जीवन मंत्र डेस्क. ये दौर मैनेजमेंट का है। अच्छा टीम लीडर वो है, जो टीम को साथ लेकर चले, उनसे अपने मनमाफिक काम भी करवा ले और उन्हें एकजुट भी रखे। आज टीम और सहयोगियों को लेकर कई तरह की मैनेजमेंट ट्रिक्स चलती हैं लेकिन बेहतरीन टीम लीडरशिप के उदाहरण हमारे ग्रंथों में मिलते हैं। ऐसा ही एक प्रसंग रामचरित मानस में भी है।
श्रीरामचरित मानस में सीता की खोज के लिए श्रीराम को सहयोग करने का वचन सिर्फ सुग्रीव ने दिया था। वानरसेना सिर्फ सुग्रीव की आज्ञा से लंका पहुंची थी। ये काम उनके लिए एक नौकरी की तरह ही था। लंका पर कूच करने के लिए वानरों की सेना तैयार हो गई थी। जब वानर सेना राम के सामने खड़ी हुई तो उस समय के लिए तुलसीदासजी ने लिखा है कि-
अस कपि एक न सेना माहीं, राम कुसल जेहीं पूछी नाहीं।।
इसका अर्थ यह है कि सेना में एक भी वानर ऐसा नहीं था, जिससे श्रीराम ने व्यक्तिगत रूप से कुशल ना पूछी हो। राम ने इतनी बड़ी वानर सेना में एक-एक वानर से उसका हालचाल पूछा। यहीं से वानरों में श्रीराम के प्रति आस्था जागी। ऐसे राजा कम ही होते हैं जो अपने कर्मचारी से भी उसका हालचाल पूछते हों। राम के इसी गुण ने वानरों में इस युद्ध के लिए व्यक्तिगत लड़ाई का भाव भर दिया था।
श्रीराम के इस गुण से हम सीख सकते हैं कि अपने सहयोगियों के साथ प्रेम से कैसे रहा जाए। हमारे द्वारा पूछा गया एक छोटा सा सवाल भी उसका दिल जीत सकता है। यदि कर्मचारी हमसे खुश रहेंगे तो वे मन लगाकार काम करेंगे और हमारे काम समय पर पूरे भी हो जाएंगे।
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