लखनऊ. गांधी शांति यात्रा के तहत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे देश के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने सीएए को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। सिन्हा ने सोमवार को कहा कि सीएए पूरी तरह से संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ है। नागरिकता कानून मेंइस तरह के संशोधन कीकोई आवश्यकता नहीं थी। इसके लिए पहले से ही कानून मौजूद है, जिससे किसी को भी नागरिकता दी जा सकती है। इस काननू को लागू नहीं किया जा सकता है। कहा- सरकार के कदम की वजह से देश में डर, अशांति और कोलाहल का वातावरण फैला हुआ है।
समाजवादी पार्टी के कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह बातें कही। यशवंत सिन्हा ने कहा कि कल शाम को यात्रा लखनऊ पहुंची थी। यात्रा का समापन 30 जनवरी को होगा। इन दोनों तारीखों का अपना महत्व है। 9 जनवरी 1915 को गांधी जी स्वदेश वापस आये थे।इस कानून की कोई आवश्यकता नहीं थी। पहले से ही नागरिकता देने का अधिकार केन्द्र सरकार को है। नए कानून बनाने की कोई जरूरत नहीं थी।
धर्म के आधार पर कानून बनाने की जरुरत नहीं - यशवंत सिन्हा
सिन्हा ने कहा, ''धर्म के आधार पर इस तरह के कानून बनाने की जरूरत नहीं है।सरकार ने जिस भाषा का इस्तेमाल किया है, उसके आधार पर इस कानून को लागू नहीं किया जा सकता।
अभी कानून पूरी तरह से नहीं बना है लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने जिले ज़िले में लोगों की पहचान करनी शुरू कर दी है कि कि किसको किसको नागरिकता दी जानी है।''
समाज को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा-समाज को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश हो रही है।
आज देश की स्थित में शांति परम आवश्यक है। सबसे ज्यादा नुकसान व्यवस्था का होता है, जब देश में अशांति होती है।सरकार के कदम की वजह से देश मे अशांति और कोलाहल का वातावरण फैला हुआ है। इसकी वजह एनआरसी और सीएए है।सरकार का कार्य भय दूर करना होता है। कहा-इसी शहर में गृह मंत्री ने बोला था हम एक इंच नही हटेंगे। क्या गृहमंत्री को ऐसा बयान देना चाहिए। ऐसा बयान उनके मुंह से शोभा नहीं देता है।
सरकार ने कहा था कि नोटबंदी के बाद आंतकवाद की कमर टूट जाएगी, ऐसा नहीं हुआ - अखिलेश
इसे मौके पर अखिलेश यादव ने कहा कि हमें वो दिन याद करना चाहिए जब कहा था नोटबन्दी के बाद आतंकवाद की कमर टूट जाएगी और अवैध ट्रांजेक्शन बंद हो जाएंगे।
फिर कैसे पीएफआई के द्वारा करोड़ों रूपए की मदद की जा रही है। पूर्व सीएम ने कहा कि
अर्थव्यवस्था की डफली फट गई
है तो सरकार सत्य को मारना चाह रही है। इसके लिए वह हिंसा का सहारा ले रही है। जो लोग आज सरकार में बैठे हैं, यही लोग बाद में रजाई में मुंह छुपा कर रोएंगे।
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