- एकादशी पर रोज सुबह जल्दी उठें। स्नान करते समय तीर्थों का, सभी नदियों का ध्यान करें। नहाने के बाद किसी शिव मंदिर जाएं या घर के मंदिर में ही शिव पूजा की व्यवस्था करें। सुबह शिवलिंग या शिव मूर्ति को पवित्र जल स्नान कराएं।
- शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। मंत्र ऊँ नम: शिवाय, ऊँ महेश्वराय नम:, ऊँ शंकराय नम:, ऊँ रुद्राय नम: आदि मंत्रों का जाप करें। चंदन, फूल, प्रसाद चढ़ाएं। धूप और दीप जलाएं। शिवजी को बिल्वपत्र, धतूरा, चावल अर्पित करें।
- भगवान को प्रसाद के रूप में फल या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें। पूजन के बाद धूप, दीप, कर्पूर से आरती करें। शिवजी का ध्यान करते हुए आधी परिक्रमा करें। भक्तों को प्रसाद वितरित करें। ये पूजा की सामान्य विधि है। इस विधि से ब्राह्मण की मदद के बिना भी शिव पूजा कर सकते हैं।
- धूप-दीप जलाकर शिव मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें और इसके लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें।
गौरीकान्तं त्रितयनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं। वन्दे शम्भुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।
इस मंत्र के साथ ही शिवजी के इन मंत्रों का भी जाप किया जा सकता है...
- ऊँ नमो महादेवाय, ऊँ नम: शूलपाणये, ऊँ नमो महेशाय, ऊँ नमो हराय, ऊँ नम: शिवाय, ऊँ नम: पशुपतये, ऊँ नम: पिनाकिने
- पूजा के बाद भगवान से क्षमा प्रार्थना करें। स्वयं और परिवार की सुख और मंगल की कामना करें।
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