Saturday, February 22, 2020

ईशा फाउंडेशन में आदियोगी की आराधना के साथ पूरी रात मना महाशिवरात्रि पर्व

कोयंबटूर. भारत के माननीय उपराष्ट्रपति इस वर्ष ईशा योग केंद्र में मनाये जाने वाले महाशिवरात्रि महोत्सव में शामिल हुए। रात भर चलने वाले इस उत्सव में लाखों लोगों ने भाग लिया। ईशा में महाशिवरात्रि के आयोजन की यह 26वीं वर्षगांठ थी, जो आदियोगी की उपस्थिति में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ 21 फरवरी शाम 6 बजे से, 22 फ़रवरी सुबह 6 बजे तक मनाई गई। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू मुख्य अतिथि थे। उन्होंने ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु की अंग्रजी पुस्तक “डेथ - एन इनसाइड स्टोरी” का विमोचन किया।

सद्गुरु ने उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा, आज महाशिरात्रि पर, भारत के प्रिय उपराष्ट्रपति का हमारे साथ होना सौभाग्य की बात है। सद्गुरु ने श्री नायडू को महायोग यज्ञ प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया, यह योग को पूरे विश्व में पहुंचाने का प्रतीक है। इसके पहले सद्‌गुरु ने उपराष्ट्रपति को ईशा योग केंद्र का दौरा कराया और उनके लिए ध्यानलिंग योग मंदिर में पंच-तत्वों को शुद्ध करने की प्रक्रिया पंचभूत आराधना भी की। वे लिंग भैरवी देवी मंदिर भी गए। श्री नायडू ने कहा, योग जो व्यक्तिगत रूपांतरण की एक तकनीक है, आदियोगी उसकी प्रेरणा हैं और उसका प्रतिनिधित्व करते हैं।

सद्गुरु की पुस्तक डेथः एन इनसाइड स्टोरी का विमोचन करते उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू।

महाशिवरात्रि को इतने विशाल स्तर पर आयोजित करने और उसे विश्व स्तर पर एक त्यौहार का रूप देने लिए वेंकैया नायडू ने सद्गुरु को बधाई दी। महादेव शिव को प्रकृति के करीब बताते हुए उन्होंने ईशा के द्वारा पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों, हरा-भरा वेलिंगिरी पर्वत और नदियों को बचाने के अभियानों की सराहना की। कावेरी कॉलिंग अभियान का महत्व बताते हुए श्री नायडू ने इस अभियान में सभी लोगों को आपने भविष्य के खातिर शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

ईशा फाउंडेशन के कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु।

महाशिवरात्रि की रात में जगे रहने के फायदों को बताते हुए सद्गुरु ने कहा, “इस रात में, उत्तरी गोलार्ध में ग्रहों की कुछ खास दशा के कारण मानव शरीर में उर्जा कुदरती रूप से ऊपर की ओर चढ़ती है। यह पूजा करने के लिए नहीं है, ना ही यह कोई विश्वास या मत है, यह एक इंसान के रूप में निखरने और बेहतर बनने के लिए है। यह मेरी कामना और आशीर्वाद है कि यह रात सिर्फ जागरण की रात ही नहीं, बल्कि जागृति की रात बन जाए।

आदियोगी शिव की प्रतिमा।

रात भर चलने वाले इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में लेबनीज बैंड, पार्थिव गोहिल एंड ट्रूप्स, गायक कार्तिक और साउंड्स ऑफ़ ईशा के साथ कई शास्त्रीय और लोक कलाकारों ने नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां दी। इसके साथ कार्यक्रम में सद्‌गुरु ने प्रवचन दिये और ध्यान क्रियायें करवायीं। सद्‌गुरु ने लाखों लोगों को मध्य रात्रि के समय शक्तिशाली ध्यान क्रिया भी करवायी। यह ऐसी ध्यान प्रक्रिया है जिसमे भाग लेने के लिए लोग प्रतीक्षा करते हैं।

आदियोगी की आराधना में रातभर हुए सांस्कृतिक आयोजन।

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, तमिलनाडु के कैबिनेट मंत्री श्री एसपी वेलुमणि, श्री डिंडुगुल श्रीनिवासन और श्री उडुमलाई राधाकृष्णन, और कर्नाटक के मंत्री डॉ के सुधाकर भी शामिल थे। 80 से अधिक टेलीविजन और वेब चैनलों ने इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण करके दुनिया भर के उन लाखों लोगों तक इस उत्सव को पहुँचाया जो कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित नहीं हो पाए। सद्गुरु ने सभी टीवी चैनलों को भी धन्यवाद दिया, और कहा "आप में से जो लोग यहां उपस्थित नहीं हैं, लेकिन ऑनलाइन हैं, या टेलीविजन के माध्यम से हमारे साथ हैं, उन सभी चैनलों के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूँ जो इसे दुनिया भर के लोगों तक ले जा रहे हैं।"

आयोजन स्थल पर उपस्थित सभी श्रधालुओं को महाअन्नदान के रूप में प्रसाद परोसा गया।

आगंतुकों को रुद्राक्ष का एक मनका और सर्प सूत्र प्रसाद के रूप में भेंट किया गया। एक लाख आठ रुद्राक्षों की माला जो आदियोगी पर पिछले वर्ष सुशोभित थी, रुद्राक्ष प्रसाद के रूप में वितरित की गई। सर्प सूत्र स्थिरता और कल्याण के लिए बाईं अनामिका पर पहने जाने वाली एक पवित्र तांबे की अँगूठी है।



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Isha Foundation celebrates Mahashivratri festival all night with worship of Adiyogi


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