Saturday, January 25, 2020

यहां चंद्रशेखर आजाद ने स्वतंत्रता तो कई नेताओं ने चुनाव की रणनीति बनाई; सनी देओल की फिल्म का केंद्र भी रही

वाराणसी. काशी के तमाम रंगों में एक रंग अस्सी घाट पर एक चाय की दुकान भी है। इस चाय की दुकान पर बैठकर चंद्रशेखर आजाद ने स्वतंत्रता संग्राम की रणनीति तैयार की तो आजाद भारत में कई नेताओं ने यहां बैठकर चुनाव जीतने की योजना भी बनाई। इस दुकान पर दिन भर शहर के बुद्धिजीवी तमाम विषयों पर चर्चा करते हैं। इनमें बीएचयू के वर्तमान और पूर्व प्रोफेसर्स भी शामिल हैं।

आजादी के पहले जंगल था यह इलाका


बीएचयू के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्रा बताते हैं- चंद्रशेखर आजाद जब अंग्रेजों से छिपने के लिए काशी आए, तब यह इलाका जंगल था। आजाद अस्सी मोहल्ले में रहते थे। तुलसी घाट स्थित अखाड़ा तुलसीदास में वह कसरत और कुश्ती का अभ्यास करते थे। प्रोफेसर मिश्रा बताते हैं कि उन्होंने कुछ शोध पत्र लिखे हैं, जिसमें यह बताया गया है- चंद्रशेखर आजाद अस्सी घाट की प्रसिद्ध पप्पू की दुकान पर बैठकर आजादी की लड़ाई की रणनीति बनाते थे।

क्रांतिकारियों तक पर्चे पहुंचाने का ठिकाना था


प्रोफेसर मिश्रा बताते हैं- चंद्रशेखर आजाद अंग्रेजों के खिलाफ पर्चे बंटवाते थे। प्रिंटिंग प्रेस पर पर्चे छपवाना महंगा भी था और जोखिम भरा भी था। इसलिए, वह कार्यकर्ताओं से पर्चे लिखवाते थे और पप्पू की दुकान से ही विभिन्न इलाकों के क्रांतिकारियों के पास हस्तलिखित पर्चे भिजवाते थे। यह भी कहा जा सकता है कि यह दुकान क्रांतिकारियों के मिलन का महत्वपूर्ण ठिकाना थी।

100 साल पुरानी दुकान को तीसरी पीढ़ी चला रही


1915 में फौज से रिटायर हुए बलदेव सिंह ने अस्सी घाट पर यह दुकान खोली थी। इस दुकान को प्रसिद्धि तब मिली जब बलदेव के बेटे पप्पू सिंह ने इस दुकान पर बैठना शुरू किया। अब पप्पू के चार बेटे हैं। सबसे छोटे सतीश बताते हैं- चारों भाई अलग-अलग समय पर दुकान को चलाते हैं। सतीश बताते हैं- दुकान पर आने वाले बीएचयू के प्रोफेसर्स चर्चा कहतेहैं कि असहयोग आंदोलन की रणनीति इसी दुकान पर बैठकर बनी थी।

सनी देओल की फिल्म में दिखी यह दुकान


काशीनाथ सिंह के उपन्यास काशी का अस्सी पर चंद्रप्रकाश द्विवेदी के निर्देशन में मोहल्ला अस्सी फिल्म बनी थी। इसकी मुख्य भूमिका में सनी देओल थे। इस फिल्म के कई सीन पप्पू की चाय की दुकान पर ही फिल्माए गए हैं। फिल्म में भी कई विद्वानों को स्थानीय भाषा में देश-दुनिया के तमाम विषयों, सामाजिक स्थिति और राजनीति पर चर्चा करते दिखाया गया है।

राजनीति के दिग्गजों की बैठक भी रही


आजादी के बाद पप्पू की दुकान राजनीतिक विचारों के आदान प्रदान का केंद्र बन गई। यहां जॉर्ज फर्नांडिस, कमलापति त्रिपाठी, कलराज मिश्रा जैसे नेता भी बैठक करते रहे हैं। दावा तो यह भी है- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाय पे चर्चा का आइडिया भी काशी के लोगों ने पप्पू की दुकान पर होने वाली बैठकों का उदाहरण देकर किया था।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस ने भी कभी इस दुकान पर चाय का पी थी
अपने समय में दुकान पर चाय बनाते सतीश के पिता विश्वनाथ सिंह उर्फ पप्पू
दुकान पर लोगों की लिए बनती चाय
दुकान पर चाय बनाते पप्पू के पोते सतीश सिंह
अखाड़ा गोस्वामी तुलसी दास: यहां कभी चंद्रशेखर आज़ाद कुश्ती लड़ते थे और वर्जिश किया करते थे


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2veROoP

SHARE THIS

Facebook Comment

0 comments: