटरनल मेडिसिन के एक्सपर्ट हैं।

मीडिया के जरिए वोटर्स तक पहुंचना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रम्प

डोनाल्ड ट्रम्प मीडिया का इस्तेमाल करना जानते हैं। उस मीडिया का खास तौर पर, जो उनका पक्ष लेता है। वे वोटर्स के एक खास हिस्से तक पहुंचना चाहते हैं। शनिवार को मिस्टर लिम्बॉग को जो ट्रम्प ने रेडियो इंटरव्यू दिया, उसके इशारों को साफ समझा जा सकता है। ट्रम्प और लिम्बॉग दोनों साफ कर देना चाहते थे कि व्हाइट हाउस में रहने के लिए ट्रम्प सबसे सही व्यक्ति हैं। ट्रम्प ने बाइडेन, हिलेरी क्लिंटन और एफबीआई के पूर्व डायरेटक्स जेम्स कोमे की बातों को सिरे से खारिज कर दिया।



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ट्रम्प को इस बात की शिकायत और दुख है कि इस साल उन्हें नोबेल के शांति पुरस्कार के लिए क्यों नहीं चुना गया।


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ट्रम्प की जीत की तस्वीर फिलहाल धुंधली, उन्हें और ताकत दिखानी होगी; 63% लोगों ने कहा- प्रेसिडेंट कोरोना से निपटने में गैर-जिम्मेदार दिखे

ट्रम्प की जीत की तस्वीर फिलहाल धुंधली, उन्हें और ताकत दिखानी होगी; 63% लोगों ने कहा- प्रेसिडेंट कोरोना से निपटने में गैर-जिम्मेदार दिखे

(एनी कर्नी और एस्टीड डब्ल्यू हर्नडन) बिडेन कैंपेन ने इस साल अब तक प्रचार पर 500 मिलियन डॉलर (करीब 3665 करोड़ रु.) खर्च किए हैं। पिछले महीने बिडेन कैंपेन ने टेलीविजन और रेडियो पर 40.3 मिलियन डॉलर (करीब 295 करोड़ रु.) खर्च किए। वहीं, एड ट्रैकिंग फर्म एडवर्टाइजिंग एनेलेटिक के मुताबिक, ट्रम्प कैंपेन ने 23.3 मिलियन डॉलर (करीब 170 करोड़ रु.) खर्च किए हैं। यह पिछले हफ्ते उनकी ओर से प्रचार पर खर्च की गई रकम से थोड़ा ज्यादा है। ट्रम्प कैंपेन ने बीते हफ्ते फेसबुक के जरिए प्रचार पर 5.2 मिलियन (करीब 38 करोड़ रु.) और बिडेन ने 5.9 मिलियन डॉलर (करीब 43 करोड़ रु.) खर्च किए।
इस हफ्ते हुए पोल्स में ट्रम्प की जीत की तस्वीर धुंधली नजर आ रही है। यह स्पष्ट हो गया है कि कोरोना पॉजिटिव होने पर उन्हें कोई सहानुभूति नहीं मिलने वाली है। सीएनएन के पोल में उन्हें जो बिडेन से 16 प्वाइंट से पीछे दिखाया जा रहा है। सीएनएन के सर्वे में इस साल अब तक ट्रम्प के बारे में इतना बुरा पोल नहीं आया है।

ट्रम्प के बारे में क्या कहते हैं पोल्स

सीएनएन का पोल ट्रम्प के वायरस की जांच होने के बाद किया गया। इसमें 63% अमेरिकियों ने कहा कि वे सोचते हैं कि ट्रम्प ने गैर जिम्मेदारी से काम या है। उन्होंने अपने आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा और संक्रमण के खतरे को नजरअंदाज किया। न्यूयॉर्क टाइम्स और सिएना कॉलेज के पोल में भी ट्रम्प पिछड़ते नजर आ रहे हैं। इस दोनों पोल में ट्रम्प नेवादा में बिडेन से 6 प्वाइंट से पीछे हैं। चार साल पहले ट्रम्प ने ओहियो से जीत हासिल की थी, लेकिन पोल में यहां भी वह बिडेन से 1 प्वाइंट से पिछड़े नजर आ रहे हैं।

ट्रम्प के बर्ताव से वोटर्स उनसे दूर हुए

चुनाव में तीन हफ्ते से भी कम का समय बाकी रह गया है। कई राज्यों में यह शुरू भी हो चुकी है। ऐसे में देश भर में ट्रम्प का समर्थन उनके विरोधियों के मुकाबले काफी कम हो रहा है। उनके बर्ताव की वजह से महिलाएं, बुजुर्ग और कस्बों में रहने वाले वोटर्स उनसे दूर हो रहे हैं। इन सबके बीच कोरोनावायरस की वजह से अस्पताल में भर्ती होकर वापस लौटे ट्रम्प दोबारा प्रचार करने के लिए बेताब हैं। उन्होंने शनिवार को डॉक्टर्स से नोट भी हासिल भी कर लिया है, जिसमें कहा गया है कि ट्रम्प लोगों के बीच जा सकते हैं। उनसे संक्रमण नहीं फैलेगा।

व्हाइट हाउस में कार्यक्रम करने की योजना बना रहे ट्रम्प

ट्रम्प व्हाइट हाउस के साउथ लॉन पर हजारों लोगों की मेजबानी करने की योजना बना रहे हैं। यह कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उनका पहला इन-पर्सन इवेंट होगा। वह दिखाने के लिए बेचैन हैं कि जब उनके सेहत की बात हो तो चिंता करने की कोई वजह नहीं है। वे बताना चाहते हैं कि चाहे मेडिकल वजह ही क्यों न हो, उन्हें नहीं रोका जा सकता। डिबेट कमीशन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 15 अक्टूबर को वर्चुअल डिबेट कराने का फैसला किया था। हालांकि, ट्रम्प के इसमें शामिल होने से इनकार करने के बाद अब यह कैंसिल कर दिया गया है।

कैंपेन में वापसी से ट्रम्प को फायदा नहीं

ट्रम्प के साथ दिक्कत है कि अगर वे निजी तौर पर कैंपेन में वापसी करते भी हैं तो जरूरी नहीं कि यह उनके राजनीतिक तौर पर फायदेमंद हो। उन्होंने दो हफ्ते पहले पूर्व उपराष्ट्रपति जो बिडेन के साथ डिबेट की थी। इसमें वह बिडेन को बीच में टोकते रहे, उनका अंदाज भी काफी हमलावर थे। हालांकि, फोकस ग्रुप के मुताबिक, अपनी इस डिबेट से उन्होंने अनडिसाइडेड वोटर्स ( ऐसे वोटर्स जो न तो रिपब्लिकन के सपोर्ट में और नही डेमोक्रेटिक के) को खुद से दूर करने का काम किया।

ट्रम्प ने सबकुछ ठीक दिखाने की कोशिश की

ट्रम्प ने गुरुवार को फोन से दो इंटरव्यू दिए। उन्होंने इनमें अपने समर्थकों को यह जताने की कोशिश की सबकुछ ठीक है। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाए। हालांकि जब गुरुवार की रात सीन हैनिटी के शो में बातचीत की तो उनकी आवाज भारी थी। इसके साथ ही शुक्रवार को उन्होंने राइट विंग के समर्थक माने जाने रेडियो होस्ट रश लिम्बॉग से बातचीत की। इस शो में भी उन्होंने जल्द सेशन खत्म कर दिया।

ट्रम्प कैंप के साथ कैश फ्लो से जुड़ी दिक्कतें

ट्रम्प का कैंपेन सिर्फ टीवी विज्ञापन खरीदने का पैमाना बनकर रह गया है। हालांकि, अब ट्रम्प कैंपेन टीवी विज्ञापनों पर होने वाले खर्च में कटौती कर रहा है, क्योंकि इसे कैश फ्लो से जुड़े मुद्दों का सामना कर रहा है। इसके साथ ही यह राष्ट्रपति को लेकर व्हाइट हाउस के फैसले का इंतजार कर रहा है। कैंपेन इस इंतजार में है कि कब ट्रम्प वापस लौटेंगे और चुनाव प्रचार शुरू करेंगे। इसी बीच, ऐसा भी कहा जा रहा है कि ट्रम्प ने 10 दिन तक लोगों से दूर रहने के बाद नया शेड्यूल तैयार करने को कहा है।
पेंस ने ट्रम्प की छवि सुधारने की कोशिश की।
वाइस प्रेसिडेंशियल डिबेट ने माइक पेंस ने ट्रम्प की छवि सुधारने की कोशिश की। डेमोक्रेटिक पार्टी की वाइस प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट ने पेंस से ट्रम्प की नीतियों का बचाव करने को कहा। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वे ट्रम्प को उस नजरिए से न देखें जैसे बहुत सारे अमेरिकन देखते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प पे वायरस को गंभीरता से लिया है। हालांकि, वह इलेक्टोरल प्रोसेस पर ट्रम्प की ओर से उठाए गए सवालों को नजरअंदाज करते नजर आए। इसके साथ ही व्हाइट सुपरमेसी जैसे मुद्दों पर भी कुछ नहीं किया।



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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प बीते शनिवार को अस्पताल से वापस लौटने के बाद व्हाइट हाउस की बाल्कनी से अपने समर्थकों का अभिवादन करते हुए।- फाइल फोटो


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Sunday, October 11, 2020

28 दिन पहले अगवा किए गए मजदूरों को छुड़ाया गया, किडनैपर्स ने यकीन दिलाने के लिए कंपनी को इनकी फोटो दिखाई थी

28 दिन पहले अगवा किए गए मजदूरों को छुड़ाया गया, किडनैपर्स ने यकीन दिलाने के लिए कंपनी को इनकी फोटो दिखाई थी

लीबिया में 28 दिन पहले अगवा किए गए तीन राज्यों के सात मजदूरों को छुड़ा लिया गया है। ट्यूनीशिया में भारत के राजदूत पुनीत रॉय कुंदल ने रविवार को इसकी जानकारी दी। छुड़ाए गए सभी सातों लोग मजदूर हैं और आंध्रप्रदेश, बिहार और गुजरात के रहने वाले हैं। कुछ किडनैपर्स ने 14 सितंबर को इन्हें लीबिया के अस्वेरिफ इलाके से अगवा कर लिया था। इसके बाद से ही इन्हें छुड़ाने की कोशिश की जा रही थी।

लीबिया में भारत का दूतावास नहीं है। ऐसे में इन भारतीयों को छुड़ाने की जिम्मेदारी ट्यूनीशिया स्थित भारतीय मिशन को दी गई थी। ट्यूनीशिया के भारतीय दूतावास ने लीबिया सरकार और वहां की अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मदद से इन्हें छुड़ाया है।

किडनैपर्स ने दिखाए थे अगवा भारतीयों के फोटो

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बीते गुरुवार को बताया था कि सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। इन्हें काम पर रखने वाली कंपनी से किडनैपर्स ने संपर्क किया था। कंपनी को मजदूरों को फोटो दिखाकर यह यकीन दिलाया था कि उनके कर्मचारी अगवा हो गए हैं और सुरक्षित ढंग से उनके कब्जे में हैं। उन्होंने इन लोगों को छोड़ने के बदले फिरौती की मांग की थी। इसके बाद इन लोगों के परिवार ने केंद्र सरकार से उन्हें वापस भारत लाने के लिए मदद मांगी थी।

छुड़ाए गए लोग लीबिया में आयरन वेल्डर का काम करते थे

अगवा किए गए लोगों में मुन्ना चौहान, साह अजय, महेन्द्र सिंह, उमेदीब्राहिम भाई मुल्तानी, जोगाराव बतचाला और दनय्या बोद्धू शामिल हैं। सभी लीबिया की एनडी इंटरप्राइजेज कंपनी में आयरन वेल्डर का काम करते थे। 14 सितंबर को इन्हें भारत लौटने के लिए लीबिया के त्रिपोली एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़नी थी। कंपनी से एयरपोर्ट जाने के बीच हथियारों के साथ आए किडनैपर्स ने इन्हें अगवा कर लिया था।

फिलहाल भारतीयों के लीबिया जाने पर रोक है

सितंबर 2015 में भारत सरकार ने भारतीयों के लीबिया जाने के बारे में एडवाइजरी जारी की थी। सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए लोगों से लीबिया न जाने की सलाह दी गई थी। मई 2016 में भारत सरकार ने लीबिया की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए भारतीयों के वहां जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। यह रोक अभी भी जारी है।



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लीबिया में किडनैपर्स से छुड़ाए गए भारतीयों के साथ ट्यूनिशिया मिशन के अफसर। सभी भारतीय के परिवार ने केंद्र से बीत महीने मदद की गुहार लगाई थी।


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नए शोध में दावा- नोट, कांच और स्टील पर 28 दिनों तक जिंदा रह सकता है वायरस, मैक्सिको ने वैक्सीन के लिए 1166 करोड़ रु. एडवांस में जमा किए; अब तक 3.77 करोड़ केस

नए शोध में दावा- नोट, कांच और स्टील पर 28 दिनों तक जिंदा रह सकता है वायरस, मैक्सिको ने वैक्सीन के लिए 1166 करोड़ रु. एडवांस में जमा किए; अब तक 3.77 करोड़ केस

दुनिया में संक्रमितों का आंकड़ा 3.77 करोड़ से ज्यादा हो गया है। ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 2 करोड़ 83 लाख से ज्यादा हो चुकी है। मरने वालों का आंकड़ा 10.81 लाख के पार हो चुका है। ये आंकड़े https://ift.tt/2VnYLis के मुताबिक हैं।

ऑस्ट्रेलिया की नेशनल साइंस एजेंसी सीएसआईआरओ ने कोरोनावायरस को लेकर नए दावे किए हैं। एजेंसी ने अपनी रिसर्च में पाया है कि कोरोनावायरस नोट, कांच और स्टील की सतह पर 28 दिनों तक जिंदा रह सकता है। इसी तरह के दूसरे मुलायम सतह वाली चीजों जैसे कि प्लास्टिक और मोबाइल फोन स्क्रीन पर भी यह लंबे समय तक टिका रह सकता है। यह स्टडी वायरोलॉजी जर्नल में पब्लिश की गई है।

इस बीच, मैक्सिको ने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की मदद से चलाई जा रही कोवैक्स स्कीम के तहत कोरोना वैक्सीन खरीदने का ऐलान किया है। इसके लिए इसने 159.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 1166 करोड़) रु. की एडवांस रकम जमा की है। मैक्सिको के विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। बीते 24 घंटे में देश में संक्रमण के 3175 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही देश में संक्रमितों का आंकड़ा 8 लाख 17 हजार 503 हो गया है। अब तक यहां 83 हजार 781 मौतें हुई हैं।

दक्षिण कोरिया: सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों में राहत

दक्षिण कोरिया में संक्रमण के मामले कम होने के बाद सोमवार से सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों में राहत दी गई है। यहां नाइटक्लब, बार और रेस्टोरेंट दोबारा खोलने की इजाजत दे दी गई है।स्टेडियम की कैपेसिटी से 30% दर्शकों के साथ खेल आयोजनों की इजाजत होगी। प्रधानमंत्री चुंग से-क्यून ने रविवार को इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि हम देश भर में सोशल डिस्टेंसिंग में राहत देंगे, लेकिन, खतरे को नजरअंदाज नहीं करेंगे। डोर टू डोर बिजनेस, धार्मिक आयोजनों पर पाबंदियां जारी रहेंगी।

साउथ कोरिया के सियोल स्थित एक लैब में एक युवक का स्वैब सैंपल लेती मेडिकल स्टाफ।

फ्रांस: 24 घंटे में रिकॉर्ड 26 हजार 896 मामले
फ्रांस में बीते 24 घंटे में रिकॉर्ड 26 हजार 896 मामले सामने आए हैं। इससे पहले सबसे ज्यादा संक्रमित बीते शुक्रवार को मिले थे। अब देश में संक्रमितों का आंकड़ा 7 लाख 18 हजार 873 हो गया है। फ्रांस में बीते कुछ हफ्तों में नए मामले बढ़े हैं। बीते एक हफ्ते से यहां हर दिन 11 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। अब तक देश में 32 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई। यहां राजधानी पेरिस और उसके आसपास के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सरकार ने पेरिस समेत कई इलाकों में मास्क पहनना जरूरी कर दिया है।

फ्रांस की राजधानी पेरिस के एक अस्पताल में संक्रमित मरीज के इलाज में जुटे डॉक्टर।

नेपाल: संक्रमितों का आंकड़ा 1 लाख के पार
नेपाल में बीते 24 घंटे में 5,008 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही देश में संक्रमितों का आंकड़ा 1 लाख 5 हजार 684 हो गया है। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कुछ हफ्तों से देश में संक्रमण बढ़ा है। यहां पर बीते 4 हफ्ते में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो गई है। राजधानी काठमांडू सबसे ज्यादा प्रभावित है। देश के संक्रमण के कुल मामलों में से करीब एक तिहाई काठमांडू में सामने आए हैं। संक्रमण से अब तक यहां 614 लोगों की जान गई है। शनिवार को नेपाल के सिविल एविएशन मंत्री योगेश भट्टराई संक्रमित मिले थे।

नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक क्रीमैटोरियम के बाहर सैनिटाइजेशन में जुटे पीपीई किट पहने नेपाली आर्मी के सैनिक।


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मैक्सिको की राजधानी न्यू मैक्सिको सिटी के एक लैब में वैक्सीन से जुड़े रिसर्च में जुटी एक एक्सपर्ट। अब तक मैक्सिको में 8 लाख से ज्यादा संक्रमित मिले हैं।- फाइल फोटो


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ट्रम्प मीडिया का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहे हैं, मुश्किल सवाल करने वाले चैनलों को इंटरव्यू नहीं देते

ट्रम्प मीडिया का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहे हैं, मुश्किल सवाल करने वाले चैनलों को इंटरव्यू नहीं देते

कोरोना पॉजिटिव होने और फिर कथित तौर पर रिकवर होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहला ऑन कैमरा इंटरव्यू दिया। इसके लिए उन्होंने खुद की पसंद चुनी। फॉक्स न्यूज के डॉक्टर मार्क सीगल। सीगल वही व्यक्ति हैं जिन्होंने डेमोक्रेट गवर्नर्स की स्कूल बंद करने के लिए आलोचना की थी। साथ ही ये भी कहा था कि राष्ट्रपति की देखरेख देश के सबसे बड़े इन्फेक्शन डिसीज एक्सपर्ट डॉक्टर एंथोनी फौसी कर रहे हैं। और सीगल को जो काम सौंपा गया था, उसमें उन्होंने निराश भी नहीं किया।

मुश्किल सवालों से बचने की कोशिश
दरअसल, राष्ट्रपति कंजर्वेटिव मीडिया का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। ताकि उनसे मुश्किल सवाल न पूछे जाएं। इसलिए, अपने पसंद के जर्नलिस्ट्स का चुनाव कर रहे हैं। जो कठिन सवाल पूछ सकते हैं, उन पत्रकारों को दूर रखा जा रहा है। क्योंकि, मुश्किल सवाल उनकी परेशानियां बढ़ा सकते हैं। वे डिफेंसिव नहीं बल्कि अटैकिंग अप्रोच रखना चाहते हैं। ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट में किया था। इस कोशिश के जरिए वे उन वोटर्स को कुछ खास मैसेज देना चाहते हैं जो बहकावे में आ सकते हैं। राष्ट्रपति के लिहाज से ये इसलिए भी जरूरी है क्योंकि चुनाव में सिर्फ तीन हफ्ते रह गए हैं।

दूसरी डिबेट से बच गए ट्रम्प
कमिशन फॉर प्रेसिडेंशियल डिबेट ने दूसरी बहस वर्चुअल कराने का सुझाव दिया था। लेकिन, ट्रम्प इसे मानने तैयार नहीं थे। रिपब्लिकन पार्टी के सलाहकार एलेक्स कोनेन्ट कहते हैं- ट्रम्प को 10 बहस में भी हिस्सा लेने को तैयार हैं। वे लोगों से भावनात्मक तौर पर जुड़ना चाहते हैं। बहस को कुछ लोग चुनावी रणनीति से जोड़ना चाहते हैं। जबकि, ट्रम्प के लिए यह भावनात्मक मुद्दा है। हमारे सामने 2016 का उदाहरण है। कुछ लोग चाहते थे कि हिलेरी क्लिंटन को महिला होने का फायदा मिले। हॉलीवुड से भी उनको समर्थन मिल रहा था।

यह ट्रम्प की रणनीति है
ट्रम्प मीडिया का इस्तेमाल करना जानते हैं। उस मीडिया का तो खास तौर पर जो उनका पक्ष लेता रहा है। इसके जरिए वे वोटर्स के एक खास हिस्से तक पहुंचना चाहते हैं। शनिवार को मिस्टर लिम्बॉग को जो ट्रम्प ने रेडियो इंटरव्यू दिया उसके इशारों को साफ समझा जा सकता है। ट्रम्प और लिम्बॉग दोनों साफ कर देना चाहते थे कि व्हाइट हाउस में रहने के लिए ट्रम्प सबसे सही व्यक्ति हैं। ट्रम्प ने बाइडेन, हिलेरी क्लिंटन और एफबीआई के पूर्व डायरेटक्स जेम्स कोमे की बातों को सिरे से खारिज कर दिया।

नोबेल के लिए नहीं चुने जाने का दुख
ट्रम्प को इस बात की शिकायत और दुख है कि इस साल उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए क्यों नहीं चुना गया। इसके लिए उन्होंने मेनस्ट्रीम या कहें उस मीडिया को दोषी ठहराया जो उनसे मुश्किल सवाल करता है। ट्रम्प ने कहा- मैं कितना भी अच्छा काम कर लूं वे (मेनस्ट्रीम मीडिया) उसको कवरेज नहीं देते। दरअसल, ट्रम्प उस मीडिया का इस्तेमाल करना चाहते हैं और कर भी रहे हैं जो उन्हें उनके मनमाफिक कवरेज दे सके।

किसी सवाल का साफ जवाब नहीं
ट्रम्प से एक सवाल पूछा गया कि क्या आपकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है? इस पर उनका जवाब सुनिए। राष्ट्रपति ने कहा- मैं जानता हूं कि मेरी सेहत कैसी है और कब बेहतर होती है। यह सवाल हैनिटी के प्रोग्राम में पूछा गया था। करीब 50 लाख लोगों ने इसे देखा। ट्रम्प अपने विरोधियों को झूठा करार दे रहे हैं। ट्रम्प ने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि उन्होंने कभी अमेरिकी सैनिकों को पराजित योद्धा कहा था।

अपने कार्यकाल में ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को करीब 100 इंटरव्यू दिए। जबकि, दूसरे नेटवर्क्स को बेहद कम। डॉक्टर सीगल को शनिवार को उन्होंने जो इंटरव्यू दिया वो भी लाइव टेलिकास्ट नहीं किया गया। सीगल ने स्टूडियो से सवाल पूछे। जवाब व्हाइट हाउस में लगे रिमोट कंट्रोल्ड कैमरे के जरिए हासिल हुए। डॉक्टर सीगल मेनहट्टन में इंटरनल मेडिसिन के एक्सपर्ट हैं। लेकिन, उनके एसोसिएशन ने इस इंटरव्यू से पल्ला झाड़ लिया।



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