लखनऊ. पूर्व परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चुने गए हैं। उनके नाम का ऐलान शुक्रवार को चुनाव पर्यवेक्षक भूपेंद्र यादव ने किया। राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के मनोनयन के लिए स्वतंत्र देव सिंह को अधिकृत किया गया है। भाजपा संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया के तहत गुरुवार को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए स्वतंत्र देव सिंह ने नामांकन दाखिल किया था। उन्हें निर्विरोध चुना गया है। राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के मनोनयन के लिए नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष को अधिकृत किया गया है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने जुलाई माह में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय की जगह योगी सरकार में परिवहन मंत्री रहे स्वतंत्र देव सिंह को यूपी का अध्यक्ष बनाया था।
प्रदेश अध्यक्ष के अलावा राष्ट्रीय के 80 पदों के लिए 72 लोगों ने नामांकन किया है। इनके नामों का ऐलान भी आज ही होगा। राष्ट्रीय परिषद के सदस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में मतदाता होते हैं। अनुमान है कि, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 19 जनवरी को शुरू होने वाली है। 80 सदस्य पदों में से 72 ने नामांकन दाखिल किया था। जांच में सभी नामांकन सही पाए गए हैं।
पहले कांग्रेस सिंह नाम था
स्वतंत्र देव सिंह का वास्तविक नाम कांग्रेस सिंह था। संघ को बहुत कन्फ्यूजन होता था। संघ में उनका नाम स्वतंत्र देव सिंह रख दिया गया। यह नाम अखबार के नाम से प्रेरित था। बाद में उन्हें स्वतंत्र देव सिंह के नाम से जाना जाने लगा। झांसी में अखिल भारतीय विद्यार्थी में शामिल हुए। उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें कानपुर भेज दिया गया। कानपुर में वह हनुमान मिश्रा के नेतृत्व में भारतीय जनता युवा मोर्चा के साथ खड़े हो गए। 2000 में उन्हें युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। इसी दौरान उनके नेतृत्व में आगरा में हुए पार्टी के राष्ट्रीय सम्मलेन उनका बड़े नेताओं से परिचय हुआ। इसका इनाम ये मिला कि उन्हें युवा मोर्चा से मुख्यधारा में लाते हुए पार्टी ने उत्तरप्रदेश भाजपा का महामंत्री बना दिया। उन्हें उरई में सहकारी समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया।
2012 में हुई जमानत जब्त
2012 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने स्वतंत्र देव सिंह को उरई की कालपी सीट से चुनाव लड़ाया। यहां उन्हें बुरी तरह हार मिली। कांग्रेस की प्रत्याशी उमा कांति के सामने उनकी जमानत जब्त हो गई। इसके बाद भी उन्हें भाजपा ने एमएलसी बनाया। 2014 में हुए आम चुनाव उनके लिए महत्वपूर्ण रहे। भाजपा ने सिंह को उत्तरप्रदेश में होने वाली रैलियों के आयोजन की कमान दी। यहीं से वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के करीब आ गए। बुंदेलखंड में मजबूत पकड़ के चलते 19 में से अधिकतर सीटों पर टिकट उनकी सलाह पर ही दिए गए। भाजपा ने यहां से सभी 19 सीटें जीती, तो उनका कद और बढ़ गया।
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