Sunday, August 16, 2020

68 साल के संसदीय इतिहास में पहली बार राज्यसभा-लाेकसभा एक साथ नहीं लगेंगी; रास सदस्य लाेस-दीर्घाओं में भी बैठेंगे, वेल में आकर हंगामा नहीं कर सकेंगे

कोरोनावायरस की दो गज की दूरी ने भारतीय संसद का चेहरा भी बदल दिया है। संसद का इस बार का मानसून सत्र महामारी की मजबूरियों की मिसाल साबित होगा, जब 1952 के बाद 68 साल के संसदीय इतिहास में पहली बार दोनों सदन अलग-अलग समय लगेंगे। राज्यसभा के सदस्य लाेकसभा और दीर्घाओं में भी बैठेंगे, ताकि साेशल डिस्टेंसिंग का पालन हाे। यही व्यवस्था लाेकसभा के लिए भी अपनाई जाएगी। इसके लिए संसद में इन दिनाें जाेर-शाेर से काम चल रहा है।

दो पारियों में चलेगा: राज्यसभा सुबह ताे लाेकसभा शाम काे लग सकती है

  • नई बैठक क्षमता के हिसाब से राज्यसभा के 60 सदस्य सदन में और 51 गैलरियों में बैठेंगे। बाकी 132 सदस्यों को लोकसभा के चैंबर में बैठाया जाएगा। इसी के चलते दोनों सदनों की बैठक एक साथ होने के बजाय दो अलग-अलग पारियों में होगी। राज्यसभा सुबह ताे लाेकसभा शाम काे लग सकती है।
  • दोनों सदन विशालकाय स्क्रीन पर दिखेंगे, जिससे कार्यवाही में पूरा सदन एक दिखाई दे।
  • रास के मुख्य चैंबर में पीएम, सदन के नेता, विपक्ष के नेता बैठेंगे। सभी दलों के सदन के नेता भी चैंबर में ही बैठेंगे। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, एचडी देवेगौड़ा, रामविलास पासवान, रामदास अठावले के लिए सीटें रखी गई हैं।
  • कार्यवाही के दाैरान विपक्ष शोरशराबा और हंगामा नहीं कर पाएंगे। गैलरी में बैठे सदस्य भी सदन के बीचोबीच नहीं आ सकेंगे।
  • एक विपक्षी सदस्य ने भास्कर से कहा कि बैठक व्यवस्था के बावजूद कोई भी सदस्य अपने अधिकार का उपयोग करते हुए मेन चैंबर में जा सकता है। वह गैलरियों से निकलकर एक मिनट में ही सीढ़ियां उतरकर मेन चैंबर में पहुंच कर संसदीय कर्तव्य निभा सकता है।
  • सदन के स्टाफ की संख्या भी सीमित की जाएगी। एक समय में 15 कर्मी ही बैठ सकेंगे।

ये व्यवस्थाएं की जा रहीं

  • दाेनाें चैंबर और गैलरियों के बीच संक्रमण फैलने से रोकने के लिए पॉलीकाॅर्बोनेट सेपेरेशन स्क्रीन लगाई गई हैं।
  • हवा का संक्रमण रोकने के लिए एयरकंडीशनर सिस्टम में अल्ट्रावायलेट किरणों से संक्रमण खत्म करने के इंतजाम किए गए हैं।
  • दोनाें सदनों को जोड़ने के लिए 85 इंच के चार बड़े डिस्प्ले स्क्रीन लगाए जा रहे हैं। 4 गैलरियों में 40-40 इंच के छह स्क्रीन लगाए गए हैं।
  • दोनों सदनों के बीच ऑडियो-विजुअल व्यवस्था
  • सितंबर के पहले हफ्ते से तीसरे हफ्ते के बीच सत्र बुलाना जरूरी है। सचिवालयाें को अगस्त के आखिरी सप्ताह तक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सत्र 10 दिन तक सीमित रहने का अनुमान है।


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For the first time in 68 years of parliamentary history, Rajya Sabha-Lok Sabha will not be held together; RAs members will also sit in the galleries, they will not be able to create commotion in the well


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