जीवन मंत्र डेस्क. एक लोक कथा के अनुसार पुराने समय में एक धनी व्यक्ति रोज ध्यान करने की कोशिश करता था, लेकिन वह ध्यान नहीं कर पा रहा था। एक दिन वह अपने क्षेत्र के विद्वान संत के पास पहुंचा।
धनी व्यक्ति ने संत से कहा कि महाराज मेरे पास सुख-सुविधा की कोई कमी नहीं है। घर-परिवार में भी सब अच्छा चल रहा है। मैं रोज ध्यान करता हूं, लेकिन मुझे इसमें सफलता नहीं मिल पा रही है। लगातार मानसिक तनाव बना रहता है, कृपया कोई उपाय बताएं।
संत ने उसकी बात ध्यान से सुनी और कहा कि तुम मेरे साथ चलो। संत उसे लेकर एक कमरे की खिड़की के पास ले गए। उन्होंने धनी व्यक्ति से कहा कि बाहर क्या दिख रहा है? व्यक्ति ने कहा कि बाहर सुंदर नजारा दिख रहा है, बाहर हरियाली है। इसके बाद संत उसे एक दर्पण के सामने ले गए। व्यक्ति से कहा कि यहां तुम्हें क्या दिख रहा है। व्यक्ति ने जवाब दिया कि यहां मेरा प्रतिबिंब दिख रहा है। संत ने कहा कि इस कांच पर एक चमकीली परत है, जिससे तुम्हें कांच के दूसरी ओर दिखाई नहीं दे रहा है। ठीक इसी तरह तुम्हारे मन की दीवारों पर भी बुरे विचारों और स्वार्थ की चमकीली परत चढ़ी हुई है। जिससे तुम सिर्फ खुद को ही देख पा रहे हो, खुद के बारे में ही सोचते हो। जब तक तुम्हारे मन से ये बुरे विचार दूर नहीं होंगे, तब तक तुम ध्यान नहीं कर सकते हो।
कथा की सीख
इस छोटी सी कथा की सीख यह है कि जब तक हमारे मन में बुराइयां हैं, जब तक हम खुद के बारे में सोचते रहेंगे, तब तक मन शांत नहीं हो सकता है। मानसिक तनाव दूर करने के लिए इन बुराइयों से बचना होगा। तभी हम ध्यान कर सकते हैं।
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