केंद्र सरकार समाचार पत्रों को दिए जाने वाले विज्ञापनों को लेकर एक अहम फैसला करने जा रही है। सरकार अब 80% अखबारी विज्ञापन भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों को देगी। शेष 20% विज्ञापन अंग्रेजी अखबारों को दिए जाएंगे। सरकार की प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति में यह प्रस्ताव है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा- मंत्रालय/विभागों को नई नीति के तहत मीडिया स्ट्रैटजी बनानी होगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा प्रसार सुनिश्चित हो सके।
नई नीति के तहत 15% विज्ञापन छोटे समाचार पत्रों, 35% मझोले समाचार पत्रों और 50% विज्ञापन बड़े समाचार पत्रों को दिए जाएंगे। 25 हजार तक प्रतियों वाले समाचार पत्र छोटे, 25,001 से 75 हजार प्रतियों वाले समाचार पत्र मध्यम और 75 हजार से ज्यादा प्रतियों वाले समाचार पत्र बड़े समाचार पत्रों की श्रेणी में हैं। सरकार का कहना है कि इस नियम से बोडो, डोगरी, गढ़वाली जैसी भारतीय भाषाओं को भी समान अवसर मिल सकेंगे।
सरकार की गाइडलाइन पर राज्य जल्द लेंगे फैसला
अभी तक देश की लगभग सभी राज्य सरकारें केंद्र सरकार की गाइडलाइन के हिसाब से ही राज्य की विज्ञापन नीति बनाती रही हैं। अब केंद्र की प्रस्तावित गाइडलाइन के बाद देश की सभी राज्य सरकारें अपनी विज्ञापन नीति निर्धारित कर सकती हैं। अभी राज्य सरकारों के विज्ञापन बजट का बड़ा हिस्सा अंग्रेजी अखबारों और न्यूज चैनलों को चला जाता है। राज्य सरकारें इस बात को भी देखेंगी कि जो विज्ञापन का पैसा प्रदेश के बाहर के अखबारों-टीवी चैनलों को दिया जाता है, उसकी उपयोगिता क्या है, और उसकी क्या सीमा निर्धारित की जाए। संभवत: केंद्र की पॉलिसी घोषित होते ही सभी राज्य सरकारें एक कमेटी का गठन कर नीति निर्धारण करेंगी, ताकि विज्ञापन के बजट का सही उपयोग राज्य की जनता तक प्रचार-प्रसार में हो सके।
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