Saturday, January 11, 2020

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या जाएंगे कॉमनवेल्थ देशों के संसदीय समिति के प्रतिनिधि; रामलला का दर्शन करेंगे

लखनऊ. राम की नगरी अयोध्या में राम मंदिर विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पहली बार 18 जनवरी को कॉमनवेल्थ देशों विदेशी प्रतिनिधियों के साथ राज्यों के स्पीकर व सभापति अयोध्या का भ्रमण करने जाएंगे। इस दौरान वह रामलला के भी दर्शन करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बादअयोध्या जाने वाला यह पहला अतंर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल होगा।संसदीय सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी सदस्यों को अयोध्या भ्रमण का कार्यक्रम पहली बार रखा गया है।भ्रमण के दौरान सदस्यों को अयोध्या की पौराणिकता से रूबरू कराया जाएगा।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला करेंगे सम्मेलन की अध्यक्षता
उप्र में कॉमनवेल्थ देशों के भारतीय क्षेत्र के ससंदीय प्रतिनिधियों का सम्मेलन 16 से 19 जनवरी के दौरान लखनऊ में प्रस्तावित है। जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला करेगें। राज्यसभा के उपसभापति भी शामिल होगें। सम्मेलन में भारतीय क्षेत्र के देश सभी राज्यों की विधानसभाओं के प्रतिनिधियों के साथ कॉमनवेल्थ देशों के सभी 7 अन्य क्षेत्रीय समितियों के 2 या 3 संसदीय प्रतिनिधि ‘आब्जर्बर’के रूप में शामिल होगें।

लोकसभा-राज्यसभा की टीम शामिल होगी
इस सम्मेलन में देश के राज्यों के विधानसभाओं के अध्यक्ष व विधान परिषदों के सभापति व सचिव भी शामिल होगें। लोकसभा व राज्यसभा के 25-25 सदस्यों की टीम भी होगी। यह आयोजना देश की लोकसभा के द्वारा आयोजित होना है। उप्र विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दूबे इसके सचिव बनाए गए है।

18 जनवरी को है अयोध्या भ्रमण का कार्यक्रम
प्रतिनिधियों के बीच 16 से 19 जनवरी को संसदीय प्रणाली के विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श कार्यक्रम के साथ 18 जनवरी को अयोध्या भ्रमण का भी कार्यक्रम तय किया गया है। कुल 141 सदस्यों में से 120 ने लखनऊ आने की सहमति दे दी है। इस टीम में कॉमनवेल्थ क्षेत्रीय उपसमिति के लगभग 20 विदेशी प्रतिनिधि भी होगें।

134 साल पुराने मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला

अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया था। इसके तहत अयोध्या की 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए दे दी गई।

तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था

शीर्ष अदालत ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बने और इसकी योजना तैयार की जाए। चीफ जस्टिस ने मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दिए जाने का फैसला सुनाया, जो कि विवादित जमीन की करीब दोगुना है। चीफ जस्टिस ने कहा कि ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है और हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है।



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After the decision of the Supreme Court, Ayodhya will go to the Parliamentary Committee representatives of the Commonwealth countries; Will visit Ramlala


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