कन्नौज. शुक्रवार देर रात हुए हादसे में बस में जले दस लोगों के कंकाल पोटली में बांधकर पोस्टमार्टम हाउस में रखे गए हैं। इनमें से एक ही शिनाख्त हो सकी है। बस में सवार अन्य लापता लोगों के परिजन इन अस्थियों को देखने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं। रुंधे गले और नम आंखों से वह अपने मन को यह विश्वास दिलाने में लगे हैं कि उनके प्रियजन घायल होकर किसी अस्पताल में उपचार करा रहे होंगे, वह जल्द वापस आ जाएंगे।
भाई के घर आईं थी उर्मिला, बेटी प्रिया के साथ जयपुर जा रही थीं
फर्रुखाबाद के नारायण नगला निवासी उर्मिला पत्नी कृपाशंकर राठौर अपनी बेटी प्रिया (20) के साथ भाई सुरेश चंद्र के घर ग्राम अमोलर में आई थीं। यहां से उन्हें जयपुर जाना था। शुक्रवार को गांव में श्रीमद्भागवत कथा सुनने के बाद मां-बेटी बस में सवार होकर जा रही थीं। दोनों की झपकी लगी ही थी कि तभी टक्कर की तेज आवाज आई। वह कुछ समझती तभी बस धू-धू करके जलने लगी।
बहादुर बिटिया ने बचाई मां की जान
आंखों में आंसू लिए उर्मिला बताती हैं- "चारों तरफ आग की लपटें थी, हम घबराए हुए थे। ठसाठस भरी बस में सब चीख रहे थे। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। तभी प्रिया ने बहादुरी दिखाते हुए कांच तोड़ दिया और उसमें से प्रिया ने मुझे धकेल कर बाहर निकाल दिया।" हादसे के बाद से प्रिया लापता है। आग का गोला बनी बस में वह लापता हो गई। उर्मिला को उम्मीद है कि बेटी जख्मी होने के कारण कहीं उपचार के लिए भर्ती है। प्रिया के मामा व अन्य परिजन जिले और आसपास शहरों के अस्पतालों में अपनी भांजी को तलाशते घूम रहे हैं, लेकिन उसका पता नहीं चल रहा है।
भीगी आंखों से रईस अपने भाई-भाभी और भतीजे-भतीजी को तलाश रहा
कन्नौज के अस्पतालों में रुंधे गले से आवाज सुनाई दे रही है, जो कभी शहन को पुकारती है तो कभी सादिया को। यह आवाज फर्रुखाबाद के कमालगंज के उगरापुर के रहने वाले रईस अहमद की है। उसका भाई लईक अहमद, भाभी सायरा बेगमा, भतीजी सादिया बानो, भतीजे शहन अहमद और मोहम्मद सईद इसी बस से जयपुर जा रहे थे। रईस हादसे की रात से ही पांचों को सभी अस्पताल में तलाश रहा है। छिबरामऊ के अस्पताल, तिर्वा के मेडिकल कॉलेज समेत आसपास के निजी अस्पतालों में भी तलाशा लेकिन, कुछ पता नहीं चला।
लापता परिवार को बार-बार फोन कर रहा रईस
रईस ने बताया कि भाई शुक्रवार को जब अपने बीवी-बच्चों को लेकर रवाना हुआ तो घर के सभी सदस्य उदास थे। जाने के बाद भी समय-समय पर फोन से बात हो रही थी। बच्चों का हाल ले रहा था, उनसे भी बात कर रहे थे। वह लोग पांच बजे बस में सवार हुए थे, उनसे छह बजे के बाद तक बात हुई, उस समय लईक ने बताया था कि वह गुरसहायगंज में हैं। लेकिन साढ़े नौ बजे के बाद जानकारी मिली कि बस में हादसा हो गया। दौड़कर घरवालों के साथ यहां रात में ही पहुंचे, लेकिन कहीं कोई जानकारी नहीं मिल रही है। कोई अफसर भी कुछ नहीं बता रहे हैं। रात से परेशान हूं, जगह-जगह भटक रहा हूं। बस की दूसरी सवारियां भी कुछ बता नहीं रही हैं। भाई के नंबर पर भी फोन कर रहा हूं, लेकिन कुछ पता नहीं चल रहा।
सिर्फ ट्रक ड्राइवर के शव की ही हुई शिनाख्त
बस हादसे में जान गंवाने वाले 10 लोगों के कंकाल बरामद किए गए हैं। इनमें से पहचान सिर्फ एक की ही हो सकी है। ट्रक चालक अजय उर्फ रिंकू पुत्र पूरन सिंह निवासी विशुनपुर रतीपुर थाना कुरावली जिला मैनपुरी की शिनाख्त हुई है। उसकी पहचान उसके मामा ने की है। बताया गया है कि रिंकू का शव पूरी तरह नहीं जला था। इस वजह से उसकी शिनाख्त आसानी से हो गई है।
पोटली में रखे हैं कंकाल, पांच डॉक्टर करेंगे पोस्टमार्टम
कन्नौज बस हादसे के बाद बस से निकाले गए कंकाल को पोटली में बांध कर पोस्टमार्टम हाउस में रखा गया है। पांच डॉक्टरों की टीम इनका पोस्टमार्टम करेगी। मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री का कहना है कि शव की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट होगा। पूरी कोशिश होगी के मृतकों की संख्या स्पष्ट हो सके। उन्होंने हादसे के लिए बस और डीसीएम के चालकों को दोषी बताया हैं। इसके लिए पांच डॉक्टरों की टीम बनाई गई हैं।
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