Wednesday, January 15, 2020

भाग्य और डर से जीतना है तो अपने आत्मविश्वास को मजबूत करना चाहिए

जीवन मंत्र डेस्क. महाभारत के युद्ध में कुरूक्षेत्र में कौरव और पांडवों की सेनाएं आमने-सामने थीं। कौरवों के पास महारथियों के साथ विशाल सेना थी, जबकि पांडवों के पास कौरवों के मुकाबले काफी कम सेना और कुछ ही महारथी थे। उस समय यदि कोई भाग्यवादी होता तो यही मान लेता कि पांडवों की हार तय है। कौरवों से लगभग आधी सेना के साथ पांडव युद्ध कैसे लड़ सकते थे। खुद युधिष्ठिर ने भी युद्ध के पहले ही स्वीकार कर लिया था कि पांडवों की हार तय है, क्योंकि सेना बहुत कम थी।

भाग्य के नजरिए से तो पांडवों की हार ही दिख रही थी। अर्जुन ने पांडव सेना को समझाया कि सेना कम है तो क्या हुआ, हम अपना प्रयास पूरी ईमानदारी से करेंगे। हमारे साथ धर्म है, स्वयं भगवान श्रीकृष्ण हैं। हमें पराजय के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। हमारे हाथ में युद्ध करना है, परिणाम परमात्मा के हाथ में है। बस इसी बात से पांडव सेना में उत्साह आ गया और श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन से पूरे युद्ध का नजारा बदल गया।


हमारा जीवन भी एक कुरूक्षेत्र की तरह ही है, जहां परेशानियां ज्यादा है और आसान रास्ते कम हैं। अगर भाग्य के भरोसे रहेंगे तो इन आसान रास्तों का भी ठीक से उपयोग नहीं कर पाएंगे। इसीलिए ईमानदारी से करना चाहिए। हमारे प्रयासों के आधार पर ही तय होता है कि सफलता मिलेगी या असफलता।



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Mahabharat Mahabharata story If you want to win with luck and fear, then you must strengthen your confidence


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