Wednesday, April 29, 2020

सीबीएसई 10वीं की 6 विषयों की परीक्षा सिर्फ उत्तर पूर्वी जिला के छात्रों की होंगी 

सीबीएसई 10वीं की 6 विषयों की परीक्षा सिर्फ उत्तर पूर्वी जिला के छात्रों की होंगी 

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(सीबीएसई) ने बुधवार को फिर से स्पष्ट किया है कि 10वीं या 12वीं की मुख्य परीक्षाएं ली जाएंगी। 1 अप्रैल को जिन विषयों की परीक्षा लिए जाने का फैसला किया गया था, उसमेंकोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन उसकी तारीख को लेकर कोई ऐलान करने की स्थिति में 3 मई के बाद के हालात देखने के बाद होंगे।

10वीं की परीक्षाएं सिर्फ उत्तर पूर्वी दिल्ली के छात्रों के लिए ही होगी। यहां सीएएस विरोध प्रदर्शन के बाद दंगा फसाद हुआ था जिससे परीक्षाएं आयोजित नहीं कर पाए थे। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने बयान जारी करके कहा है कि बोर्ड ने 10वीं व 12वीं की परीक्षा लिए जाने व 1 अप्रैल को जारी नोटिस में तय प्रावधानों में कोई फैसला नहीं बदला है। छात्र व अभिभावक सोशल मीडिया पर चलने वाले अफवाहों पर ध्यान ना दें। परीक्षाएं जब भी ली जाएंगी, उससे कम से कम 10 दिन पहले सूचना दी जाएगी।



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आने-जाने से बचने के लिए एक हजार पुलिसकर्मियों के रहने की व्यवस्था की

आने-जाने से बचने के लिए एक हजार पुलिसकर्मियों के रहने की व्यवस्था की

एनसीआर में रहने वाले पुलिसकर्मियों को पड़ोसी राज्याें से आना-जाना पड़ता है। दूसरी ओर वायरस के संक्रमण को फैलने से बचाने के लिए दिल्ली के आसपास के राज्यो ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इसी के चलते दिल्ली पुलिस ने अपने एक हजार जवानों को दिल्ली में ठहरने की व्यवस्था की है। यह व्यवस्था 30 जगहों पर की गई है।

दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि आने-जाने से बचने के लिए दिल्ली में 60 स्थानों पर करीब एक हजार पुलिस कर्मियों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी। दिल्ली-एनसीआर में करीब 30 फिसदी दिल्ली पुलिस कर्मचारी रहते हैं। उन्होंने कहा कि बाकी कर्मचारियों को समायोजित करने के लिए अधिक स्थानों की पहचान की जा रही है। इन पुलिसकर्मियों के परिवार से संपर्क करने और उनकी हालचाल पूछने के लिए एक हेल्पलाइन भी स्थापित की गई है।



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जिन्हें अनुमति, वही करें प्लाज्मा थैरेपी पर रिसर्च: स्वास्थ्य मंत्री

जिन्हें अनुमति, वही करें प्लाज्मा थैरेपी पर रिसर्च: स्वास्थ्य मंत्री

प्लाज्मा थेरेपी पर रिसर्च को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब देते हुए बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि केंद्र सरकार ने कहा है कि प्लाज्मा थेरेपी बड़ा ही टेक्निकल काम है। यह एक्सपेरिमेंट स्टेज पर है, जिन लोगों को अनुमति नहीं है उन्हें नहीं करना चाहिए।

जैन ने कहा कि जिन लोगों में लक्षण नहीं हैं या हल्के लक्षण हैं। ऐसे पॉजिटिव मरीज को उनको घर में ही आइसोलेशन करके इलाज किया जाएगा। उन्हें अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सील जोन हम उस इलाके को बनाते हैं जहां पर 3 या उससे अधिक कोरोना पॉजिटिव आते हैं। इन जोन में करीब 90 फीसद कोरोना के मामले आने बंद हो गए हैं।

कोरोना के तेजी से बढ़ते मामले के सवाल पर जैन ने कहा कि अब ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले दोगुनी होने की स्थिति 4 से 5 दिनों में थी, अब यह बढ़कर 13 दिन में आ गई है। दिल्ली में देश से बेहतर स्थिति है। पहले कोरोना बढ़ने का फीसद 20 था, अब घटकर 12 फीसद हो गई।



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आजादपुर मंडी में सब्जी की आवक 40% घटी, फलों के साथ जल्द बढ़ सकते हैं दाम

आजादपुर मंडी में सब्जी की आवक 40% घटी, फलों के साथ जल्द बढ़ सकते हैं दाम

कोरोना संक्रमण के बढ़ते दायरे का असर अब लोगों की थाली पर भी नजर आ सकता है। दरअसल आजादपुर मंडी में कोरोना के संक्रमण के मामले आने के बाद कारोबारियों की एसोसिएशन ने सोमवार से बंद का आह्वान किया है। इसके चलते मंडी में 50 प्रतिशत से ज्यादा कारोबारियों ने काम बंद कर दिया है। कारोबारी न तो माल ला रहे है और ना ही काम कर रहे हैं। यही कारण है कि मंडी में बुधवार को 5 हजार टन ही आवक रही है। जबकि आम दिनों में मंडी में 7 से 8 हजार टन की आवक रहती है।

आजादपुर मंडी के आढ़ती राजीव कुमार ने बताया कि रविवार को कारोबारियों ने माल की गाड़ियां बुलाई थीं। तीन दिन से कारोबारी स्टॉक का माल बेच रहे हैं। कई कारोबारियों ने काम बंद कर दिया है। ऐसे में स्टॉक का माल खत्म होने पर सब्जी और फल दोनों के दाम में तेजी आएगी। इसका असर एक दो दिन में दिखने को मिलेगा। आजादपुरी मंडी के सेब के कारोबारी विजय कुमार ने बताया कि फल की आवक भी 50 प्रतिशत कम हो गई है। इसका कारण कोरोना की दहशत में कारोबारी और खरीदार दोनों ही मंडी में नहीं जा रहे है। ऐसे में साफ है कि दो से तीन दिन में फलों के दाम बाजार में बढ़ेंगे। एक कारोबारी ने बताया कि अभी शहर के सभी होलट, रेस्टारेंट और छोटी खाने पीने की दुकानें बंद है। ऐसे में मंडी में स्टॉक माॅल की खपत आम दिनों के समान नहीं है।

मंडी से जुड़े तीन और कारोबारी कोरोना पॉजिटिव, अब तक 15 कारोबारी पॉजिटिव पाए गए
आजादपुर मंडी में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। बुधवार को आजादपुर मंडी से जुड़े तीन और कारोबारी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसके साथ ही कोरोना पॉजिटिव की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। तीनों कारोबार अलग-अलग इलाके पीतमपुरा, रोहिणी और आदर्श नगर में रहते थे। मंडी प्रशासन ने तीनों की दुकानों को सेनिटाइज कर सील कर दिया है। वहीं, इनके संपर्क में आने वाले लोगों और रिश्तदारों को क्वारंटीन होने के लिए कह दिया गया है।

इससे पहले मंगलवार को एक अन्य आदर्श नगर निवासी सब्जी के कारोबार से जुड़े कारोबारी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उसकी पत्नी की भी रिपोर्ट पाजिटिव आई थी। सोमवार को 11 कारोबारियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बता दें मंडी से जुड़े कारोबारी संक्रमितों की संख्या 25 से ज्यादा होने की बात कर रहे हैं। वहीं, उनका कहना है कि मजदूरों का अभी कोई टेस्ट नहीं हुआ है। इस पर मंडी प्रशासन का कहना है कि हमारे पास 15 कारोबारियों की रिपोर्ट ही पॉजिटिव आई है। जानकारी के अनुसार मंडी में 50 लोगों के सैंपल लिए गए थे, जिनकी रिपोर्ट गुरुवार या शुक्रवार के दिन आ सकती है। ऐसे में आशंका है कि मंडी में कोरोना पॉजिटिव की संख्या में इजाफा होगा।

एपीएमसी बोली- अभी मांग के अनुसार सब्जी और फल मौजूद हैं
एपीएमसी के चेयरमैन आदिल अहमद खान ने बताया कि लॉकडाउन से व्यापार प्रभावित हुआ है। बुधवार को 5000 टन आवक रही। हालांकि वर्तमान में मांग के अनुपात में सब्ज़ियां और फल उपलब्ध हैं। मंडी के अंदर सब्ज़ी और फल के दाम सामान्य रहे। किसी तरह की कोई बढ़ोतरी नही दर्ज की गई है।

सोनीपत से सब्जियों की सप्लाई रुकी, राजस्थान से आ रही हरी सब्जियां
हरियाणा के सोनीपत से दिल्ली की आजादपुर मंडी में हरी सब्जी की सप्लाई होती थी। हरियाणा सरकार ने दिल्ली में सब्जी बेचने पर रोक लगा दी है। जिससे सोनीपत से भिंडी, करेला, तोरी, लौकी, खीरा की सप्लाई रूक गई है। हालांकि मंडी प्रबंधक की तरफ से बताया गया कि हरी सब्जी राजस्थान से आती है, जो अभी आ रही है।



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In Azadpur mandi, vegetable arrivals decreased by 40%, prices may increase soon with fruits


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सीमाएं सील, दिल्ली में काम करने वाले मेडिकल स्टाफ ने शाह से मांगी मदद

सीमाएं सील, दिल्ली में काम करने वाले मेडिकल स्टाफ ने शाह से मांगी मदद

दिल्ली के साथ हरियाणा और यूपी के जिन जिलों की सीमाएं लगती हैं, एक-एक कर वे दिल्ली बॉर्डर को सील कर रहे हैं। मंगलवार को फरीदाबाद बॉर्डर और सोनीपत से जुड़े दिल्ली बॉर्डर पर सख्ती कर दी गई थी बुधवार को सोनीपत, गुड़गांव और फरीदाबाद जिला प्रशासन ने कुछ छूट के साथ लोगों के आवागमन पर पूरी तरह रोक लगा दी। फरीदाबाद के जिलाधीश यशपाल यादव की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि बुधवार दोपहर 12 से कुछ लोगों को छूट के साथ अन्य सभी तरह के लोगों की एंट्री बैन रहेगी।

विभिन्न सरकारी विभागों के प्रमुखों और लोकल प्रशासन द्वारा जारी किए गए पास भी सस्पेंड कर दिए गए। अब तीन मई तक किसी भी तरह की छूट मिलने वाली नहीं है। गाजियाबाद और नोएडा पहले ही अपने बॉर्डर सील कर चुके हैं।

खास बात यह कि बॉर्डर सील कर देने से वे डॉक्टर भी प्रभावित हुए हैं जो आवयश्यक सेवा के तहत ड्यूटी करने दिल्ली आते हैं। एनसीआर से दिल्ली के अस्पतालों में काम करने के लिए आने वाले डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत हरियाणा के बॉर्डरों पर है।

सफदरजंग अस्पताल में बहुत से डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ इन इलाकों से आता हैं। बॉर्डर पर इनसे कहा जा रहा है कि दिल्ली में ही रहने का इंतजाम करिए। सफदरजंग अस्पताल की रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने मेडिकल सुप्रीटेंडेंट को चिट्‌ठी लिखकर समस्या का समाधान करने की मांग की है। आरडीए के उपाध्यक्ष डॉ. आशू मीणा ने कहा कि हमने अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंड से कहा है कि बड़ी तादाद में डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ एनसीआर के इलाकों से अस्पताल में नौकरी करने के लिए आता है। इस समस्या का समाधान कराया जाए।

फोर्डा ने डॉ. हर्षवर्धन और सीएम केजरीवाल को भी लिखा पत्र
फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) ने गृह मंत्री अमित शाह को चिट्‌ठी लिखकर मेडिकल स्टाफ को आने-जाने की छूट देने की अपील की है। फोर्डा के अध्यक्ष शिवाजी देव बर्मन ने कहा कि ऐसे वक्त में जब कोरोना संकट बना हुआ है। कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियों का इलाज करने वाले डॉक्टरों की बहुत जरूरत है। आने-जाने की परेशानी से अस्पतालों में बहुत दिक्कत होगी। फोर्डा ने यह चिट्‌ठी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी भेजी है।

साउथ एमसीडी: कर्मचारियों के रहने-खाने का करेगा भुगतान
साउथ एमसीडी यूपी-हरियाणा इन राज्यों से डयूटी पर आने वालों प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान करेगी। इस संबंध में एमसीडी की ओर से आदेश जारी किया गया है। ए और बी कैटेगिरी के कर्मचारियों को दो हजार और सी एवं डी कैटेगिरी के कर्मचारियों को 1100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान होगा। यह भुगतान उन्हीं कर्मचारियों को किया जाएगा जिन्होंने अपना पता यूपी या फिर हरियाणा दे रखा है। सुविधा लेने के लिए कर्मचारियों को अपने डिप्टी कमिश्नर से अप्रूवल लेनी होगी।

क्या बोले पीड़ित

जब मैं अस्पताल से डयूटी करने के बाद वापस अपने घर फरीदाबाद जा रहा था तो मुझे बदरपुर बॉर्डर पर रोका गया और वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने दोबारा नहीं जाने देने की बात कही। मुझसे कहा गया कि दिल्ली में काम करते तो वहीं रहने का इंतजाम करो। इसके बाद मैंने अपने एचओडी को बताया। अस्पताल की ओर से कोई इंतजाम नहीं हुआ। मुझे यहां अस्पताल के हॉस्टल में अपने एक साथी के साथ रहना पड़ रहा है। इसका समाधान जरूर निकलना चाहिए।
-डॉ. लेखराज, रेडियोलॉजी, सफदरजंग

मैं रोज फरीदाबाद से नौकरी करने के लिए अस्पताल आता हूं। सुबह जब मैं अस्पताल आ रहा था तो मुझे कहा गया कि चले जाओ लेकिन वापस मत आना। आई कार्ड और अस्पताल की ओर से जारी पास दिखाने पर भी कोई सुनने को तैयार नहीं है। अस्पताल पहुंचने में देर होगी तो पहले से तय ऑपरेशन में परेशानी होगी। सरकार समस्या को कुछ न कुछ निकाले ताकि हमें परेशानी न हो। -डॉ संदीप तोमर, एनेस्थिसिया, सफदरजंग



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फरीदाबाद-दिल्ली सीमा पर जांच करती पुलिस।


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कोरोना वायरस के कोहराम में घोड़ा-बग्गी का व्यापार चौपट, शादियां कैंसिल होने से इससे जुड़े लोग हो गए बेरोजगार

कोरोना वायरस के कोहराम में घोड़ा-बग्गी का व्यापार चौपट, शादियां कैंसिल होने से इससे जुड़े लोग हो गए बेरोजगार

क्या इंसान और क्या जानवर। कोरोना के कहर ने किसी को नहीं छोड़ा है। हर किसी का हाल बेहाल है। कोरोना की कमर तोड़ने को लागू ‘महाबंद’ से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में करोड़ों रुपये का ‘घोड़ी-बघ्घी’ कारोबार चौपट हो गया है। इस काम से जुड़े कारोबारियों के सामने दो जून की रोटी के ही लाले तो पड़े हैं। इनसे जुड़े बेजुवान घोड़ा-घोड़ी भी भुखमरी के कगार पर हैं। इसकी वजह वही कि, जिन शादी-बारात के चंद दिनों में इन सबकी कमाई होती थी। वे शादी-ब्याह की रौनकें इस बार कोरोना के कोहराम में भेंट चढ़ गईं

। दिल्ली रेहड़ा तांगा एसोसिएशन के खजांची पवन सिंधी हीरानंद घोड़ीवाला ने बताया कि जो मौजूदा हालात अचानक बदले हैं या सामने खड़े हैं उनमें, जब साहब जिंदगी रहेगी, तभी तो बाकी बची जिंदगी की गुजर-बसर की सोचेंगे। फिलहाल तो अपनी, अपने परिवार की जिंदगी के साथ साथ दरवाजे पर बंधे खड़े बेजुबान ‘घोड़ा-घोड़ी’ की जिंदगी बचाने के लिए भी लाले पड़े हैं। सिंधी ने बताया कि ये प्योर सीजनल बिजनेस है। साल में एक-दो सप्ताह नवंबर-दिसंबर। उसके बाद असली काम अप्रैल-मई में मिल जाता है। पूरे साल में सबसे ज्यादा काम अक्षय तृतीया, तुलसी विवाह (नवंबर), देव उठान, वसंत पंचमी (फरवरी) में शादी-ब्याह का थोड़ा बहुत काम होता है।
धंधा चौपट होने से जिंदगी अचानक थमी नहीं, काफी पीछे चली गई

दिल्ली के घोड़ा-बघ्घी कारोबारी कमल प्रधान ने कहा, मैं सरकार को दोष नहीं दे सकता। लेकिन कोरोना ने कहीं का नहीं छोड़ा है, यह वो सच है जो, हर किसी को निगलना पड़ेगा। कोरोना की कमर तोड़ने के लिए जिंदगी अचानक थमी नहीं, सदियों पीछे चली गई है। शादियों में लोगों की शान-ओ-शौकत में चार चांद लगाने और अच्छा बिजनेस करने कराने वाले हम सब इस सीजन में बर्बाद हो चुके हैं। करोड़ों का बिजनेस कौड़ियों का नहीं रहा।

कमाने की बात दूर रही इस लॉकडाउन में जो बुकिंग थीं वो सब भी कैंसिल हो चुकी हैं। दिल्ली घोड़ा बघ्घी एसोसिएशन पदाधिकारी अशोक आहूजा के मुताबिक, दिल्ली में एक अनुमान के मुताबिक, 5-6 लाख लोग घोड़ा-बघ्घी बिजनेस से जुड़े हैं। इनमें मालिक, खल्लासी, लेबर, शू मेकर आदि सब जुड़े हैं। सालाना औसतन 50 करोड़ से ऊपर का कारोबार सिर्फ राजधानी में घोड़ा-बघ्घी का है। जबकि एक अंदाज से 5 हजार से ज्यादा घोड़ा-घोड़ी इस कारोबार में ‘धुरी’ की मानिंद जुड़े हैं। कोरोना के कहर ने इन सबको नेस्तनाबूद कर दिया है। रास्ता कोई नजर नहीं आता।



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लोकगीतों से जागरूक कर रहे हैं शेल्टर होम के प्रवासी मजदूर

लोकगीतों से जागरूक कर रहे हैं शेल्टर होम के प्रवासी मजदूर

नई दिल्ली जिला में अलग-अलग संगठन व स्वयंसेवी संगठनों की आठ टीमें राजस्थानी, बुंदेलखंडी और भोजपुरी लोकगीत प्रवासी मजदूरों के शेल्टर और कालोनी में मनोरत्नम कैंपेन से खुशियां बांट रहे हैं। प्रवासी मजदूरों के शेल्टर होम, कालोनी के टुकड़े में टीमें हाथ में हार्मोनियम और ढोलक लेकर पहुंच रहे हैं। नई दिल्ली डीएम की तनवी गर्ग ने कैंपेन की जिम्मेदारी प्रोवेशन एसडीएम डॉ. नितिन शाक्य को सौंपी है।

डॉ. नितिन ने बताया कि मनोरत्नम का मतलब है, इस उदासी में मन में खुशी पैदा करने वाला कैंपेन। ना सिर्फ लोकगीत से बुंदेलखंड, राजस्थान या बिहार के प्रवासी मजदूरों को शेल्टर होम में जोड़कर कोरोना की महामारी से बचने के लिए लॉकडाउन का पालन करने का संदेश देते हैं। लोग कालोनी, घर या शेल्टर होम में लंबे समय से लॉक हैं, ऐसे में हारमोनल चेंज होते हैं जिसमें अवसाद की स्थिति ना हो इसलिए इस तरह के कार्यक्रम से लोगों को जोड़ रहे हैं। लॉकडाउन में प्रशासन की सूचना जल्द पब्लिक तक पहुंचाने के लिए 35-40 वाट्सएप ग्रुप बनाए हैं। इसमें कुछ कंटेनमेंट जोन के ग्रुप हैं।



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