कोरोना के कारण लोगों में मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। डर के साए में जी रहे लोग डॉक्टर के निर्देशों को समझे बगैर जरूरत से ज्यादा एहतियात बरत रहे हैं। किसी ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है तो कोई बेवजह परिवार से दूरी बनाए हुए है। संक्रमण के डर से कुछ लोगों ने इतनी बार हाथ धोए कि उनके हाथों में जख्म हो गए हैं। शहर के सरकार और निजी अस्पतालों में ऐसे में अनेक मरीज रोज जांच के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं मानसिक रोग विशेषज्ञों के पास रोज ऐसे काफी लोगों के फोन आ रहे हैं। ज्यादातर लोग बार-बार हाथ धोना, बेवजह बार-बार मोबाइल, लैपटॉप व घर के दरवाजे साफ करना, हर समय इस वायरस से जुड़ी तमाम डरावनी बातें करने जैसी शिकायतें कर रहे हैं।
एनआईटी तीन नंबर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर का कहना है कि बेवजह बार-बार हाथ धोना, लैपटॉप, मोबाइल और दरवाजों को कई बार साफ करना, स्वस्थ परिजनों से भी जबरन दूरी बनाने जैसे लक्षण सावधानी नहीं, बल्कि मानसिक बीमारी के लक्षण हैं। नीलम चौक स्थित एस्कार्ट फोर्टिस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. रोहित गुप्ता के अनुसार लोगों में डिप्रेशन का खतरा बढ़ रहा है। ऐसा होने पर डॉक्टरों से परामर्श जरूर करें। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग कराएं। समय पर इलाज कराने से मानसिक रोगों से बचा जा सकता है।
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