जीवन मंत्र डेस्क. शुक्रवार, 21 फरवरी को शिव पूजा का महापर्व शिवरात्रि है। इस दिन शिवलिंग के दर्शन करने और विशेष पूजा करने की परंपरा है। जो लोग मंदिर नहीं जा सकते, उन्हें घर में ही शिवलिंग पूजा करनी चाहिए। अगर घर में शिवलिंग नहीं है तो शिवरात्रि पर छोटा सा पारद शिवलिंग घर ला सकते हैं। पारद शिवलिंग की पूजा से अक्षय पुण्य मिलता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार घर में पारद शिवलिंग रखा हो तो वास्तु दोष भी दूर होते हैं। अलग-अलग धातुओं में पारद शिवलिंग का महत्व काफी अधिक है। इस शिवलिंग की पूजा से भक्त की मनोकामनाएं जल्दी पूरी हो सकती है। जानिए पारे से बने शिवलिंग की कुछ खास बातें...
लिंगकोटिसहस्त्रस्य यत्फलं सम्यगर्चनात्।
तत्फलं कोटिगुणितं रसलिंगार्चनाद् भवेत्।।
ब्रह्महत्या सहस्त्राणि गौहत्याया: शतानि च।
तत्क्षणद्विलयं यान्ति रसलिंगस्य दर्शनात्।।
स्पर्शनात्प्राप्यत मुक्तिरिति सत्यं शिवोदितम्।।
पं. शर्मा के अनुसार ये श्लोक शिवपुराण में दिया गया है। इसका सरल अर्थ यह है कि करोड़ों शिवलिंगों की पूजा से जो पुण्य फल मिलता है, उससे भी करोड़ गुना ज्यादा फल पारद शिवलिंग की पूजा और दर्शन से मिल जाता है। पारद शिवलिंग के स्पर्श मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिल सकती है।
तरल पारे को औषधियों की मदद से बांधा जाता है
पारद शिवलिंग बनाना बहुत मुश्किल काम है। सबसे पहले पारे को साफ किया जाता है। इसके लिए अष्ट-संस्कार किए जाते हैं। कई औषधियां मिलाकर तरल पारे का बंधन किया जाता है यानी ठोस किया जाता है। अष्ट संस्कार में करीब 6 महीने लगते हैं। इसके बाद शेष क्रियाओं में 2-3 महीने का समय लग जाता है, तब पारे से शिवलिंग बनकर तैयार होता है।
ये भी ध्यान रखें
घर में जहां शिवलिंग रखा हो, वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। रोज सुबह-शाम शिवलिंग के पास दीपक जलाएं। भोग लगाएं। घर में क्लेश न करें और शिवजी के मंत्र ऊँ नम: शिवाय, ऊँ सांब सदा शिवाय नम: का जाप कर सकते हैं।
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