लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने को पूर्व सांसद पवन कुमार पांडेय के खिलाफ आईपीसी की धारा 216 के तहत आरोप तय कर दिया। कोर्ट ने आरोप तय करते हुए सात मार्च को अभियोजन को अपना गवाह पेश करने का आदेश दिया है। इस दौरान अभियुक्त पवन कुमार पांडेय अदालत में हाजिर थे।
अदालत विशेष जज पवन कुमार राय ने हत्या के अभियुक्तों को शरण देने के आरोप में गुरुवार को यह फैसला सुनाया। यह मामला राजधानी के बहुचर्चित लक्ष्मी शंकर यादव हत्याकांड से जुड़ा है। पवन पांडेय पर इस हत्याकांड के अभियुक्त अंगद यादव, सुरजपाल यादव व रमेश कालिया को शिवसेना कार्यालय अकबरपुर में शरण देने का आरोप है। विशेष अदालत ने पिछली तारीख पर पवन पांडेय के खिलाफ गैर जमानती वारंट व साथ ही कुर्की की कार्यवाही के लिए नोटिस भी जारी करने का आदेश दिया था।
दरअसल, 22 अक्टूबर, 1995 को को इस मामले की एफआईआर विजय कुमार यादव ने थाना हजरतगंज में दर्ज कराई थी। जिसके मुताबिक बसपा सरकार में राज्य मंत्री रहे अंगद यादव के साथ ही रमेश कालिया व सुरजपाल तथा अन्य लोग उनके घर में घुस गए। उस समय मेरे पिता लक्ष्मी शंकर यादव अंदर कमरे में थे।
अंगद ने ललकारा कि मारो इसे, बचने न पाए। इस पर उनके साथ आए लोगों ने गोलियां चलानी शुरु कर दी। मेरे पिताजी लहुलुहान होकर गिर पड़े। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां डाॅक्टरों ने उन्हंे मृत घोषित कर दिया। मई, 1996 में इस मामले में पवन कुमार पांडेय के खिलाफ आईपीसी की धारा 216 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
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