Tuesday, January 7, 2020

जल्लाद पवन बोला- मैं 5 बेटियों का पिता, दरिंदों को फांसी देने से सुकून मिलेगा, मुझमें चारों को एक साथ फंदे पर लटकाने का हौसला

मेरठ. निर्भया के चारों दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया जाएगा। दिल्ली की पटियाला कोर्ट ने मंगलवार को डेथ वॉरंट जारी कर दिया है। तिहाड़ जेल प्रशासन ने उत्तर प्रदेश केडीजी जेल को पत्र लिखकर जल्लाद को तैयार रखने की बात कही है। इस बात की जानकारी जैसे ही मेरठ के पवन जल्लाद को पता चली तो उसके चेहरे पर सुकून देखने को मिला। पवन ने कहा कि पांच बेटियों का पिता होने के नाते मुझे ऐसे दरिंदों को फांसी देने से बड़ा सुकून मिलेगा। उस बेटी के परिजनको भी सुकून मिलेगा, जिसके साथ इन दरिंदों ने ऐसी हैवानियत की थी। साथ ही यह समाज में कड़ा संदेश भी जाएगा कि इस तरह के कृत्यों की सजा सिर्फ मौत होती है।

पवन ने कहा- निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देनेकीजानकारी मुझे भी मिली है। अगर मुझे चारों को फांसी देने के लिए बुलाया जाता है तो मैं पूरी तरह से तैयार हूं। मैं चारों दोषियों को फांसी देने का हौसला रखता हूं। जैसे ही मुझे सरकारी आदेश मिलेगा, मैं दिल्ली के लिए रवाना हो जाऊंगा।

तिहाड़ जेल प्रशासन ने कुछ दिनों पहले हीयहां केडीजी जेल को पत्र लिखकर जल्लाद मुहैया कराने की बात की थी। उत्तर प्रदेश में दोजल्लाद हैं। एक लखनऊ में तो दूसरा मेरठ का पवन।लखनऊ वाले जल्लाद की तबीयत ठीक नहीं है। पवन ने बताया कि16 दिसंबर को उसे तैयार रहने को कहा गया था। इस बाबत मौखिक सूचना मिली थी। लेकिन उसके बाद कोई सूचना नहीं दी गई। अब मुझे जैसे ही सूचना मिलेगी, मैं उन्हें फांसी देने पहुंच जाऊंगा।

फांसी देते ही सबसे पहले टूटती है गर्दन की हड्डी, दिमाग हो जाता है सुन्न
जल्लाद पवन ने कहा- जिस कैदी को फांसी दी जाती है, उसेआधा घंटा पहले सुरक्षा घेरेमें फांसीघर तक लाया जाता है। तख्ते पर चढ़ाने के बाद उसके दोनों हाथ औरपैर बांध दिए जाते हैं। जल्लाद काला नकाब पहनाता है और गले में फंदा डालकर उसे अच्छी तरह दुरुस्त कर देता है। जैसे ही निश्चित समय होता है तो घड़ी देख रहे अधिकारी रूमाल हिलाकर फांसी का लीवर गिराने का इशारा करते हैं। इशारा मिलते ही जल्लाद लीवर खींच देता है।

शव का वारिस न मिले तो जेल प्रशासन कराता है अंतिम संस्कार
इसके बाद लकड़ी का प्लेटफाॅर्म दो हिस्सों में बंटकर नीचे की ओर गिर जाता है और फंदे पर लटका कैदी एक झटके के साथ हवा में लहराने लगता है। झटका लगने से उसकी गर्दन की हड्डी चटकती है, जिसकी आवाज भी सुनाई देती है। इसके बाद अभियुक्त का दिमाग पूरी तरह सुन्न हो जाता है। 30 मिनट तक फंदे पर लटके रहने के बाद शव को नीचे उतारा जाता है। वहां मौजूद डाॅक्टर उसका परीक्षण करने के बाद उसकी मौत की पुष्टि करता है। इसके बाद शव परिवार वालों को कागजी कार्रवाई के बाद दे दिया जाता है। यदि परिवार के लोग शव लेने नहीं पहुंचते हैं तो कैदी के धर्म के अनुसार उसका अंतिम संस्कार जेल प्रशासन करता है।



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पवन जल्लाद का फांसी देने का काम पुश्तैनी है।


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