जीवन मंत्र डेस्क. गुरुवार, 23 जनवरी की रात सूर्य पुत्र शनि राशि बदल रहा है। इन ग्रह को न्यायाधीश माना गया है। शनि के राशि बदलने से कुछ राशियों के लिए परेशानियां बढ़ सकती हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शनि न्यायाधीश हैं, ये ग्रह हमारे अच्छे-बुरे कर्मों का फल प्रदान करता है। शनि के अशुभ असर से बचने के लिए शनि के दस नाम वाले मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप हर शनिवार को करेंगे तो सकारात्मक फल मिल सकते हैं।मंत्र जाप शनि मंदिर में, शिव मंदिर में या किसी पीपल के पास करना चाहिए। इन नामों का जाप करने से शनि दोष दूर होते हैं। साढ़ेसाती और ढय्या में भी शुभ फल मिल सकते हैं।
ये है शनि के दस नामों का मंत्र
कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।
सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।
इस मंत्र के अनुसार कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद और पिप्पलाद। इन दस नामों से शनिदेव का स्मरण करने से सभी शनि दोष दूर हो जाते हैं।
ऐसे कर सकते हैं पूजा
- शनिवार को सुबह जल में काले तिल डालकर स्नान करें। स्नान के बाद किसी मंदिर जाएं और पूजा करें। शिवलिंग पर दूध-जल चढ़ाएं, शनि को तेल अर्पित करें और पीपल पर दूध और जल चढ़ाएं। इसके बाद शनि के 10 नामों का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। ये दस नाम मंत्र समान ही माने जाते हैं।
- शनि को शमी के पत्ते विशेष प्रिय हैं। इसीलिए ये पत्ते जरूर चढ़ाएं। शनि को अपराजिता के फूल चढ़ाएं। ये फूल नीले होते हैं। शनि नीले वस्त्र धारण करते हैं और उन्हें नीला रंग प्रिय है। इसी वजह से शनि को ये फूल चढ़ाते हैं।
- शनि को तेल चढ़ाने की परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है और अधिकतर लोग शनिवार को तेल का दान भी करते हैं। तेल के साथ ही काले तिल का कारक शनि ही है। शनि को काली चीजें प्रिय हैं। इसी वजह से शनि की पूजा में काले तिल भी चढ़ाए जाते हैं।
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