Tuesday, January 7, 2020

कहां चला गया था निर्भया का दोस्त? पिता ने खोला राज, कहा- घटना से उबरने में बेटे को लगा लंबा समय, दोषी थे फांसी के हकदार

गोरखपुर. 16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा 'निर्भया' से 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी। गंभीर जख्मों के कारण 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। जिस बस में निर्भया से हैवानियत की गई, उस वक्त गोरखपुर के अवनींद्र उसके साथ थे। इस केस में वे ही चश्मदीद गवाह थे। हालांकि, इस केस के निर्भया का दोस्त अवनींद्र अचानक लापता हो गया था। मंगलवार को जब फांसी का ऐलान हुआ तो अवनींद्र के पिता भानु प्रताप पांडेय सामने आए। उन्होंने बताया कि, घटना ने बेटे को झकझोर दिया था, उसे इससे उबरने में लंबा वक्त लगा।

मालूम हो कि, निर्भया केस में निर्भया के दोषियों पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को मंगलवार को फांसी की सजा सुनाई गई। ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है। चारों दोषियों के डेथ वारंट जारी होने के बाद अवनींद्र के पिता ने फैसले पर संतोष जताया है।

अब निर्भया को मिलेगी शांति
पेशे से अधिवक्ता भानु प्रताप पांडेय ने कहा- निर्भया तो वापस तो नहीं आ सकती है। लेकिन, उनके भी मन को शांति मिली होगी। अवनीन्‍द्र के बारे में पूछने पर वे बताते हैं कि वे बाहर विदेश में जॉब कर रहे हैं। उन्‍हें इस घटना से उबरने में काफी समय लग गया है। अभी भी उस रात की घटना को याद कर अवनींद्र घबरा जाते हैं। वे उससे उबरने का प्रयास कर रहे हैं। वे ऐसे दरिंदों को ये संदेश देना चाहते हैं कि वे ऐसा न करे। क्‍योंकि उनका भी हश्र यही होगा। नाबालिग आरोपियों के सवाल पर वे कहते हैं कि तीन साल काफी नहीं है। अपने यहां के कानून की व्‍यवस्‍था के कारण वो बच गया। इसका हम सभी को अफसोस है। जब तक कानून में संशोधन नहीं होगा, ऐसे नाबालिग कानून का लाभ पाते रहेंगे।

ऐसे मामलों में अभी कानून में बदलाव की जरुरत

भानु प्रताप भानु प्रताप पांडेय ने कहा- सभी दोषी इसी के हकदार थे। पूरा देश और वे भी इस फैसले से संतुष्‍ट हैं। ऐसे दरिंदों को फांसी की सजा ही मिलनी चाहिए थी। हालांकि निर्भया के माता-पिता से उनकी बातचीत नहीं हो पाई। लेकिन कहा- उन्‍होंने अपनी बच्‍ची को खोया है। उसकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता है। माता-पिता ने लंबी लड़ाई लड़ी है। पूरा देश उनके साथ खड़ा रहा है। सरकार को इसके आगे झुकना पड़ा और संविधान में संशोधन कर ऐसा कानून लाना पड़ा। हालांकि अभी इसमें और बदलाव की जरूरत है। ऐसे आरोपी जो तीन साल की सजा पाकर छूट गए और इस समाज का हिस्‍सा हैं, उनके लिए और सख्‍त सजा का प्रावधान होना चाहिए।



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घटना की रात गोरखपुर का अवनींद्र निर्भया के साथ था।


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