प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी की जिला अदालत में चल रहे ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले के मुकदमे की सुनवाई पर 17 मार्च तक रोक लगा दी है। 17 मार्च को ही इस मामले की अगली सुनवाई होगी। हाईकोर्ट ने इस मामले में दूसरे पक्षकार को भी नोटिस जारी करके उससे तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। न्यायालय नेदिन-प्रतिदिन सुनवाई करने के वाराणसी की एडीजे कोर्ट के 4 फरवरी 2020 के आदेश को गलत मानते हुए उस पर रोक लगाई है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय भनोट ने आदेश दिया है। ज्ञानवापी मस्जिद की इंतजामिया कमिटी ने अर्जी दाखिल कर वाराणसी जिला कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई शुरू करने पर रोक लगाए जाने की हाई कोर्ट में मांग की थी। बता दें कि साल 1991 में वाराणसी की जिला अदालत में एक अर्जी दाखिल कर यह आरोप लगाया गया कि वाराणसी शहर के चौक इलाके की ज्ञानवापी मस्जिद अवैध तरीके से बनी है। मस्जिद की जगह पहले मंदिर स्थापित था और मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने अपने शासनकाल में मंदिर को गिराकर मस्जिद का निर्माण कराया था।
राम मंदिर विवाद की तर्ज पर दाखिल की गई अर्जी
यह अर्जी ऐनसिएंट आइडल ऑफ स्वयंभू लॉर्ड विश्वेश्वर के मित्र के तौर पर वाराणसी के ही विजय शंकर रस्तोगी ने दाखिल की थी। अर्जी अयोध्या राम मंदिर के विवाद की तर्ज पर दाखिल की गई थी। ज्ञानवापी मसाजिद इंतजामिया कमिटी की तरफ से दो आधार पर इस अर्जी का विरोध किया गया। पहला यह कि, 1991 के धार्मिक स्थलों पर बने नए ऐक्ट के लागू होने के बाद इस तरह का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और दूसरा यह कि देश की आजादी के वक्त के स्टेटस को बदलने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल नहीं की जा सकती है।
डे-टु-डे सुनवाई पर लगाई रोक लगाई गई
ऐनसिएंट आइडल ऑफ स्वयंभू लॉर्ड विश्वेश्वर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले के आधार पर वाराणसी की एडीजे कोर्ट में फिर से अर्जी दाखिल की गई और सुनवाई शुरू किए जाने की अपील की गई। एडीजे कोर्ट ने इस मामले में अर्जी को मंजूर करते हुए सुनवाई शुरू करने और डे-टू-डे बेसिस पर मामले को सुनने का आदेश 4 फरवरी को पारित कर दिया। निचली अदालत ने मस्जिद कमिटी के ऐतराज को नहीं माना।
इस फैसले के खिलाफ मस्जिद कमिटी ने फिर से हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मस्जिद कमिटी के ऐतराज को फौरी तौर पर सही माना और निचली अदालत के सुनवाई किए जाने के फैसले पर रोक लगा दी है। ज्ञानवापी मस्जिद वाराणसी के चौक इलाके में काशी विश्वनाथ मंदिर के नजदीक ही है। यह भी अयोध्या की तरह ही काफी पुराना विवादित मामला है।
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