
झांसी. देश में कोरोनावायरस के मरीजों की संख्या में हर रोज इजाफा हो रहा है। इस महामारी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिन का लॉकडाउन किया है। लॉकडाउन के चलते एक तरफ जहां आम जनमानस घरों में कैद है वहीं दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूर हजारों किलोमीटर दूर अपने घरों के लिए पैदल निकल रहे हैं। ऐसा ही एक मामला शुक्रवार की देर रात झांसी में देखने को मिला, जहां तकरीबन तीन दर्जन मजदूर पैदल ही पहुंचे। उन्हें बुंदेलखंड के अलग-अलग जनपदों तक पहुंचना था। इन मजदूरों का कहना था कि हमारे सामने दो ही विकल्प थे या तो वहां भूखों मरते या फिर एक हजार किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर पहुंचते। हमने दूसरा रास्ता चुना और भगवान की कृपा से यहां तक पहुंच गए।
अहमदाबाद की एक फैक्ट्री में काम करने वाले राजेश पाल बताते हैं कि मैं जालौन जनपद का रहने वाला हूं। बुंदेलखंड में रोजगार की व्यवस्था ना होने की वजह से अहमदाबाद की एक साड़ी फैक्ट्री में काम करता हूं। अचानक से लॉकडाउन कर दिया गया। हम बेरोजगार हो गए हैं। वहां भूखों मरने से अच्छा घर आने की सोची। तब तक परिवहन के सारे साधन बंद कर दिए गए। अब हमारे सामने दो ही विकल्प थे, या तो वहां भूख से मरते, या फिर 1000 किलोमीटर का सफर करके अपने घर तक पहुंचते। हमने पैदल चलना ही उचित समझा।
जो खाना बांधकर चले थे वही रास्ते भर खाते रहे
दूसरे मुसाफिर अजय निषाद ने कहा- अहमदाबाद की एक प्राइवेट फैक्ट्री में काम करता हूं। जब ब्लॉक डाउन हुआ तो हमें वहां से भगा दिया गया गया। अब हमारे पास न कोई काम था और न पेट भरने के लिए पैसे। हम अहमदाबाद से अपने गृह जनपद हमीरपुर के लिए पैदल चल दिए। बीच-बीच में कुछ लोगों ने हमें थोड़ी दूर के लिए लिफ्ट भी दी। लेकिन खाना वही खाया जो हम वहां से बांधकर चले थे। जब झांसी शहर पहुंचे तो यहां कुछ वॉलिंटियर्स ने हमें पूरी और सब्जी खिलाई।
निषाद ने कहा कि आप बस स्टैंड पहुंचे हम आपके घर पहुंचाने का इंतजाम करते हैं।वहीं, हमीरपुर जनपद के रहने वाले मंगल बताते हैं कि हम हजारों किलोमीटर का सफर पार कर चुके हैं। ऐसे में हमें किसी ने भी मॉस्क और सैनिटाइजर नहीं दिए। भगवान ने हमें इतनी दूर पहुंचा दिया है। बस अब झांसी प्रशासन से यहीं उम्मीद करते हैं कि वह हमें हमीरपुर तक पहुंचा दे। हम अपने घर वालों के साथ रहना चाहते हैं।
बाद में हालांकि झांसी प्रशासन ने रोडवेज बसों के माध्यम से बाहर से आने वाले कई मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने में मदद की।
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