जीवन मंत्र डेस्क. शुक्रवार, 10 जनवरी की रात मांद्य चंद्र ग्रहण हो रहा है। इस दिन पौष मास की पूर्णिमा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार मांद्य ग्रहण का सूतक नहीं रहता है और इसका धार्मिक महत्व भी नहीं है। पूर्णिमा पर पूरे दिन पूजा-पाठ किए जा सकते हैं। इसी पूर्णिमा से माघ मास के स्नान भी शुरू हो जाएंगे। माघ मास में नदियों में स्नान करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। जानिए पौष मास की पूर्णिमा और मांद्य चंद्र ग्रहण से जुड़ी खास बातें...
मांद्य चंद्र ग्रहण कब से कब तक, क्यों होता है ये ग्रहण
पं. शर्मा के अनुसार निर्णय सागर पंचांग में बताया गया है कि 10 जनवरी को लगने वाला ग्रहण रात में 10.38 बजे से शुरू होगा। इसका मध्य 12.40 बजे होगा, मोक्ष रात 2.42 बजे पर होगा। ये ग्रहण करीब 4 घंटे 50 मिनट का रहेगा। इस ग्रहण का सूतक या अन्य कोई धार्मिक प्रभाव नहीं रहेगा। जब चंद्र पृथ्वी और सूर्य एक सीधी लाइन में आ जाते हैं। तब पृथ्वी की वजह से चंद्र पर सूर्य की रोशनी सीधे नहीं पहुंच पाती है और पृथ्वी की छाया पूरी तरह से चंद्र पर पड़ती है। इस स्थिति को ही चंद्र ग्रहण कहते हैं। जबकि मांद्य चंद्र ग्रहण में चंद्र पृथ्वी और सूर्य एक ऐसी लाइन में रहते हैं, जहां से पृथ्वी की हल्की सी छाया चंद्र पर पड़ती है। ये तीनों ग्रह एक सीधी लाइन में नहीं होते हैं। इस वजह से मांद्य चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है।
पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम कर सकते हैं
- पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। आप अपने घर में स्वयं कथा का पाठ कर सकते हैं या किसी ब्राह्मण से भी करवा सकते हैं। ऐसा करने से घर की पवित्रता और सकारात्मकता बनी रहती है। हमारे विचारों की नकारात्मकता खत्म होती है।
- इस दिन शिवजी और चंद्र की पूजा खासतौर पर करनी चाहिए। पूर्णिमा पर चंद्र पूरे प्रभाव में होता है। शिवजी ने चंद्र को अपने मस्तक पर धारण किया है। इस वजह से इन दोनों की पूजा पूर्णिमा पर विशेष रूप से की जाती है।
- पूर्णिमा से माघ मास के स्नान शुरू होंगे। पवित्र नदियों में स्नान करें और जरूरतमंद लोगों को दान करना चाहिए।
- इस तिथि पर घर के मंदिर में स्थापित बाल गोपाल की विशेष पूजा करनी चाहिए। दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। तुलसी के पत्तों के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
- हनुमानजी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। केसर मिश्रित दूध लक्ष्मी-विष्णु का अभिषेक करें।
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