Saturday, January 11, 2020

बुरे समय में भी अपने काम पर भरोसा रखेंगे तो बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है

जीवन मंत्र डेस्क. रविवार, 12 जनवरी को रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन है। उनके जीवन के कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें सुखी और सफल जीवन के सूत्र बताए गए हैं। अगर इन सूत्रों को अपने जीवन में उतार लिया जाए तो हम कई परेशानियों से बच सकते हैं। स्वामीजी के जन्मदिन पर यहां जानिए उनके जीवन से जुड़े 2 खास प्रसंग...

आत्मविश्वास और अपने कर्म पर भरोसा रखने से मिल सकती है सफलता

  • एक प्रसंग के अनुसार स्वामी विवेकानंद विदेश में थे। वहां उनकी पहचान एक धनी महिला से हो गई। वह स्वामीजी से बहुत प्रभावित हुई और उनकी शिष्या बन गई। एक दिन वे दोनों घोड़ा गाड़ी से घूम रहे थे। रास्ते में गाड़ी वाले ने सड़क किनारे गाड़ी रोकी, वहां एक महिला और कुछ बच्चे बैठे हुए थे। गाड़ी वाला उनके पास गया, बच्चों को प्यार किया और महिला को कुछ रुपए देकर लौट आया। स्वामीजी के साथ बैठी धनी महिला ये सब ध्यान देख रही थी। जब गाड़ी वाले ने फिर से गाड़ी चलाना शुरू की तो महिला ने उससे पूछा कि आप किससे मिलने गए थे, वो महिला और बच्चे कौन हैं?
  • गाड़ी वाले ने कहा कि वह मेरी पत्नी और बच्चे थे। पहले मैं एक बैंक का मैनेजर था और बहुत धनी था। बैंक को नुकसान हुआ और मैं कर्ज में डूब गया, मेरा सारा धन कर्ज उतारने में चला गया।
  • किसी तरह मेहनत करके मैंने ये घोड़ा गाड़ी खरीदी है और परिवार को उस स्थान पर छोटा सा घर ले रखा है। मैं लगातार मेहनत कर रहा हूं, जैसे ही मेरा बुरा वक्त खत्म होगा, मैं एक नया बैंक फिर से खोलूंगा। मुझे विश्वास है कि मैं जल्दी ही नए बैंक को भी विकसित कर लूंगा। गाड़ी वाले की ये बातें सुनकर विवेकानंद बहुत प्रभावित हुए।
  • स्वामीजी ने महिला से कहा कि ये व्यक्ति एक दिन अपने लक्ष्य पर जरूर पहुंचेगा। इतने बुरे समय में भी इसका आत्मविश्वास मजबूत है और इसे अपने कर्म पर पूरा भरोसा है। जिन लोगों में ये गुण होते हैं, वे बुरी से बुरी परिस्थितियों से बाहर निकल सकते हैं और कामयाब हो सकते हैं।

हर स्थिति में मां सम्मानीय और महान होती है, कभी भी मां का अनादर न करें

  • एक बार स्वामी विवेकानंदजी से एक व्यक्ति ने पूछा कि स्वामीजी, इस संसार में सबसे अधिक माता को ही महत्व क्यों दिया जाता है?
  • स्वामीजी ने मुस्कुराकर उस व्यक्ति से कहा कि पहले तुम एक पांच सेर का पत्थर एक कपड़े में लपेटकर कमर में बांध लो। इसके बाद कल मुझसे मिलने आना, मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा।
  • उस व्यक्ति ने स्वामीजी की आज्ञा का पालन किया और कमर पर एक पत्थर बांध लिया। इसके बाद कुछ ही घंटों के बाद वह फिर से स्वामीजी के पास पहुंच गया और बोला कि गुरुजी आपने एक सवाल पूछने पर इतनी बड़ी सजा क्यों दी?
  • स्वामीजी ने कहा कि तुम इस का बोझ कुछ घंटे भी नहीं उठा सके। जबकि एक मां अपने बच्चे को पूरे नौ माह अपने गर्भ में रखती है। पूरे घर का काम करती है, कभी भी अपने काम से पीछे नहीं हटती, थकान होने पर भी हंसती रहती है। संसार में मां से बढ़कर कोई और सहनशील नहीं होता है। इसीलिए मां को महान माना जाता है।
  • इस छोटी सी कथा की सीख यह है कि हमें अपनी माता के साथ ही सभी महिलाओं का पूरा सम्मान करना चाहिए। महिलाओं की सहनशीलता पूजनीय और सम्मानीय है। कभी भी किसी महिला और किसी की माता का अपमान नहीं करना चाहिए।


Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
swami vivekanand jayanti 2020, swami vivekanand birthday, vivekananda story for successful life, how to get success, swami vivekananda prerak katha


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2uG8Fkj

SHARE THIS

Facebook Comment

0 comments: