Wednesday, February 19, 2020

दो साल में बनकर तैयार होगा भव्य राम मंदिर, तबतक अस्थाई बुलेटप्रूफ घेरे में विराजेंगे रामलला, गर्भगृह से 150 मीटर दूर जगह तय

लखनऊ. रामजन्म भूमि ट्रस्ट की पहली बैठक बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के. पाराशरण के आवास पर शाम पांच बजे से आठ बजे तक होगी। बैठक में शामिल होने के लिए राम मंदिर आंदोलन के खास किरदार रहे श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास व विश्व हिंदू परिषद उपाध्यक्ष चंपत राय भी पहुंचे हैं। ट्रस्ट में महंत व चंपत राय को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। दावा किया जा रहा है कि, अयोध्या में भगवान राम का गगनचुंबी मंदिर दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा।आज मंदिर निर्माण की तारीख का ऐलान संभव है। इसको लेकर राम मंदिर आंदोलन से जुड़े अयोध्या के संतो-महंतों में खुशी का माहौल है।

सरकार की तरफ से बताया गया है कि, अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी और जिला मजिस्ट्रेट अयोध्या अनुज कुमार झा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के पदेन सदस्यों के रूप में नामित किया गया है। अगर किसी कारणवश मौजूदा डीएम हिंदू धर्म के नहीं होंगे तो अयोध्या के एडिशनल कलेक्टर (हिंदू धर्म) सदस्य होंगे। अवनीश व अनुज कुमार झा बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।

आज बैठक में उठेंगे ये मुद्दे

राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सूत्रों ने बताया कि, बैठक में राम मंदिर निर्माण के लिए समयसीमा तय हो सकती है। निर्माण के लिए फंड कैसे जुटाया जाए, इसको लेकर भी चर्चा होगी। मंदिर निर्माण के लिए बहुत लोगों ने धनराशि दान की है या वे देना चाहते हैं। ऐसी दशा में चंदे की रकम को जमा करने के लिए एक बैंक एकाउंट ट्रस्ट के नाम पर खोला जाए, इस प्रस्ताव को आज की मीटिंग में रखा जाएगा। मंदिर निर्माण के लिए पैसा एकाउंट में जमा हो, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।मंदिर निर्माण के काम को दो सालों में पूरा करने का लक्ष्य रखा जाएगा। ट्रस्ट से जुड़े लोगो की मंशा है कि, मंदिर निर्माण की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखें।

अस्थाई मंदिर में शिफ्ट होंगे रामलला
बीते 27 सालों से टेंट में विराजमान रामलला सहित चारों भाईयों को मंदिर निर्माण शुरू होने से पहले अस्थाई मंदिर में स्थापित किया जाएगा। ये मंदिर लकड़ी, कांच व फाइबर का होगा। जिसका निर्माण दिल्ली में हो रहा है। ये अस्थाई मंदिर गर्भगृह से 150 मीटर की दूरी पर मानस मंदिर के नजदीक होगा। यह बुलेटप्रूफ होगा।

अदालत ने रामलला को माना था जीवित
मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बुधवार को कहा कि नए मंदिर के निर्माण की सुविधा के लिए मौजूदा मंदिर स्थल को खाली करना होगा। एक भव्य मंदिर मानस भवन के पास बनाया जाएगा, जहां भव्य मंदिर का निर्माण होने तक रामलला को रखा जाएगा। नए मंदिर का निर्माण गर्भगृह के स्थान पर होगा। पूजा के सभी अनुष्ठान निर्बाध रूप से जारी रहेंगे। मंदिर निर्माण के लिए आवश्यक लैंडफिल का आकलन करने के लिए इंजीनियरों और वास्तुकारों के एक समूह ने मंदिर स्थल का दौरा किया था। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में अदालत ने रामलला को एक जीवित संस्था के रूप में मान्यता दी थी।

अयोध्या में उल्लास का माहौल
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े अयोध्या के ज्यादातर संतों-महंतों का मानना है कि 2 अप्रैल चैत्र रामनवमी से मंदिर बनना शुरू हो। तब ग्रह नक्षत्र भी अनुकूल होगें। अयोध्या में इस बात की चर्चा भी है कि, आज होने वाले ट्रस्ट की पहली बैठक में मंदिर निर्माण की तारीख का ऐलान रामनवमी ही होगा। इससे अयोध्या में खुशी का माहौल है। संतों का कहना है कि, अब राम मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी आ गई है।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रस्ट का गठन, पीएम ने खुद दी थी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल 9 नवंबर को राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को दी थी। पांच फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट, एक स्वायत्त संस्था का ऐलान किया था। उन्होंने सरकार द्वारा अधिग्रहीत 67.03 एकड़ भूमि को भी मंदिर के लिए देने की बात कही थी। केंद्र सरकार द्वारा ट्रस्ट का अधिकारिक कार्यालय वकील के. पाराशरण के घर को बनाया है। ट्रस्ट में 15 सदस्य हैं, जिनमें 9 स्थाई और छह नामित सदस्य हैं। केंद्र सरकार ने 12 सदस्यों के नामों की घोषणा की थी। इनमें वकील के. पाराशरण, डॉक्टर अनिल मिश्रा, बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, कामेश्वर चौपाल, महेंद्र द्विनेंद्र दास, शंकाराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीजी महाराज, माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थजी महाराज, युगपुरुष परमानंदजी महाराज, स्वामी गोविंद देव गिरीजी महाराज शामिल हैं।



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अयोध्या में विराजमान रामलला।


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