लखनऊ. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष जज संदीप कुमार ने यूपीपीसीएल पीएफ घोटाला मामले में निरुद्ध एसएमसी ग्लोबल के वाइस प्रेसीडेंट महेश कुमार गुप्ता व चार्टड एकाउटेंट आलोक गर्ग की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। उन्होंने प्रथम दृष्टया इन दोनों अभियुक्तों के अपराध को गंभीर करार देते हुए यह आदेश जारी किया।
अदालत के समक्ष अभियोजन की ओर से विशेष वकील अनिल प्रताप सिंह ने अभियुक्तों की जमानत अर्जी का जोरदार विरोध किया। उनका कहना था कि दिल्ली स्थित एसएमसी ग्लोबल एक ब्रोकरेज कम्पनी है। इस मामले के एक अन्य अभियुक्त व चार्टड एकाउटेंट ललित गोयल ने अभियुक्तों से उनकी कम्पनी में पीएफ की रकम जमा कराने का सौदा किया। जिसके एवज में अभियुक्तों ने जमा रकम की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी देने पर रकम जमा करने की सहमति दे दी।
इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक हाउसिंग व डीएचएफएल से पीएफ की रकम अभियुक्तों की कम्पनी में जमा कराई गई। फिर अभियुक्तों ने पहले से तय उस रकम में अपने हिस्से का 25 प्रतिशत काटकर करीब 11 करोड़ 59 लाख रुपए छह अलग अलग फर्जी खातों में जमा करा दिए।
विवेचना के दौरान इन दोनों अभियुक्तों का नाम प्रकाश में आने पर इन्हें आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468 व 471 के साथ ही 120 (बी) व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। यूपीपीसीएल के इस पीएफ घोटाला मामले की एफआईआर वर्तमान सचिव ट्रस्ट आईएम कौशल ने थाना हजरतगंज में दर्ज कराई थी।
यह है मामला
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के एक लाख से अधिक कर्मचारियों की सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ)और अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ) के 2267.90 करोड़ रुपये दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में फंस गए हैं। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसके लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे।
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