जीवन मंत्र डेस्क. वसंत पंचमी मंगलवार और बुधवार दो दिन मनाई जाएगी। पंचांग भेद के कारण पंचमी दो दिन है। माता सरस्वती की पूजा का ये दिन बच्चों के लिए विद्या आरंभ का भी दिन है। तेलंगाना के बासर शहर में गोदावरी नदी के तट पर बने ज्ञान सरस्वती मंदिर में बड़े पैमाने पर वसंत पंचमी पर्व मनाया जाता है। वसंत पंचमी से महाशिवरात्रि तक लगभग 15 दिन यहां उत्सव के होते हैं। माता सरस्वती के इस मंदिर की स्थापना का इतिहास महाभारत से जुड़ा है। मान्यता है कि कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास ने कुछ समय इसी जगह गुजारा था। दंडकारण्य क्षेत्र में शांति की स्थापना के लिए यहां ज्ञान सरस्वती की स्थापना की थी।
बासर या बसर नाम के इस शहर का नाम भी महर्षि वेद व्यास के नाम पर ही है। जब वेद व्यास ने महाभारत युद्ध के बाद कुछ समय यहां साधना की और मंदिर की स्थापना की तो इस क्षेत्र का नाम उनके नाम पर वासर (व्यास) पड़ गया। जिसका कालांतर में अपभ्रंष होकर बासर नाम पड़ गया। मंदिर में माता सरस्वती के अलावा काली, शिव आदि देवी-देवताओं के मंदिर भी है। ये इलाका महाराष्ट्र की सीमाओं से लगा है, इसलिए यहां की भाषा में मराठी घुली हुई है। हैदराबाद से ये शहर लगभग 215 किमी दूर है।
वसंत पंचमी के आसपास बड़े पैमाने पर लोग यहां अपने छोटे बच्चों को लेकर आते हैं। सुबह 4 से 5 बजे के बीच यहां अक्षर अध्ययन कराया जाता है। छोटे बच्चे अपनी तख्तियों पर एक अक्षर लिखते हैं। वैदिक मंत्रों के साथ माता सरस्वती के सामने ही ये पूरी क्रिया कराई जाती है। यहां के लोगों में मान्यता है कि इस मंदिर में अक्षर अध्यापन शुरू करने के बाद बच्चे का दिमाग पढ़ाई में बेहतर रहता है।
वसंत पंचमी से महाशिवरात्री तक का समय इस मंदिर में आने के लिए सबसे बेहतर है। ये शहर तेलंगाना की निर्मल डिस्ट्रिक्ट का हिस्सा है। महाराष्ट्र की सीमा से लगे होने के कारण यहां भाषा को लेकर भी बाहरी लोगों को कोई खास दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2RAUB4G

0 comments: