वाराणासी. जिले के सामने घाट स्थित 'अपना घर आश्रम' में सोमवार को 6 माह पूर्व असहाय अवस्था में सेवा के लिए लाए गए थे सत्य प्रकाश अपने परिजनों से मिले तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। 25 साल बाद अपनों के बीच पहुंचे सत्य प्रकाश के परिजनों की माने तों उन्होंने तो हिन्दू विधान के अनुसार उनके अंतिम श्राद्ध की तैयारी कर ली थी। लेकिन अब उनके आने से पूरा परिवार काफी खुश है।
आश्रम के प्रमुख डां के निरंजन ने बताया सत्य प्रकाश 6 महीने पहले सिगरा में सड़क किनारे मिले थे। आश्रम में लाकर उनका इलाज किया गया और वो स्वस्थ हो गए। लगातार सेवा एवं चिकित्सा के बाद उन्होंने अपना पता बिहार के रोहतास इलाके में स्थित डेहरी ऑन सोन का बताया।
निरंजन के मुताबिक, इसकी जानकारी मिलने पर आश्रम के लोग उन्हें बताए गए पते पर ले गए, जहां पूरा परिवार उनको देखकर काफी खुश हुआ। परिजनों के मुताबिक वह 25 साल पहले ही शादी के डर से घर से भाग गए थे। अब परिवार ने उनका अंतिम श्राद्ध करने का मन बना लिया था लेकिन भगवान ने परिवार की खुशियां लौटा दीं।
भाई ओमप्रकाश ने बताया कि 6 जनवरी को ही सत्य प्रकाश का जन्म दिन भी है। परिवार को बड़ा गिफ्ट मिला। 6 भाई बहनों में दूसरे नम्बर पर हैं।आश्रम के मिलन प्रकल्प प्रभारी नीरज उपाध्याय के अथक प्रयास से घर वालों से संपर्क हुआ और सोमवार को खुशी का दिन आ गया। जब 25 सालों से अपने घर से गायब भैया अपने परिवार से मिल गए। शादी नहीं करना चाहते थे, इसलिए घर से भागे
उनके छोटे भाई ओम प्रकाश के अनुसार 25 साल पहले इंजीनियरिंग के स्टूडेंट रहे बड़े भाई सत्यपकाश की शादी की तैयारी चल रही थी। इन्होंने शादी करने से मना कर दिया। लड़की वाले देखने आए थे। उसी दिन यह घर से गायब हो गए और आज 25 साल हो गए उनका कहीं अता पता नहीं चला था।
25 साल में थी अंतिम श्राद्ध की तैयारी
उन्होंने बताया कि कई जगह उन्होंने ढूंढने का प्रयास किया। इतने लम्बे बक्त के बाद सही सलामत देखकर घरवालों की आंखों में आंसू आ गए। हिंदू विधान के अनुसार 25 साल में इनका अंतिम श्राद्ध की तैयारी की जा रही थी।
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