Wednesday, February 5, 2020

भीष्म द्वादशी आज, सुख-समृद्धि और वैभव के लिए किया जाता है ये व्रत

जीवन मंत्र डेस्क. महाभारत युद्ध में अर्जुन ने भीष्म पितामह को बाणों की शैय्या पर लेटा दिया था। इस समय सूर्य दक्षिणायन था। तब भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया और माघ मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी पर अपने प्राण त्याग किए। इसके 3 दिन बाद ही द्वादशी पर भीष्म पितामह के लिए तर्पण और पूजा का विधान है। इस दिन व्रत और पूजा के साथ ही भीष्म तर्पण और अपने पितरों की पूजा करनी चाहिए। इससे पितर तृप्त होते हैं और हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।

इस विधि से करें भीष्म द्वादशी का व्रत

  1. भीष्म द्वादशी की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करें।
  2. भगवान की पूजा में केले के पत्ते व फल, पंचामृत, सुपारी, पान, तिल, मोली, रोली, कुंकुम, दूर्वा का उपयोग करें।
  3. पूजा के लिए दूध, शहद केला, गंगाजल, तुलसी पत्ता, मेवा मिलाकर पंचामृत तैयार कर प्रसाद बनाएं व इसका भोग भगवान को लगाएं।
  4. इसके बाद भीष्म द्वादशी की कथा सुनें। देवी लक्ष्मी समेत अन्य देवों की स्तुति करें तथा पूजा समाप्त होने पर चरणामृत एवं प्रसाद का वितरण करें।
  5. ब्राह्मणों को भोजन कराएं व दक्षिणा दें। इस दिन स्नान-दान करने से सुख-सौभाग्य, धन-संतान की प्राप्ति होती है।
  6. ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद ही स्वयं भोजन करें और सम्पूर्ण घर-परिवार सहित अपने कल्याण धर्म, अर्थ, मोक्ष की कामना करें।

ये है भीष्म द्वादशी का महत्व

  1. धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा सुख व समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  2. भीष्म द्वादशी व्रत सब प्रकार का सुख और वैभव देने वाला होता है। इस दिन उपवास करने से समस्त पापों का नाश होता है।
  3. इस व्रत में ऊं नमो नारायणाय नम: आदि नामों से भगवान नारायण की पूजा अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।


Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Bhishma Dwadashi today, this fast is observed for happiness, prosperity and prosperity


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/36UU4ig

SHARE THIS

Facebook Comment

0 comments: