जीवन मंत्र डेस्क. गुस्से में बोली गई बातों से दूसरों के मन को ठेस पहुंचती है और रिश्ते बिगड़ जाते हैं। इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार पुराने समय में एक सेठ को छोटी-छोटी पर गुस्सा आ जाता था। क्रोध में उसे अच्छे-बुरे का ध्यान नहीं रहता और वह दूसरों को ऐसी बातें बोल देता था, जिससे सभी को दुख होता था। सेठ के ऐसे व्यवहार की वजह से उसके गांव के सभी लोग बहुत परेशान थे।
जब ये बात क्षेत्र के संत को मालूम हुई तो उन्होंने सेठ को मिलने के लिए अपने आश्रम में बुलवाया। सेठ आश्रम में पहुंचा तो संत ने उसे आदर सहित बैठाया और पीने के लिए दूध दिया। दूध पीते ही सेठ ने कहा कि ये तो बहुत कड़वा है।
संत ने उससे पूछा कि क्या सच में आपकी जीभ ये जानती है कि कड़वा क्या होता है?
सेठ ने जवाब दिया कि गुरुदेव कड़वी चीज जैसे ही जीभ पर आती है, स्वाद को तुरंत मालूम हो जाता है।
संत ने कहा कि नहीं भाई ऐसा नहीं है, कड़वी चीज जीभ पर आते ही मालूम नहीं होता है, अगर ये बात सही होती तो लोग कड़वे शब्द ही क्यों बोलते?
सेठ को संत की बात समझ नहीं आई। वह चुप रहा। संत ने फिर कहा कि भाई तुम भी ये बात ध्यान रखो, जो लोग कड़वा बोलते हैं, दूसरों को अनाप-शनाप बोलते हैं, उनकी जीभ भी ठीक ऐसे ही गंदी हो जाती है, जैसे अभी कड़वा दूध पीने से हुई है।
सेठ को संत की ये बात समझ आ गई और उसने क्रोध को काबू करने का संकल्प लिया। उसने संत से कहा कि अब से वह सभी से प्रेम ही बात करेगा।
कथा की सीख
क्रोध की वजह से अच्छे-अच्छे रिश्तों में भी दरार आ सकती है। इसीलिए क्रोध को काबू करना चाहिए। अगर क्रोध आता है तो उस समय मौन रहना चाहिए। तभी रिश्ते बिगड़ने से बच सकते हैं।
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