छात्रों को पांच अगस्त तक फीस जमा करवाने और लेट होने पर पेनाल्टी देने के बारे में दी गई नोटिस को लेकर डीटीयू और छात्र आमने-सामने आ गए हैं। छात्रों ने डीटीयू के इस आदेश को तुगलकी बताकर विरोध शुरू कर दिया है। कोरोना संक्रमण के इस संकट में पूरा देश आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। वहीं दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) ने छात्रों को पांच अगस्त से पहले सालाना फीस जमा करवाने के लिए आदेश जारी का उनका औैर परिवार का चिंता बढ़ा दिया है।
डीटीयू ने नोटिस में कहा है कि पांच अगस्त के बाद समय पर फीस नहीं देने पर कहा गया है कि विलंब शुल्क के साथ फीस देना होगा। डीटीयू ने नोटिस जारी कर कहा है कि अगर वो पांच अगस्त तक 1.90 लाख रुपए का सालाना फीस जमा नहीं करवाते हैं तो उन्हें फाइन देना पड़ेगा। छात्रों का कहना है कि डीटीयू का एक तो फीस लाखों में है और त्योहार के इस समय में बैंक भी बंद हैं। डीटीयू के द्वारा जारी फरमान को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली सरकार पर भी निशाना साधा है। विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री कह रहे थे कि किसी भी व्यक्ति को आपदा के दौरान परेशान नहीं किया जाएगा। लेकिन उनकी कथनी और करनी में कितना फर्क है वह दिल्ली सरकार द्वारा संचालित होने वाले विश्वविद्यालय की कार्यशैली से साफ नजर आता है।
देर से फीस जमा करने पर बढ़ेगा फाइन
डीटीयू द्वारा लगाए गए विलंब शुल्क के तहत जो छात्र 5 अगस्त से 12 अगस्त के बीच फीस जमा करता है उसे दो हजार, 20 अगस्त से पहले फीस जमा करने वाले छात्रों को पांच हजार, 27 अगस्त तक फीस जमा करने वाले छात्रों को दस हजार का विलंब शुल्क देना पड़ेगा और 27 अगस्त के बाद भी किसी छात्र की फीस नहीं आती तो यूनिवर्सिटी से उसका नाम काट दिया जाएगा।
एबीवीपी ने यूनिवर्सिटी पर उठाए सवाल
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्री सिद्धार्थ यादव ने कहा कि इस समय किसी तरीके से छात्रों और उनके परिवार पर आर्थिक रूप से इतना दबाव डालना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी धनराशि जमा करने के लिए कुछ ही दिन दिए गए हैं जबकि अभी जब देश में किसी की भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। 5 अगस्त तक फीस जमा करने के लिए कहा गया है जिसमें 3 दिन तो छुट्टी ही है। ऐसे में कोई कैसे इतनी बड़ी रकम जुटा कर फीस जमा कर पाएगा।
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