Wednesday, January 15, 2020

तिल-गुड़ खाने की परंपरा इसलिए क्योंकि इससे नहीं होता जोड़ों का दर्द और खून की कमी

जीवन मंत्र डेस्क. मकर संक्रांति पर सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दौरान सूर्य की गति उत्तरायण हो जाती है। इस मौसम में जठराग्नि बढ़ जाती है और उसके अनुरूप व्यक्ति को आहार नहीं मिल पाता। ऐसे में जठराग्नि शरीर में पहले से मौजूद धातुओं को पचाने लगती है। इस कमी को पूरा करने के लिए ही मकर संक्रांति से खान-पान में बदलाव करने से बीमारियां नहीं होती।

तिल खाने के फायदे

  • आयुर्वेद के अनुसारइस मौसम में तिल और गुड़ का प्रयोग खून की कमी को दूर करता है। इसके साथ ही हृदय रोग के लिए भी विशेष लाभदायक होता है। तिल में कई न्यूट्रिएंट पाए जाते हैं, जो हृदय रोगियों के लिए काफी लाभदायी होते हैं। तिल में कैंसर प्रतिरोधक क्षमता होती है।
  • तिल में पाया जाने वाला विशेष तत्व फायलेट ट्यूमर खत्म करने में सहायक होता है। साथ ही तिल जोड़ों के दर्द को भी दूर करता है। तिल में पाया जाने वाला एंटीइन्फ्लामेट्री एजेंट और एंटीऑक्सीडेंट जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करता है। तिल अस्थमा और एलर्जी को भी दूर करने में लाभदायक है। यह शरीर की हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। तिल प्रोटीन से भरपूर होती है और डायबिटीज के मरीजों को भी लाभ पहुंचाता है।

गुड़ वात नाशक होता है

इस मौसम में गुड़ का विशेष महत्व है। गुड़ उष्ण होता है। और सांस के रोगों को दूर करता है। गुड़ वात नाशक होता है और बल देता है। गुड़ में मिनरल्स, पोटेशियम, फॉसफोरस और ग्लूकोज होता है। इसके साथ हीइसमें मौजूद आयरन और विटामिन सी गले और फेफड़ों को संक्रमण से बचाते हैं। गुड़ से गैस्ट्रीक प्रॉब्लम दूर हो जाती है। इसको खाने से एनर्जी मिलती है।

सूर्य की किरणें बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

सूर्य की किरणें जीवन देती हैं। इनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। नॉर्वे की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार सूर्य की किरणों से धीरे-धीरे उम्र बढ़ने लगती है। डिप्रेशन और मानसिक परेशानियों से भी राहत मिलने लगती है।सूर्य की किरणों में से मिलने वाला विटामिन डी हमारे शरीर में कैल्शियम के अवशोषण की क्षमता को बढ़ाता है।सूर्य की किरणों से स्नायु तंत्र की कमजोरी दूर होती है। पाचन क्रिया मजबूत होती है और इससे खून का संचार भी संतुलित रहता है। इसके साथ ही हड्डियां भी मजबूत होती हैं।

मकर संक्रांति से खाने चाहिए नए चावल और गुड़ से बनी चीजें

मकर संक्रांति से आयुर्वेद में आदान काल शुरू हो जाता है। इस दौरान सूर्य की किरणें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। इस मौसम में दूध, घी, तेल, दूध से बनी मिठाइयां, चीनी-गुड़ से बने पदार्थ, नए चावल, शहद का सेवन करना चाहिए। इस मौसम में धूप का सेवन, मालिश और गर्म स्थान पर निवास करना चाहिए। इस मौसम में जल्दी पचने वाले, तीखे पदार्थ, करेला, शीतल पेय जैसी चीजें खाने से बचना चाहिए।

खिचड़ी खाना भी लाभदायक

इस मौसम में खिचड़ी खाना भी लाभदायक होता है। खिचड़ी का प्रयोग शरीर के साथ यह ग्रहों की स्थिति मजबूत करने में सहायक होता है। खिचड़ी में हरी सब्जी मिलाने से बुध ग्रह प्रभावित होता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार के अनुसार खिचड़ी में उपयोग होने वाले चावल से चंद्रमा, उड़द दाल से शनि और हरी सब्जियों के प्रयोग से बुध ग्रह से जुड़े दोष खत्म होते हैं।



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Tradition of eating sesame and jaggery because it does not cause joint pain and anemia


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