Wednesday, February 26, 2020

3 छात्रों ने 1000 रूपए में कबाड़ से बनाया सेना के लिए "रक्षक रोबोट", दावा- इजरायल की टेक्नोलॉजी को देगा मात

वाराणसी. अनजान रास्ते पर भी सहूलियत से चलने का हुनर रखते हैं, अरे हम नए भारत के युवा हैं, जिंदगी भर जिंदगी से लड़ने का सब्र रखते हैं...। ये लाइनें काशी में सारनाथ स्थित अशोका इंस्टीट्यूट में पढ़ने वाले मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र अर्पित कुमार सिंह, दिव्यांशु सिंह व प्रतीक सिंह की रहनुमाई करती हैं। तीनों ने मिलकर महज एक हजार रूपए की लागत से रोबोट गार्ड 'रक्षक' बनाया है। छात्रों का दावा है कि, उनका देसी रोबोट बॉर्डर पर पेट्रोलिंग के लिए कारगर साबित होगा। यदि 50 हजार रूपए खर्च कर इसे बुलेट प्रूफ और आर्मर से लैस कर दिया जाए तो काफी कारगर साबित हो सकता है।

हर विपरीत परिस्थिति में कारगर

छात्रों का कहना है कि, सरहद की निगेहबानी के लिए हमारे भारतीय जवान कहीं हाड़ कंपा देने वाली -15 से -30 डिग्री सेल्सियस ठंड में पेट्रोलिंग करते हैं तो कहीं 53 डिग्री सेल्सियस तापमान में दुश्मनों से लोहा लेते हैं। दावा है कि, ये पूरी तकनीक इजरायल के रोबोट गार्ड का अपग्रेड वर्जन है, जो रोप-वे से जुड़कर सेना के जवानों का काम आसान करेगा। जरुरत पड़ी तो जवानों को सतर्क करने के साथ दुश्मनों पर फायर भी झोंक सकता है।


रोबो के जरिए दुश्मनों से हो सकती है बात, जवानों को अलर्ट भी देगा

छात्र अर्पित ने बताया रक्षक में तीन कैमरे लगे हैं। एक नाइट विजन, दूसरा थ्री डी और तीसरा नार्मल कैमरा है, जो अलग-अलग परिस्थितियों में बॉर्डर पर होने वाली हरकत को कैप्चर करेगा। इसमें टू वे कम्युनिकेशन सिस्टम लगा है। जिसके जरिए सेना के जवान अपने दुश्मन से बात भी कर सकते हैं। जवानों को एलर्ट करने के लिए अलार्म भी लगा है। जरूरत पड़ने पर रोबोट में फिट गन को वायरलेस ट्रिगर के जरिए कंट्रोल रूम से ऑपरेट कर फायर भी किया जा सकता है।

कबाड़ से इस तकनीकी का हुआ प्रयोग
प्रतीक कुमार सिंह ने बताया कि इस सिस्टम में मोबाइल का ट्रांसमीटर, चिप, खराब फोन का कैमरा इस्तेमाल किया गया है। दिव्यांशु सिंह ने बताया पीएम मोदी जब 2017 में इजरायल गए थे, तभी इसका आइडिया आया था।



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अशोक इंस्टीट्यूट के छात्र अर्पित, दिव्यांशु व प्रतीक।
मॉडल।
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