जीवन मंत्र डेस्क. महाभारत में पांडवों का परिवार श्रेष्ठ परिवार था। कुंती ने पांडव पुत्रों का पालन अभावों में किया, लेकिन अच्छे संस्कार दिए। इसी वजह से सभी पांडव भाई एक-दूसरे के प्रति प्रेम, समर्पण के साथ रहते थे। सभी को अपने कर्तव्य का ज्ञान था।
परिवार में होना चाहिए एक-दूसरे के प्रति समर्पण
महाभारत में पांडवों के परिवार में मां कुंती और पांच भाई थे। मां ने पहले अपने कर्तव्य निभाए। अपनी सौतन माद्री की दोनों संतानों नकुल और सहदेव को भी अपने बच्चों जैसा ही प्रेम और परवरिश दी। अच्छे संस्कार दिए, सभी बेटे भी ऐसे ही थे। वे भी एक-दूसरे से निस्वार्थ प्रेम करते थे।
मां कुंती के मुंह से निकली हर बात को पूरा करने का संकल्प सभी भाइयों ने ले रखा था। सभी बड़े भाई युधिष्ठिर के प्रति आदर का भाव रखते थे। हर भाई को अपने कर्तव्य का ज्ञान था। किसे क्या करना है, सभी की जिम्मेदारी तय थी। इसी वजह से पांडव जहां भी रहे, सुखी रहे। जिन परिवारों में ऐसा समर्पण और बड़ों का आदर नहीं होता, वहां अक्सर वाद-विवाद और बिखराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
परिवार में इन बातों से बचना चाहिए
परिवार की खुशहाली और समृद्धि तभी संभव है जबकि परिवार का कोई भी सदस्य स्वार्थी, विलासी और दुर्गुणी न हो। सभी सदस्यों को इन बुराइयों से बचना चाहिए। यदि परिवार में धर्म-कर्तव्यों के प्रति पूरी आस्था और समर्पण होगा तो वे अच्छी तरह से समझ पाएंगे कि स्वार्थ की बजाय स्नेह-सहयोग का माहौल ही फायदेमंद है। किसी भी परिवार में अलगाव, बिखराव या मन-मुटाव तभी पैदा होता है, जबकि सदस्यों में अपने कर्तव्य की बजाय अधिकार को पाने की अधिक जल्दी होती है। इन बातों से बचना चाहिए।
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