दिल्ली की सब्जी मंडियां मेवात क्षेत्र के टमाटर पर निर्भर करती है क्योंकि यहां न केवल अच्छी खासी पैदावार होती है बल्कि किसानों को उनकी उपज के उचित दाम भी मिलते है। वैसे सरकार टमाटर को पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश तक निर्यात करती रही हैं। लेकिन लॉकडाउन ने इस प्रकिया पर लॉक लगा दिया है। फिर भी एक क्रेट की कीमत दिल्ली की सब्जी मंडियों में 150-200 रुपए तक ही है जोकि पिछले साल के मुकाबले आधी कीमत है। जिससे किसानों के चेहरे खिलने की बजाए बुझे-बुझे नजर आ रहे हैं।
किसानों के चेहरे खिलने की बजाए बुझे-बुझे नजर आ रहे हैं, 3000 हेक्टेयर में टमाटर की खेतीबाड़ी हुई
किसानों का मानना है कि लॉकडाउन के कारण दिल्ली, गुड़गांव व फरीदाबाद की मंडियों को खरीददार नहीं मिल रहे। जबकि क्षेत्र में 3000 हेक्टेयर में टमाटर की खेतीबाड़ी हुई थी। शाहपुर गांव के किसान जाकिर हुसैन मुसा कहते हैं कि गतवर्ष एक क्रेट 400 रुपए तक बिक्री हुई परंतु इस बार व्यापारी वर्ग भी लॉकडाउन के डर से टमाटर नहीं खरीदना चाहते हैं क्योंकि मंडियों में छोटे व्यापारियों को पुलिस नहीं घुसने देती है। घागस के किसान नियामत खां व शमी खां तथा नोटकी के महमूद, गुमट बिहारी के मुबारिक बताते हैं कि 160 रुपए के दाम हमारी क्रेट की खरीद हुई। एक क्रेट पर 30 रुपए गाड़ी किराया, 4 रुपए पल्लेदार और 3 रुपए आढ़त को देने पड़ते हैं।
किसानों का पुलिस पर मारपीट का आरोप | किसानों का आरोप है कि नूंह चौक और दिल्ली आजादपुर सब्जी मंडी गेट पर पुलिस भी हमारे साथ मारपीट करती है। एक घागस के किसान का सिर फोड़ दिया। वहीं गुमट बिहारी के किसान का हाथ तोड़ दिया था। नूंह के डीसी पंकज ने बताया कि जिले में सब्जियां बेचने वाले किसानों के पास बड़ी तादाद में बने हैं। अब तक सभी मिलाकर 10 हजार से अधिक पास जारी किए गए हैं। लॉकडाउन के कारण किसानों को सब्जियों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं।
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