मेरठ. नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में बीते 20 दिसंबर को मेरठ में हिंसा हुई थी। इस दौरान पांच लोगों की जान गई थी। गुरुवार को मेरठ पुलिस ने हिंसा से जुड़े दो विजुअल जारी किए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि, प्रदर्शनकारियों ने एक दुकान के भीतर मौजूद 30 पुलिसकर्मियों व रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों को जिंदा जलाने की योजना बनाई थी। हालांकि, समय रहते एसएसपी अजय साहनी मौके पर पहुंचे और उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को बाहर निकाला था।
बीते साल 20 दिसंबर को लिसाड़ी गेट पर भीड़ ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन किया था। पुलिस ने रोकने का प्रयास किया तो पथराव किया गया। पुलिस ने भीड़ को बल पूर्वक तितर बितर किया। इसी बीच 30 सुरक्षाकर्मी एक दुकान पर बैठे हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों को दुकान के भीतर बंद कर दिया और वहां आग लगाने की कोशिश की। इसकी सूचना मिलते ही एसएसपी अजय साहनी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान भीड़ की तरफ से फायरिंग की गई। फायरिंग में आरएएफ के दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
मेरठ में हिंसा के मामले में 13 मुकदमे दर्ज हैं। जिसमें 148 लोग नामजद और 500 अज्ञात शामिल हैं। पुलिस ने हिंसा फैलाने वाले आरोपियों की शिनाख्त की है। जिनके शहर भर में पोस्टर चस्पा हैं।
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